वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 में भारत की 24 रन से हार के बाद सुनील गावस्कर ने बल्लेबाजों की रणनीति पर सवाल उठाए। जानें संजू सैमसन की पारी, कीमो पॉल की घातक गेंदबाजी और गावस्कर ने टीम इंडिया को क्या सलाह दी।
भारतीय क्रिकेट टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 मुकाबले में 24 रन से हार का सामना करना पड़ा। हैदराबाद में बुधवार को खेले गए इस मुकाबले में भारत के सामने 248 रन का बड़ा लक्ष्य था, लेकिन टीम 223 रन पर ही सिमट गई। संजू सैमसन की तेजतर्रार अर्धशतकीय पारी भी भारत को जीत नहीं दिला सकी। वेस्टइंडीज की ओर से कीमो पॉल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पांच विकेट हासिल किए और मैच का रुख अपनी टीम की ओर मोड़ दिया। इस हार के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने टीम इंडिया की बल्लेबाजी रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि लक्ष्य का पीछा करते समय भारतीय बल्लेबाजों को ज्यादा जिम्मेदारी दिखानी होगी। गावस्कर ने कहा कि अगर बल्लेबाज अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तो भारतीय टीम को लगातार सफलता हासिल करने में परेशानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह की आक्रामक बल्लेबाजी एक लगातार दो टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम से उम्मीद की जाती है, वह इस मुकाबले में नजर नहीं आई। इस हार के साथ टी20 सीरीज का फैसला अब अगले मुकाबले में होना है, जिससे भारतीय टीम पर वापसी का दबाव बढ़ गया है।
रन चेज में सुधार करे टीम इंडिया: सुनील गावस्कर
सुनील गावस्कर ने जियोस्टार पर बातचीत के दौरान भारतीय टीम की लक्ष्य का पीछा करने की रणनीति पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम को सबसे पहले रन चेज करने के तरीके में सुधार करने की जरूरत है। गावस्कर के मुताबिक, बल्लेबाजी इकाई को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने का प्रयास करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बल्लेबाज इस तरह की जिम्मेदारी नहीं लेते हैं, तो भारतीय टीम के लिए लगातार जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। गावस्कर ने कहा कि ओस वाली पिच पर बल्लेबाजी के लिए अनुकूल परिस्थितियों का फायदा उठाना जरूरी था। ऐसे हालात में भारतीय बल्लेबाजों से उम्मीद थी कि वे शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा बनाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने माना कि बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय केवल तेजी से रन बनाना काफी नहीं होता, बल्कि विकेट बचाकर सही समय पर आक्रमण करना भी जरूरी है। भारतीय टीम के पास लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्याप्त बल्लेबाजी क्षमता थी, लेकिन अहम मौकों पर विकेट गंवाने से दबाव बढ़ता गया। गावस्कर की टिप्पणी से साफ है कि वह टीम की बल्लेबाजी में बेहतर योजना, संयम और जिम्मेदारी की जरूरत महसूस करते हैं।
संजू सैमसन ने 20 गेंदों में जड़ा अर्धशतक
248 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को संजू सैमसन ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने महज 20 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। सैमसन की आक्रामक बल्लेबाजी से भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद जगी कि टीम बड़े लक्ष्य को हासिल कर सकती है। हालांकि, पांचवें ओवर में कीमो पॉल ने लगातार दो विकेट लेकर मैच की दिशा बदल दी। पहले सैमसन को शिमरोन हेटमायर ने कैच आउट किया और इसके बाद ईशान किशन भी ज्यादा देर तक क्रीज पर नहीं टिक सके। किशन ने तीन गेंदों में छह रन बनाए। इन दो झटकों के बाद भारत का स्कोर 69 रन पर दो विकेट हो गया। सैमसन के आउट होने से भारत की रन गति पर असर पड़ा और टीम को एक बार फिर पारी संभालने की जरूरत महसूस हुई। तेज शुरुआत के बावजूद भारतीय टीम इस लय को लंबे समय तक बरकरार नहीं रख सकी। बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय शुरुआती साझेदारी का टूटना निर्णायक साबित हुआ और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को मुकाबले में वापसी करने का मौका मिल गया।
