अप्रैजल बना ‘नाइटमेयर’: TCS में सैलरी बढ़ने के बजाय घट गई टेक-होम पे! सोशल मीडिया पर फूटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स का गुस्सा

अप्रैजल बना 'नाइटमेयर': TCS में सैलरी बढ़ने के बजाय घट गई टेक-होम पे! सोशल मीडिया पर फूटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स का गुस्सा

टीसीएस (TCS) के कर्मचारियों के लिए इस बार का अप्रैजल सीजन किसी बुरे सपने जैसा साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने दावा किया है कि हाइक के बाद उनकी इन-हैंड सैलरी बढ़नी तो दूर, उल्टे घट गई है।

आमतौर पर नौकरीपेशा लोगों के लिए अप्रैजल (Appraisal Season) और वेतन वृद्धि (Salary Hike) का समय बड़ी खुशियां और जश्न लेकर आता है। साल भर दिन-रात मेहनत करने के बाद हर कर्मचारी को उम्मीद होती है कि उसका बैंक बैलेंस बढ़ेगा। लेकिन भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के हजारों टेक प्रोफेशलल्स के लिए इस साल का अप्रैजल सीजन खुशियों के बजाय एक भयानक दुःस्वप्न (Nightmare) में बदल गया है।

जैसे ही टीसीएस ने अपने कर्मचारियों के वार्षिक इंक्रीमेंट लेटर (Increment Letters) जारी करना शुरू किया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंपनी के प्रति नाराजगी और हताशा की एक भारी बाढ़ आ गई है। देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने की इस प्रमुख आईटी कंपनी के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने जो दावे किए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।

हाइक के बाद बढ़ने के बजाय घट गई इन-हैंड सैलरी

लिंक्डइन, एक्स (ट्विटर) और रेडिट जैसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर टीसीएस कर्मचारियों के दर्द और गुस्से की कहानियां छाई हुई हैं। एक चौंकाने वाली संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने दावा किया है कि नया इंक्रीमेंट लेटर मिलने के बाद उनकी मासिक टेक-होम पे (Take-home Pay) यानी इन-हैंड सैलरी बढ़ने के बजाय जादुई रूप से कम हो गई है।

कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सीटीसी (CTC) में कागजी तौर पर तो मामूली बढ़ोतरी दिखाई गई है, लेकिन टैक्स डिडक्शन (Tax Deductions), रिवाइज्ड बेसिक सैलरी स्ट्रक्चर और अन्य आंतरिक कटौतियों के कारण उनके बैंक अकाउंट में हर महीने आने वाली वास्तविक रकम पहले से भी कम हो गई है। एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पूरे साल वफादारी और कड़ी मेहनत से काम करने का इनाम यह मिला है कि अब मुझे पिछले साल की तुलना में हर महीने कम पैसे मिलेंगे। यह हाइक है या डिमोशन?”

‘वेरिएबल पे’ और अलाउंस के नए नियमों का खेल

इस पूरे विवाद के पीछे कंपनी के वेतन ढांचे (Salary Structure) में किए गए बदलावों और भत्तों (Allowances) के नए नियमों को मुख्य वजह माना जा रहा है। सूत्रों और कर्मचारियों के पोस्ट्स के अनुसार, टीसीएस ने इस बार परफॉर्मेंस-लिंक्ड वेरिएबल पे (Variable Pay) और सिटी कंपनसेटरी अलाउंस जैसे घटकों में बड़े फेरबदल किए हैं।

इसके अलावा, कंपनी ने पिछले साल ऑफिस से काम करने (Work from Office) की नीति को कड़ाई से लागू किया था और चेतावनी दी थी कि जो कर्मचारी तय समय के लिए ऑफिस नहीं आएंगे, उनके वेरिएबल पे पर इसका असर पड़ेगा। अब अप्रैजल के समय उसी नीति का कड़ा असर कर्मचारियों की सैलरी स्लिप पर दिखाई दे रहा है। कई टेक प्रोफेशनल्स को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें अच्छा हाइक मिलेगा, लेकिन इसके उलट उनके अलाउंस और बोनस कंपोनेंट्स को इस तरह री-स्ट्रक्चर किया गया है कि ग्रॉस सैलरी बढ़ने के बाद भी इन-हैंड सैलरी का ग्राफ नीचे गिर गया।

आईटी सेक्टर में निराशा और फ्रेशर्स का दर्द

यह संकट सिर्फ सीनियर डेवलपर्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि टीसीएस में काम करने वाले फ्रेशर्स और जूनियर स्तर के इंजीनियरों को इसका सबसे ज्यादा झटका लगा है। भारतीय आईटी सेक्टर में फ्रेशर्स की शुरुआती सैलरी (Entry-level Salary) पिछले लगभग एक दशक से 3 से 3.5 लाख रुपये प्रति वर्ष के आसपास ही अटकी हुई है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में, जब जूनियर इंजीनियर्स को मामूली 2 से 4 फीसदी का हाइक दिया जाता है और टैक्स स्लैब बदलने से इन-हैंड सैलरी घट जाती है, तो उनके लिए मेट्रो शहरों (जैसे बेंगलुरु, मुंबई, पुणे) में सर्वाइव करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

सोशल मीडिया पर फूटे इस गुस्से ने एक बार फिर आईटी सेक्टर में काम करने की परिस्थितियों और वहां मिलने वाले मुआवजे (Compensation) पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। कई टेक यूनियंस और राइट्स एक्टिविस्ट्स भी अब कर्मचारियों के समर्थन में आ रहे हैं, जिनका कहना है कि देश को अरबों डॉलर का राजस्व कमाकर देने वाली आईटी दिग्गज कंपनियों को अपने वर्कफोर्स के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए।

 क्या सामूहिक इस्तीफे की ओर बढ़ेंगे कर्मचारी?

टीसीएस में आए इस अप्रैजल विवाद ने न केवल कर्मचारियों के मनोबल (Morale) को पूरी तरह तोड़ दिया है, बल्कि इससे कंपनी के भीतर असंतोष का माहौल भी चरम पर पहुंच गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि कंपनी ने जल्द ही इस विसंगति को दूर नहीं किया या कर्मचारियों की चिंताओं पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो आने वाले महीनों में टीसीएस को बड़े पैमाने पर एट्रिशन (कर्मचारियों का नौकरी छोड़ना) का सामना करना पड़ सकता है। एआई (AI) के इस दौर में जहां आईटी प्रोफेशनल्स पहले से ही अपनी नौकरियों को लेकर डरे हुए हैं, वहीं सैलरी में हुई इस ‘कटौती’ ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है।

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