अभिनेत्री सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने आमिर खान की तीसरी शादी पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे साहसी बताया। साथ ही, उन्होंने आधुनिक शादियों और एकल जीवन के अपने नजरिए पर खुलकर बात की।
बॉलीवुड अभिनेत्री और गायिका सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने हाल ही में अभिनेता आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर अपनी शुभकामनाएं दी हैं। आमिर खान और गौरी स्प्रैट के विवाह बंधन में बंधने की खबर ने इंडस्ट्री में काफी चर्चा बटोरी है। जब सुचित्रा से 61 वर्ष की उम्र में आमिर खान द्वारा दोबारा शादी करने के फैसले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने अभिनेता के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि आमिर का अपने दिल को दोबारा प्यार के लिए खोलना बहुत साहसी है। सुचित्रा के अनुसार, उम्र के किसी भी पड़ाव पर प्यार करना और दोबारा शुरुआत करना एक अत्यंत खूबसूरत एहसास है। उन्होंने आमिर को उनके जीवन के इस नए सफर के लिए ढेर सारा प्यार और सफलता की शुभकामनाएं दीं।
क्या आज के दौर में शादी महज एक विकल्प है?
आमिर खान की शादी के संदर्भ में बात करते हुए सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने आधुनिक युग में विवाह की प्रासंगिकता पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के दौर में शादी करना अब कोई अनिवार्यता नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ‘विकल्प’ बन गया है। सुचित्रा का मानना है कि समाज को अब विवाह को जीवन की एक अनिवार्य शर्त के रूप में देखना बंद कर देना चाहिए। उनके अनुसार, आज के आत्मनिर्भर दौर में लोग अपनी खुशी और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझते हैं, जिसके कारण शादी को लेकर पारंपरिक सोच में बदलाव आया है।
सुचित्रा का एकल जीवन और कला के प्रति समर्पण
फिल्म निर्माता शेखर कपूर से तलाक के बाद सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने खुद को पूरी तरह से कला के प्रति समर्पित कर दिया है। जब उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने सिंगल रहने का फैसला क्यों किया, तो उन्होंने एक बहुत ही दिलचस्प और गहरा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “जब तक आप अपने मन में पूरी तरह स्पष्ट (sorted) नहीं होते, तब तक आप किसी रिश्ते को नहीं संभाल सकते।” उन्होंने अपने जीवन को ‘कला से शादी’ करने जैसा बताया। सुचित्रा ने स्वीकार किया कि उनकी कला कभी-कभी अनिश्चित होती है, तो कभी आर्थिक रूप से अस्थिर, और ऐसे में किसी साथी के लिए इन उतार-चढ़ावों को सहन करना कठिन हो सकता है। उनके लिए उनकी कला ही उनकी दुनिया है और वे उसी में खुश हैं।
रिश्तों में सामंजस्य और आपसी समझ की भूमिका
सुचित्रा का मानना है कि किसी को विवाह के बंधन में तभी बंधना चाहिए जब वह वास्तव में अपने शेष जीवन को किसी विशेष व्यक्ति के साथ साझा करने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हो। उनका कहना है कि शादी कोई जल्दबाजी में लिया जाने वाला फैसला नहीं होना चाहिए। इस विषय पर और गहराई से चर्चा करते हुए उन्होंने पारिवारिक पहलुओं पर भी जोर दिया। सुचित्रा ने कहा, “शादी से पहले सामने वाले व्यक्ति के परिवार को समझना बहुत आवश्यक है।” उन्होंने तर्क दिया कि अक्सर कपल्स के बीच के मतभेद उनके परिवारों के बीच के तालमेल की कमी से पैदा होते हैं। यदि परिवार और जीवनसाथी के बीच सामंजस्य न हो, तो रिश्तों में मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इसलिए, केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी वैचारिक रूप से मेल खाना जरूरी है।
जीवन का अपना चुनाव
सुचित्रा कृष्णमूर्ति का यह नजरिया हमें रिश्तों के प्रति एक नई दृष्टि प्रदान करता है। वे उन लोगों के लिए एक मिसाल हैं जो बिना किसी सामाजिक दबाव के अपने जीवन को अपनी शर्तों पर जीना चुनते हैं। उन्होंने न केवल आमिर खान जैसे सितारों के व्यक्तिगत फैसलों का सम्मान किया है, बल्कि समाज के सामने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जीवन में खुशी का स्रोत केवल विवाह नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद के साथ खुश है और अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है, तो उसे समाज की पारंपरिक परिभाषाओं को मानने की आवश्यकता नहीं है। अंत में, सुचित्रा का संदेश स्पष्ट है: शादी केवल एक कानूनी करार नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक समर्पण होना चाहिए, और यदि आप उस स्तर का समर्पण महसूस नहीं करते हैं, तो अकेले रहना भी एक सम्मानित और पूर्ण विकल्प है।