श्रेयस अय्यर और अभिषेक शर्मा भी नहीं खेल सके बड़ी पारी
संजू सैमसन और ईशान किशन के विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन वह 11 गेंदों में 16 रन बनाकर शमार स्प्रिंगर का शिकार हो गए। इसके बाद अभिषेक शर्मा से उम्मीद थी कि वह तेजी से रन बनाकर दबाव कम करेंगे। अभिषेक ने 24 गेंदों में 29 रन बनाए, जिसमें तीन चौके और एक छक्का शामिल था। हालांकि, वह अपनी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। भारतीय टीम को इस समय एक ऐसी साझेदारी की जरूरत थी, जो विकेट गिरने के सिलसिले को रोककर लक्ष्य के करीब पहुंचने की उम्मीद बनाए रखती। लेकिन वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर भारत को दबाव में रखा। मध्यक्रम के बल्लेबाजों पर जिम्मेदारी बढ़ती गई और रन बनाने के लिए जरूरी जोखिम लेना भी मुश्किल होता गया। यही वह स्थिति थी, जिस पर गावस्कर ने सवाल उठाए। बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय अगर शुरुआती बल्लेबाज अच्छी शुरुआत के बाद आउट हो जाएं, तो मध्यक्रम को पारी को स्थिरता देनी होती है। भारत इस संतुलन को बनाए रखने में नाकाम रहा।
गुडाकेश मोती ने एक ओवर में दिए दो बड़े झटके
वेस्टइंडीज के स्पिन गेंदबाज गुडाकेश मोती ने 12वें ओवर में दो विकेट लेकर भारत की मुश्किलें और बढ़ा दीं। उन्होंने पहले अभिषेक शर्मा को पवेलियन भेजा और फिर नमन धीर को स्टंप आउट कराया। नमन धीर अपना खाता भी नहीं खोल सके और पहली ही गेंद पर आउट हो गए। मोती ने दो ओवर में 13 रन देकर दो विकेट हासिल किए। उनके इस प्रदर्शन से भारतीय टीम का स्कोर 132 रन पर पांच विकेट हो गया। पांच विकेट गिरने के बाद भारत के लिए मुकाबले में बने रहना बेहद मुश्किल हो गया। वेस्टइंडीज ने इस दौरान गेंदबाजी में अनुशासन बनाए रखा और भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने के मौके सीमित कर दिए। दूसरी ओर, भारतीय टीम को हर ओवर में बढ़ती रन गति की जरूरत थी, जिससे बल्लेबाजों पर जोखिम लेने का दबाव भी बढ़ता गया। लगातार विकेट गिरने के कारण भारत की रणनीति प्रभावित हुई और लक्ष्य तक पहुंचने की संभावनाएं कमजोर होती चली गईं।
तिलक वर्मा और नीतीश रेड्डी की कोशिश भी नहीं दिला सकी जीत
132 रन पर पांच विकेट गिरने के बाद तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने भारतीय पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज अपनाकर टीम की उम्मीदें फिर से जगाने का प्रयास किया। उनकी साझेदारी से भारत को कुछ राहत मिली, लेकिन वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने वापसी करते हुए भारतीय टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कीमो पॉल की पांच विकेट की शानदार गेंदबाजी निर्णायक साबित हुई और भारत 223 रन पर ऑलआउट हो गया। इस तरह वेस्टइंडीज ने 24 रन से मुकाबला जीत लिया और सीरीज का फैसला अगले मैच तक पहुंच गया। भारतीय टीम के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई है, खासकर बड़े लक्ष्य का पीछा करने की रणनीति और मध्यक्रम की जिम्मेदारी को लेकर। अब टीम इंडिया की नजर अगले मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करने पर होगी। बल्लेबाजों को न सिर्फ तेज शुरुआत को बड़ी पारी में बदलना होगा, बल्कि विकेट गिरने के बाद भी संयम बनाए रखना होगा। सुनील गावस्कर की टिप्पणी इसी बात की ओर इशारा करती है कि बड़े मुकाबलों में जीत के लिए केवल आक्रामकता नहीं, बल्कि सही फैसले और सामूहिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।