श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया चोटों से जूझ रही है। बुमराह, हार्दिक, वॉशिंगटन सुंदर समेत कई खिलाड़ी बाहर हैं। VVS लक्ष्मण ने रिकवरी टाइमलाइन पर सफाई दी।
श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम चोटों की समस्या से जूझ रही है। टीम के कई प्रमुख और पहली पसंद के खिलाड़ी अलग-अलग चोटों के कारण फिलहाल मैदान से बाहर हैं। इसी बीच रविवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के शीर्ष अधिकारियों ने खिलाड़ियों की चोट और उनके रिकवरी प्रोसेस को लेकर चर्चा की। बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख और पूर्व भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी में लग रहे समय का बचाव किया। उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी के शरीर की रिकवरी अलग होती है और तय समयसीमा के अनुसार हर बार वापसी संभव नहीं होती। उनके बयान के बाद भारतीय क्रिकेट में लगातार बढ़ रही चोटों और खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
कई स्टार खिलाड़ी चोट से जूझ रहे
भारतीय टीम के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता उसके प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस है। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा और बी साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी अलग-अलग चोटों से उबर रहे हैं। इन खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी का असर टीम के संतुलन पर भी पड़ सकता है।
श्रीलंका दौरा भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दो टेस्ट मैच आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र का हिस्सा हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट नहीं चाहेगा कि चोटिल खिलाड़ियों को जल्दबाजी में मैदान पर उतारा जाए और उनकी परेशानी और बढ़ जाए।
चोटों को लेकर उठ रहे सवाल
भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की चोट कोई नई समस्या नहीं है। पिछले कुछ समय से कई अहम मुकाबलों और सीरीज के दौरान भारतीय टीम को अपने प्रमुख खिलाड़ियों के बिना मैदान पर उतरना पड़ा है। लगातार चोटों के कारण चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के सामने प्लेइंग इलेवन तैयार करने की चुनौती भी बढ़ी है।
इसी वजह से BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खिलाड़ियों की रिकवरी और फिटनेस प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वीवीएस लक्ष्मण ने इन आलोचनाओं के बीच CoE का बचाव करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को फिट घोषित करने से पहले उनकी स्थिति और शरीर की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखा जाता है।
VVS Laxman बोले- शरीर मशीन नहीं है
वीवीएस लक्ष्मण ने खिलाड़ियों की रिकवरी टाइमलाइन को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने समझाया कि चोट लगने के बाद किसी खिलाड़ी की वापसी के लिए एक अनुमानित समयसीमा तय की जाती है, लेकिन शरीर हमेशा उस समयसीमा के अनुसार प्रतिक्रिया नहीं करता।
लक्ष्मण के मुताबिक, मानव शरीर मशीन नहीं है कि हर खिलाड़ी तय समय में ठीक हो जाए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी की चोट का पता चलने से लेकर उसके पूरी तरह फिट होकर CoE से बाहर निकलने तक लगातार उसकी प्रगति पर नजर रखी जाती है। जैसे-जैसे खिलाड़ी की स्थिति बेहतर होती है, उसके वर्कलोड को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि फिटनेस प्रक्रिया एक लगातार चलने वाला चरण है और खिलाड़ी की स्थिति के आधार पर इसमें बदलाव किया जाता है।
IPL और आर्थिक दबाव भी बड़ी वजह?
चोटों के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खिलाड़ियों पर लगातार क्रिकेट खेलने का दबाव भी उनकी फिटनेस को प्रभावित कर सकता है। एक CoE सूत्र के हवाले से कहा गया कि खिलाड़ियों के शरीर की भी अपनी सीमाएं होती हैं और लगातार क्रिकेट खेलने से ओवरयूज तथा स्ट्रेस इंजरी का खतरा बढ़ सकता है।
सूत्र ने यह भी दावा किया कि कुछ खिलाड़ी आईपीएल के दौरान फ्रेंचाइजी और आर्थिक दबाव के कारण चोट के बावजूद खेलते रहते हैं। इसके बाद जब चोट गंभीर हो जाती है तो उन्हें रिकवरी के लिए CoE भेजा जाता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप एक कथित CoE सूत्र के हवाले से सामने आए हैं और BCCI या किसी विशेष IPL फ्रेंचाइजी की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
खिलाड़ियों की सुरक्षा को बताया गया प्राथमिकता
CoE से जुड़े सूत्र ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। सूत्र के मुताबिक, टीम फिजियो और CoE के फिजियो अपनी जिम्मेदारी पूरी क्षमता और गंभीरता से निभा रहे हैं। उनके सामने सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य खिलाड़ी को पूरी तरह सुरक्षित और फिट बनाना है।
इस प्रक्रिया के कारण कई बार चयनकर्ताओं, कप्तान और कोच के लिए मुश्किल स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि वे किसी खिलाड़ी की जल्द वापसी चाहते हैं, लेकिन मेडिकल टीम खिलाड़ी की सुरक्षा को देखते हुए अंतिम फैसला करती है।
बढ़ते क्रिकेट वर्कलोड पर भी नजर
भारतीय क्रिकेटरों का शेड्यूल पिछले कुछ वर्षों में काफी व्यस्त रहा है। टेस्ट, वनडे, टी20 इंटरनेशनल और आईपीएल के अलावा खिलाड़ियों को अलग-अलग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेना पड़ता है। लगातार यात्रा और मैचों की संख्या का असर खिलाड़ियों के शरीर पर पड़ना स्वाभाविक है।
खासकर तेज गेंदबाजों के लिए लगातार मैच खेलना और अलग-अलग परिस्थितियों में गेंदबाजी करना शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे में वर्कलोड मैनेजमेंट भारतीय टीम की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
श्रीलंका सीरीज से पहले टीम के सामने चुनौती
भारत को श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। चोटिल खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में टीम मैनेजमेंट को उपलब्ध खिलाड़ियों के साथ बेहतर संयोजन तैयार करना होगा। युवा और बैकअप खिलाड़ियों के लिए यह खुद को साबित करने का बड़ा अवसर भी हो सकता है।
वहीं, BCCI के सामने लंबी अवधि में खिलाड़ियों को चोटों से बचाने की चुनौती बनी हुई है। लक्ष्मण के बयान से स्पष्ट है कि CoE खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहता। भारतीय टीम के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यही होगा कि चोटिल खिलाड़ी पूरी तरह फिट होकर ही मैदान पर लौटें, क्योंकि जल्द वापसी के चक्कर में चोट दोबारा गंभीर होने का जोखिम बढ़ सकता है।
श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले भारत की चोटों की समस्या ने एक बार फिर क्रिकेट के बढ़ते वर्कलोड और खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बहस छेड़ दी है। BCCI और CoE के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों की उपलब्धता और उनकी सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगी।