टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की संभावनाओं पर जोर दिया। गुजरात के धोलेरा में 91,000 करोड़ रुपये और असम में 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से चिप निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
आज के दौर में मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए सेमीकंडक्टर यानी चिप बेहद जरूरी हो गई हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आने वाले वर्षों में इनकी मांग और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत जगह बनाने का बड़ा अवसर है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का मानना है कि देश में उपलब्ध कुशल प्रतिभाएं, विशाल घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बना सकती हैं। मंगलवार को 2026 ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र भारत के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टाटा समूह के निवेश को केवल दो या तीन साल में मिलने वाले वित्तीय लाभ के आधार पर नहीं देखना चाहिए। इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश की दीर्घकालिक तकनीकी जरूरतों को पूरा करना और भविष्य के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार करना है।
भारत के लिए क्यों अहम है सेमीकंडक्टर उद्योग?
सेमीकंडक्टर को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कारों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, औद्योगिक मशीनों और एआई से जुड़े उपकरणों में इनका इस्तेमाल होता है। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल तकनीक पर निर्भर हो रही है, वैसे-वैसे चिप की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए इस उद्योग में निवेश बढ़ाना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। एन चंद्रशेखरन के मुताबिक, भारत के पास इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कई मजबूत आधार मौजूद हैं। देश में तकनीकी रूप से कुशल युवाओं की बड़ी संख्या है और घरेलू बाजार भी काफी विशाल है। इसके अलावा, वैश्विक कंपनियों के साथ सहयोग करके भारत चिप निर्माण से जुड़ी तकनीक, विशेषज्ञता और औद्योगिक अनुभव हासिल कर सकता है। इससे देश को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। हालांकि, सेमीकंडक्टर उद्योग में सफलता हासिल करने के लिए लंबी अवधि की योजना, बड़े निवेश और तकनीकी दक्षता की जरूरत होगी।
टाटा समूह का गुजरात में 91,000 करोड़ रुपये का निवेश
टाटा समूह सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़े निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। समूह की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (PSMC) के साथ मिलकर चिप निर्माण संयंत्र स्थापित कर रही है। इस परियोजना में करीब 91,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यह परियोजना भारत में चिप निर्माण की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यहां तैयार होने वाली चिप का इस्तेमाल कारों, मोबाइल उपकरणों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकेगा। घरेलू स्तर पर चिप निर्माण की क्षमता बढ़ने से भारत को विभिन्न उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, वैश्विक सप्लाई चेन में देश की भागीदारी बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा। हालांकि, इस तरह की परियोजनाओं के वास्तविक परिणाम उत्पादन क्षमता, तकनीकी जरूरतों, बाजार की मांग और व्यावसायिक प्रदर्शन पर निर्भर करेंगे।
असम में भी सेमीकंडक्टर परियोजना पर काम
टाटा समूह गुजरात के अलावा असम में भी सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी परियोजना विकसित कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, असम में करीब 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा तैयार की जा रही है। चिप उद्योग में निर्माण के साथ-साथ असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग की भी अहम भूमिका होती है। इन प्रक्रियाओं के जरिए चिप को विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है और उसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है। भारत में ऐसी सुविधाओं का विस्तार होने से सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी उत्पादन शृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। गुजरात में चिप निर्माण और असम में असेंबली तथा टेस्टिंग जैसी क्षमताओं का विकास देश के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इन परियोजनाओं से संबंधित रोजगार और आर्थिक अवसर भी पैदा हो सकते हैं, हालांकि उनकी वास्तविक संख्या और प्रभाव परियोजनाओं की प्रगति पर निर्भर करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से मिलेगी तकनीकी मजबूती
एन चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया। चिप निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता, विश्वसनीय आपूर्ति व्यवस्था और बड़ी पूंजी की जरूरत होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग भारत को तकनीकी ज्ञान और अनुभव हासिल करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, इस उद्योग में ऊर्जा की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि चिप निर्माण संयंत्रों को लगातार और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति की जरूरत होती है। भारत को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा। वैश्विक कंपनियों के साथ सहयोग से घरेलू उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
आधुनिक चिप बनाने की दौड़ में जल्दबाजी से बचने की सलाह
चंद्रशेखरन ने यह भी आगाह किया कि भारत को केवल सबसे आधुनिक चिप बनाने की दौड़ में शामिल होने के लिए निवेश नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी परियोजना की योजना बनाते समय बाजार की मांग और उसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन करना जरूरी है। निवेश ऐसा होना चाहिए जो लंबे समय तक टिकाऊ कारोबार खड़ा कर सके और रोजगार के अवसर पैदा करे। सेमीकंडक्टर उद्योग में भारी पूंजी निवेश की जरूरत होती है और परियोजनाओं से वित्तीय लाभ मिलने में समय लग सकता है। इसलिए कंपनियों को तकनीकी महत्वाकांक्षा के साथ बाजार की वास्तविक जरूरतों का भी ध्यान रखना होगा। टाटा समूह के निवेश को लेकर चंद्रशेखरन का संदेश यही है कि भारत को इस क्षेत्र में मजबूत आधार बनाने के लिए दीर्घकालिक सोच अपनानी होगी।
भारत के लिए खुल रहे हैं नए अवसर
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती दिलचस्पी देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर दे सकती है। टाटा समूह की गुजरात और असम परियोजनाएं इस दिशा में बड़े निवेश का उदाहरण हैं। हालांकि, भारत को इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता, ऊर्जा, कुशल मानव संसाधन और वैश्विक साझेदारी जैसे पहलुओं पर लगातार काम करना होगा। एन चंद्रशेखरन के विचारों से स्पष्ट है कि सेमीकंडक्टर उद्योग को केवल तात्कालिक मुनाफे के नजरिए से नहीं, बल्कि देश की दीर्घकालिक औद्योगिक और तकनीकी क्षमता के रूप में देखना चाहिए। यदि निवेश व्यावसायिक रूप से टिकाऊ रहता है और परियोजनाएं सफलतापूर्वक आगे बढ़ती हैं, तो भारत के लिए वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।