संजय मांजरेकर ने तिलक वर्मा को गेंदबाजी के मौके को लेकर कप्तान श्रेयस अय्यर से अपनी बात रखने की सलाह दी। जानें तिलक का गेंदबाजी रिकॉर्ड और एशियन गेम्स की रणनीति।
एशियन गेम्स में भारतीय क्रिकेट टीम के अभियान के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। मांजरेकर का मानना है कि तिलक वर्मा को टीम में अपनी गेंदबाजी क्षमता का इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में तिलक को सलाह दी कि उन्हें कप्तान श्रेयस अय्यर को यह दिखाना चाहिए कि पिछले मुकाबले में गेंदबाजी का अवसर नहीं मिलने से वह खुश नहीं हैं। यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ अभिषेक शर्मा को गेंदबाजी करने का मौका मिला था, जबकि तिलक गेंदबाजी नहीं कर सके थे।
जापान की पिचों पर उपयोगी हो सकते हैं तिलक
एशियन गेम्स में भारतीय टीम जापान की परिस्थितियों में खेल रही है, जहां धीमी और स्पिन के लिए मददगार पिचें देखने को मिल सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में तिलक वर्मा का बाएं हाथ से गेंदबाजी करना भारतीय टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकता है। खास तौर पर अगर विपक्षी टीम के बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज मौजूद हों, तो तिलक की गेंदबाजी मैच-अप के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकती है।
हालांकि, कप्तान श्रेयस अय्यर ने श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में गेंदबाजी के लिए दूसरे विकल्पों को प्राथमिकता दी। भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में रवि बिश्नोई, वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल और अभिषेक शर्मा जैसे स्पिन विकल्प मौजूद थे। इन गेंदबाजों ने टीम की रणनीति में अहम भूमिका निभाई।
तिलक ने खुद बताया- गेंदबाजी के लिए तैयार हूं
तिलक वर्मा ने भी गेंदबाजी को लेकर अपनी तैयारी स्पष्ट की है। सोनी स्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह लगातार गेंदबाजी का अभ्यास कर रहे हैं और अगर विपक्षी टीम में बाएं हाथ का बल्लेबाज हुआ तो वह गेंदबाजी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी माना कि गेंदबाजी का फैसला परिस्थितियों और कप्तान पर निर्भर करता है।
तिलक के इस बयान से साफ है कि वह बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी टीम को योगदान देना चाहते हैं। भारतीय टीम में उनकी भूमिका मुख्य रूप से बल्लेबाज की है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह उपयोगी स्पिन गेंदबाजी कर सकते हैं। ऐसे में एशियन गेम्स जैसी परिस्थितियों में उनका यह कौशल टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।
संजय मांजरेकर ने क्या कहा?
संजय मांजरेकर ने तिलक को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें कप्तान को अपनी नाराजगी दिखानी चाहिए। उनके मुताबिक, जब अभिषेक शर्मा को कुछ ओवर गेंदबाजी करने का मौका मिल सकता है, तो तिलक भी कम से कम एक ओवर की उम्मीद कर सकते हैं। मांजरेकर ने इसी संदर्भ में तिलक को कप्तान से अपनी बात रखने का सुझाव दिया।
मांजरेकर की टिप्पणी को गंभीर रणनीतिक निर्देश के बजाय हल्के-फुल्के अंदाज में दी गई सलाह के रूप में देखा जा सकता है। उनका मूल तर्क यह था कि तिलक को अपनी गेंदबाजी क्षमता के इस्तेमाल की इच्छा टीम प्रबंधन और कप्तान के सामने स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए।
अभिषेक शर्मा को मिला था गेंदबाजी का मौका
श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय स्पिनरों ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम के स्पिन गेंदबाजों ने आठ ओवर से भी कम समय में श्रीलंका के पांच बल्लेबाजों को आउट कर दिया। इस प्रदर्शन ने भारतीय टीम की स्पिन रणनीति को मजबूती दी और टीम ने उसी प्लेइंग इलेवन को स्वर्ण पदक के मुकाबले के लिए बरकरार रखा।
अभिषेक शर्मा को भी गेंदबाजी करने का मौका मिला और उन्होंने टीम की रणनीति में अपनी उपयोगिता दिखाई। इसी के बाद तिलक वर्मा की गेंदबाजी को लेकर चर्चा शुरू हुई। यदि तिलक को भी गेंदबाजी का अवसर मिलता है, तो वह भारतीय टीम को एक अतिरिक्त बाएं हाथ के स्पिन विकल्प के रूप में मदद कर सकते हैं।
तिलक का गेंदबाजी रिकॉर्ड भी प्रभावी
तिलक वर्मा ने भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजी की है। उनका पिछला गेंदबाजी प्रदर्शन जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में आया था, जहां उन्होंने एक ओवर गेंदबाजी की थी। इस दौरान उन्होंने रयान बर्ल का विकेट हासिल किया था। यह उनके टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पांचवां विकेट था।
तिलक ने अब तक टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पांच विकेट लिए हैं। उनका गेंदबाजी औसत 12.8 और इकॉनमी रेट 6.1 बताया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि जरूरत पड़ने पर वह कुछ ओवरों में टीम को विकेट दिलाने के साथ-साथ रन रोकने का विकल्प भी दे सकते हैं।
कप्तान के फैसले पर निर्भर करेगा इस्तेमाल
अंततः तिलक वर्मा की गेंदबाजी का इस्तेमाल कप्तान और टीम प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा। टीम के पास पहले से ही कई स्पिन विकल्प मौजूद हैं, इसलिए हर मुकाबले में तिलक को गेंदबाजी करने का मौका मिलना जरूरी नहीं है। लेकिन धीमी पिचों, बाएं हाथ के बल्लेबाजों और मैच की परिस्थितियों के आधार पर उनकी गेंदबाजी उपयोगी साबित हो सकती है।
एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक मुकाबले में भारतीय टीम की वही प्लेइंग इलेवन उतरी है, जिसने श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। ऐसे में अब नजर इस बात पर होगी कि कप्तान श्रेयस अय्यर जरूरत पड़ने पर तिलक वर्मा की गेंदबाजी का इस्तेमाल करते हैं या नहीं।