ज्येष्ठ मास के तीसरे बड़े मंगल का धार्मिक महत्व, हनुमान जी की विशेष पूजा विधि और लखनऊ के ऐतिहासिक भंडारों की परंपरा के बारे में विस्तार से पढ़ें।
तीसरा बड़ा मंगल 2026: तिथि, महत्व, पूजा विधि और लखनऊ की अनूठी परंपरा
सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के सभी मंगलवारों को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के क्षेत्रों में इसका एक अलग ही सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रंग देखने को मिलता है। ज्येष्ठ माह का प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन माना जाता है। इसी कड़ी में ‘तीसरा बड़ा मंगल’ भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस समय तक जेठ की तपती गर्मी में सेवा और समर्पण का भाव अपने चरमोत्कर्ष पर होता है।
तीसरे बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार के दिन ही प्रभु श्री राम की मुलाकात अपने परम भक्त हनुमान जी से हुई थी। इसके अतिरिक्त, एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, इसी मास में महाभारत काल के दौरान भीम का घमंड चूर करने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण किया था, जिसके कारण इन्हें ‘बुढ़वा मंगल’ भी कहा जाता है।
तीसरे बड़े मंगल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह ज्येष्ठ मास के मध्य में आता है। इस दिन व्रत रखने, सुंदरकांड का पाठ करने और संकटमोचन हनुमान जी की आराधना करने से जीवन के सभी बड़े से बड़े संकट, कुंडली के ग्रह दोष (विशेषकर शनि और मंगल दोष) और मानसिक क्लेश दूर हो जाते हैं।
लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब और बड़ा मंगल
बड़े मंगल का इतिहास और इसकी परंपरा लखनऊ की प्रसिद्ध गंगा-जमुनी तहजीब (सांस्कृतिक एकता) से गहराई से जुड़ी हुई है। इतिहासकार बताते हैं कि इस पर्व की शुरुआत अवध के नवाबों के काल में हुई थी।
भंडारे और सेवा भाव: प्यासे को पानी, भूखे को अन्न
तीसरे बड़े मंगल के दिन लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों की सड़कें उत्सव के रंग में रंग जाती हैं। हर कुछ कदमों पर भव्य पंडाल और भंडारे दिखाई देते हैं। जेठ की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में भक्तों की सेवा के लिए जगह-जगह ठंडे पानी, रूहअफजा के शर्बत, आम पन्ना और लस्सी के स्टॉल लगाए जाते हैं।
भंडारे में मुख्य रूप से पारंपरिक ‘पूरी-कचौड़ी’ और ‘आलू की सब्जी’ के साथ-साथ हलवा, बूंदी और पुआ का प्रसाद वितरित किया जाता है। आधुनिक समय में अब छोले-चावल, कढ़ी-चावल और आइसक्रीम का वितरण भी होने लगा है। इस दिन अमीर-गरीब, जाति-धर्म का भेद मिट जाता है और हर कोई एक ही कतार में खड़े होकर ‘जय बजरंगबली’ के जयकारों के साथ प्रसाद ग्रहण करता है।
तीसरे बड़े मंगल की पूजा विधि
इस पावन दिन पर हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्तों को विशेष विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए:
- प्रातः काल की शुरुआत: सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
- संकल्प और स्थापना: घर के मंदिर या हनुमान मंदिर में जाकर व्रत का संकल्प लें। हनुमान जी की मूर्ति के सामने घी या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- चोला और भोग: बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल (चोला) अर्पित करें। उन्हें लाल फूल, तुलसी दल (तुलसी के पत्ते), और बूंदी के लड्डू या बेसन के मोदक का भोग लगाएं।
- पाठ और आरती: हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें। अंत में आरती कर अपनी मनोकामना कहें।
इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय
यदि आप जीवन में आर्थिक तंगी, नौकरी में आ रही बाधाओं या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो तीसरे बड़े मंगल पर ये उपाय कर सकते हैं:
- पीपल के पत्ते का उपाय: पीपल के 11 पत्तों पर सफेद चंदन या कुमकुम से ‘श्री राम’ लिखकर उनकी माला बनाएं और हनुमान जी को पहनाएं। इससे धन लाभ के योग बनते हैं।
- तुलसी दल का अर्पण: हनुमान जी को तुलसी के पत्तों की माला या भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें, क्योंकि इसके बिना उनका भोग अधूरा माना जाता है।
- दान पुण्य: इस दिन किसी जरूरतमंद को काले चने, गुड़, या सूती वस्त्रों का दान करने से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।
सामाजिक समरसता का प्रतीक
तीसरा बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, परोपकार और मानवता की सेवा का एक जीवंत उदाहरण है। भीषण गर्मी में नि:स्वार्थ भाव से की जाने वाली सेवा ही इस पर्व की वास्तविक आत्मा है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि भक्ति केवल मंदिर के गर्भगृह तक सीमित नहीं है, बल्कि भूखे को भोजन कराना और प्यासे को पानी पिलाना ही ईश्वर की सबसे बड़ी आराधना है।
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