एआई डिमांड और टीएसएमसी की सफलता के कारण ताइवान का बाजार भारत से आगे निकल गया। भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली जारी।
वैश्विक इक्विटी बाजारों में हालिया बदलावों ने एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) की आंधी ने ताइवान के बाजार को इतनी रफ्तार दी है कि इसने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बाजार बनने का गौरव हासिल कर लिया है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
बाजार का गणित: भारत बनाम ताइवान
आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय शेयर बाजार का मार्केट कैप फिलहाल 4.92 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि ताइवान का मार्केट कैप 4.95 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक ताइवान के सूचकांक में 48 फीसदी की रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। ताइवान की इस छलांग का सबसे बड़ा कारण ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) है। यह चिप निर्माता कंपनी अकेले ताइवान के बेंचमार्क इंडेक्स का 42 फीसदी से अधिक हिस्सा रखती है, जो इसकी बाजार में भारी एकाग्रता और प्रभुत्व को दर्शाता है।
एआई की मांग और टीएसएमसी (TSMC) का दबदबा
ताइवान की इस सफलता की नींव में ‘एआई रैली’ का बड़ा हाथ है। दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग बढ़ने के साथ ही सेमीकंडक्टर्स (चिप्स) की जरूरतें आसमान छू रही हैं। टीएसएमसी, जो दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी है, इस मांग को पूरा करने में सबसे आगे है। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में 49 फीसदी की शानदार तेजी आई है। भले ही दुनिया भर में निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury yield) के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुँचने के बाद डरे हुए हैं और सुरक्षित संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं, लेकिन टीएसएमसी ने इस अस्थिरता को मात देते हुए निवेशकों का भरोसा कायम रखा है।
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली
दूसरी ओर, भारतीय बाजार इस समय एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की ओर से लगातार निकासी देखने को मिल रही है। मई के महीने में 23 तारीख तक एफपीआई की बिकवाली 30,374 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। यदि साल 2026 की बात करें, तो अब तक कुल एफपीआई बिकवाली 2,22,343 करोड़ रुपये हो चुकी है, जो कि पूरे वर्ष 2025 की कुल 1,66,283 करोड़ रुपये की बिकवाली से भी अधिक है।
भारतीय बाजार से पैसा निकालने के बाद निवेशक जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य उभरते हुए बाजारों का रुख कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार में ‘एआई-हैवीवेट’ (AI-heavy) कंपनियों की कमी निवेशकों के उत्साह को ठंडा करने का मुख्य कारण बन रही है। भारतीय सूचकांकों में टीएसएमसी जैसी तकनीकी दिग्गज की अनुपस्थिति के कारण निवेशकों को वे रिटर्न नहीं मिल पा रहे हैं, जो एआई क्रांति से प्रेरित अन्य बाजारों में देखने को मिल रहे हैं।
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
भारतीय बाजार के लिए यह एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है। भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है, लेकिन वैश्विक पोर्टफोलियो में जगह बनाए रखने के लिए अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। प्रौद्योगिकी और एआई नवाचार के मामले में भारत को अपनी भूमिका और भी अधिक सक्रिय करनी होगी।
ताइवान की राइज (rise) यह बताती है कि कैसे एक मजबूत तकनीकी आधार किसी देश को वैश्विक वित्तीय मानचित्र पर शीर्ष स्थान दिला सकता है। भारत के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वह अपनी लिस्टेड कंपनियों में ऐसी इकाइयों को प्रोत्साहन दे जो भविष्य की तकनीक, विशेषकर एआई और चिप निर्माण में अपनी साख बना सकें।
फिलहाल ताइवान का पांचवां स्थान पर पहुंचना भारत के लिए एक कड़ा मुकाबला प्रस्तुत करता है। वैश्विक निवेशक अब उन बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां भविष्य की तकनीक का बोलबाला है। भारतीय शेयर बाजार में इस गिरावट को केवल अस्थायी नहीं माना जा सकता, बल्कि यह निवेशकों के बदलते प्राथमिकता वाले दृष्टिकोण को दर्शाता है। यदि भारतीय बाजार को फिर से अपनी खोई हुई रैंक हासिल करनी है, तो उसे तकनीकी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ानी होगी और विदेशी निवेशकों के विश्वास को फिर से जीतना होगा।