IIT और NIT के छात्रों को बड़ा झटका: ओरेकल (Oracle) ने रद्द किए प्लेसमेंट ऑफर्स, 30,000 की छंटनी का असर

IIT और NIT के छात्रों को बड़ा झटका: ओरेकल (Oracle) ने रद्द किए प्लेसमेंट ऑफर्स, 30,000 की छंटनी का असर

टेक दिग्गज ओरेकल (Oracle) ने वैश्विक मंदी और छंटनी के बीच भारत के प्रतिष्ठित IIT और NIT संस्थानों के छात्रों को दिए गए प्लेसमेंट ऑफर्स रद्द कर दिए हैं, जिससे हड़कंप मच गया है।

 

भारतीय तकनीकी शिक्षा के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों—भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT)—के छात्रों के लिए एक बेहद निराश करने वाली और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दिग्गज वैश्विक टेक कंपनी ओरेकल (Oracle) ने इन संस्थानों के कई छात्रों को दिए गए नौकरी के प्री-प्लेसमेंट और कैंपस प्लेसमेंट ऑफर्स (Job Offers) को कथित तौर पर रद्द (Revoke) कर दिया है। ‘बिजनेस टुडे’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह खुलासा प्रभावित छात्रों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए गए दर्द और पोस्ट के माध्यम से हुआ है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्र पहले से ही वैश्विक आईटी मंदी (Tech Slowdown) के बीच प्लेसमेंट को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ओरेकल जैसी दिग्गज कंपनी द्वारा ऐन वक्त पर जॉइनिंग से पीछे हटने के इस फैसले ने न केवल छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि आईआईटी और एनआईटी के प्लेसमेंट सेल की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।

सोशल मीडिया पर फूटा प्रभावित छात्रों का दर्द

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ओरेकल द्वारा प्लेसमेंट ऑफर रद्द किए जाने की जानकारी तब सार्वजनिक हुई जब प्रभावित छात्रों ने लिंक्डइन (LinkedIn) और एक्स (X) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी आपबीती साझा करना शुरू किया। कई छात्रों ने लिखा कि उन्होंने कॉलेज के अंतिम वर्ष में ओरेकल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में चयनित होने के बाद अन्य कंपनियों के प्लेसमेंट ड्राइव में भाग नहीं लिया था, क्योंकि संस्थानों के नियम (One-Student-One-Job Policy) उन्हें दूसरा ऑफर लेने की अनुमति नहीं देते।

अब जब जॉइनिंग का समय नजदीक आ रहा था, कंपनी ने आंतरिक पुनर्गठन और व्यावसायिक प्राथमिकताओं में बदलाव का हवाला देते हुए ईमेल के जरिए उनके ऑफर लेटर वापस ले लिए। छात्रों का कहना है कि सत्र समाप्त होने के बाद अब उनके पास नौकरी का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है, जिससे वे मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर 30,000 कर्मचारियों की छंटनी, भारत में भी भारी असर

ओरेकल द्वारा छात्रों के ऑफर रद्द किए जाने के इस अप्रत्याशित कदम के पीछे कंपनी के भीतर चल रही बड़े पैमाने पर छंटनी (Layoffs) को मुख्य वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, टेक दिग्गज ओरेकल ने हाल ही में वैश्विक स्तर पर अपने कार्यबल में भारी कटौती करते हुए 30,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।

इस वैश्विक छंटनी की सबसे बड़ी गाज भारत पर गिरी है, जहाँ कंपनी ने अपने विभिन्न कार्यालयों से लगभग 12,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि ओरेकल इस समय क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बढ़ते खर्चों और अपनी लागत (Cost-cutting) को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा रही है। नए प्रोजेक्ट्स के बंद होने और मौजूदा टीमों के आकार को छोटा किए जाने के कारण ही नए फ्रेशर्स (Freshers) की जॉइनिंग को रोक दिया गया है।

आईआईटी और एनआईटी के प्लेसमेंट सेल की बढ़ी मुश्किलें

आमतौर पर आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रीमियम संस्थानों से पास आउट होने वाले छात्रों को नौकरी की 100% गारंटी माना जाता है। लेकिन ओरेकल के इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से कोई भी सुरक्षित नहीं है। ऑफर्स रद्द होने के बाद अब इन संस्थानों के प्लेसमेंट सेल (Placement Cells) हरकत में आ गए हैं।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन प्रभावित छात्रों को दोबारा रोजगार के अवसर मुहैया कराना है। चूंकि अधिकांश बड़ी कंपनियों का प्लेसमेंट सीजन लगभग समाप्त हो चुका है, इसलिए प्लेसमेंट सेल अब अन्य तकनीकी कंपनियों, स्टार्टअप्स और कोर सेक्टर की फर्मों से संपर्क साध रहे हैं ताकि इन होनहार छात्रों के लिए ‘ऑफ-कैंपस’ या विशेष प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया जा सके।

टेक सेक्टर के भविष्य और फ्रेशर्स के करियर पर मंडराते बादल

ओरेकल की यह कार्रवाई अकेले की घटना नहीं है; इससे पहले भी कई अन्य वैश्विक टेक कंपनियों और भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा प्लेसमेंट ऑफर्स को टालने या रद्द करने के मामले सामने आ चुके हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अभी मंदी का दौर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों द्वारा एआई (AI) और ऑटोमेशन को तेजी से अपनाने के कारण पारंपरिक सॉफ्टवेयर भूमिकाओं के लिए नियुक्तियां कम हो रही हैं। ऐसी स्थिति में, अब फ्रेशर्स को केवल डिग्री के भरोसे रहने के बजाय अपनी स्किल्स को लगातार अपग्रेड करने और उभरती हुई तकनीकों (जैसे डेटा साइंस और क्लाउड आर्किटेक्चर) में पारंगत होने की आवश्यकता है। फिलहाल, ओरेकल के इस कदम ने भारतीय टेक और एजुकेशन सेक्टर में एक गंभीर बहस छेड़ दी है।

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