NEET-UG परीक्षा के चलते लगा बैन हटा, टेलीग्राम Google Play Store पर वापस आया। जानें क्यों अभी भी मैसेज-एडिटिंग फीचर पर रोक बरकरार है।
करीब एक हफ्ते के लंबे इंतजार और कड़े प्रतिबंधों के बाद, लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) की Google Play Store पर वापसी हो गई है। केंद्र सरकार ने 16 जून से 22 जून तक टेलीग्राम पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी, जिसका मुख्य कारण NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। हालांकि, एंड्रॉइड यूजर्स के लिए राहत की खबर है, लेकिन एप्पल (Apple) के App Store पर यह ऐप अभी भी उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब यह है कि आईफोन और आईपैड यूजर्स को इस ऐप को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए अभी कुछ और समय का इंतजार करना पड़ सकता है।
आखिर क्यों लगाया गया था टेलीग्राम पर बैन?
इस प्रतिबंध के पीछे का सबसे प्रमुख कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा केंद्र सरकार से की गई शिकायत थी। NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा के दौरान NTA ने पाया कि कुछ संगठित नकल गिरोह और असामाजिक तत्व टेलीग्राम का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। ये गिरोह छात्रों को गुमराह कर रहे थे और परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का दावा करके उनसे धोखाधड़ी कर रहे थे।
NTA का मुख्य तर्क यह था कि टेलीग्राम के ‘मैसेज एडिटिंग’ फीचर का फायदा उठाकर अपराधी पुराने मैसेज को एडिट कर देते थे, जिससे वह परीक्षा के बाद जारी किए गए असली प्रश्नपत्र जैसा दिखता था। इस तरह की भ्रामक गतिविधियों से छात्रों में अफरा-तफरी और डर का माहौल पैदा हो रहा था। छात्रों के भविष्य और परीक्षा की शुचिता को सर्वोपरि रखते हुए, सरकार ने एहतियात के तौर पर टेलीग्राम की सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का सख्त निर्णय लिया था।
30 जून तक जारी रहेगी मैसेज-एडिटिंग पर रोक
टेलीग्राम की वापसी तो हो गई है, लेकिन सरकार ने अपनी निगरानी में ढील नहीं दी है। टेलीग्राम के सबसे चर्चित और विवादित ‘मैसेज-एडिटिंग’ फीचर पर अभी भी रोक बरकरार है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भारत में इस फीचर को कम से कम 30 जून तक ‘इनएक्टिव’ रखा जाए। सरकार का मानना है कि इस फीचर के बंद रहने से गलत जानकारी (misinformation) और फर्जी मैसेज के प्रसार पर काफी हद तक लगाम लगेगी। यह कदम भविष्य में होने वाली किसी भी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक निवारक उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसले को ठहराया उचित
इस पूरे मामले में टेलीग्राम ने भी अपनी बात रखने की कोशिश की थी। Telegram FZ LLC ने इस बैन के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया और केंद्र सरकार के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत दी गई निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया है। कोर्ट ने आगे टिप्पणी की कि परीक्षा जैसी संवेदनशील स्थितियों में, जहाँ लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर हो, वहां सरकार द्वारा उठाए गए कदम ‘उचित और अनुपातिक’ (proportionate) हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और परीक्षाओं की अखंडता के मामले में सरकार को कड़े कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
भविष्य की चुनौतियां और डिजिटल सुरक्षा
टेलीग्राम का यह प्रकरण डिजिटल युग की एक नई चुनौती को सामने लाता है। हालांकि टेलीग्राम अपने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और प्राइवेसी फीचर्स के लिए जाना जाता है, लेकिन अपराधी अक्सर इसका दुरुपयोग करते हैं। सरकारी प्रतिबंध ने यह साबित कर दिया है कि भले ही कोई प्लेटफॉर्म कितना भी आधुनिक क्यों न हो, वह देश के कानून और सार्वजनिक व्यवस्था से ऊपर नहीं है।
अब देखना यह होगा कि 30 जून के बाद टेलीग्राम अपने इस फीचर को किस तरह से पेश करता है और क्या सरकार इसे पूरी तरह बहाल होने देती है। वर्तमान में, छात्रों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण है कि वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाली जानकारी को लेकर सतर्क रहें और केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर भरोसा करें। टेलीग्राम की वापसी जहाँ लाखों नियमित यूजर्स के लिए राहत भरी है, वहीं यह प्लेटफॉर्म के लिए भी एक बड़ा सबक है कि उन्हें अपनी सुरक्षा नीतियों को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा ताकि भविष्य में ऐसे प्रतिबंधों की नौबत न आए।