JP Associates History: सरकारी इंजीनियर से ₹50,000 करोड़ के मालिक बने जयप्रकाश गौड़, फिर कैसे दिवालिया हुई कंपनी?

JP Associates History: सरकारी इंजीनियर से ₹50,000 करोड़ के मालिक बने जयप्रकाश गौड़, फिर कैसे दिवालिया हुई कंपनी?

जयप्रकाश एसोसिएट्स के फाउंडर जयप्रकाश गौड़ की बायोग्राफी। जानें कैसे यमुना एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी कर्ज के जाल में फंसी और अब अदाणी ग्रुप ने इसे कैसे खरीदा।

कॉर्पोरेट जगत में सफलता की कहानियाँ जितनी रोमांचक होती हैं, उनके ढहने की दास्तां उतनी ही सबक देने वाली। आज अदाणी ग्रुप (Adani Group) के स्वामित्व वाली जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यह कहानी एक ऐसे शख्स की है जिसने सरकारी नौकरी की सुरक्षा छोड़ी और अपनी मेहनत से उत्तर भारत का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर साम्राज्य खड़ा किया।

सरकारी इंजीनियर से ‘टाइकून’ बनने का सफर

जेपी ग्रुप के संस्थापक जयप्रकाश गौड़ का जन्म 1931 में यूपी के बुलंदशहर के एक छोटे से गांव में हुआ था। उन्होंने थॉम्पसन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (जो अब IIT Roorkee है) से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। पढ़ाई के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में बतौर इंजीनियर 7 साल तक नौकरी की।

लेकिन गौड़ के सपने बड़े थे। 1958 में उन्होंने मात्र 10,000 रुपये की जमापूंजी के साथ इस्तीफा दिया और एक छोटे ठेकेदार के रूप में काम शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने सड़क और छोटे बांधों के प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी साख बनाई और जेपी ग्रुप की नींव रखी।

यमुना एक्सप्रेसवे: कामयाबी का शिखर

2000 के दशक की शुरुआत तक जेपी ग्रुप सीमेंट, पावर, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट का दिग्गज बन चुका था।

  • ऐतिहासिक प्रोजेक्ट: 2003 में कंपनी को 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे (नोएडा से आगरा) का ठेका मिला।
  • विशाल साम्राज्य: 2007 में जेपी एसोसिएट्स का मार्केट कैप 50,000 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया था। ऐसा लगने लगा था कि जयप्रकाश गौड़ को कोई नहीं रोक सकता।

कर्ज के भंवर में कैसे फंसी कंपनी?

जेपी ग्रुप के पतन की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने एक साथ कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी-भरकम कर्ज ले लिया।

  • ओवर-एक्सपेंशन: कंपनी ने पावर प्लांट और रियल एस्टेट में अपनी क्षमता से अधिक विस्तार कर लिया।
  • 2008 की मंदी: वैश्विक आर्थिक मंदी ने कैश फ्लो को रोक दिया।
  • कर्ज का पहाड़: 2009 में जो कर्ज 11,000 करोड़ था, वह 2016 तक बढ़कर 50,000 करोड़ के पार चला गया।

कंपनी का मॉडल यह था कि बिल्डिंग बनाकर और बेचकर कर्ज चुकाया जाएगा, लेकिन रियल एस्टेट में आई मंदी और प्रोजेक्ट्स में देरी ने इस गणित को बिगाड़ दिया। Wish Town जैसे प्रोजेक्ट्स में 30,000 से ज्यादा घर खरीदारों का सपना अधूरा रह गया।

दिवालियापन और अदाणी का मालिकाना हक

अगस्त 2017 में JP इंफ्राटेक और जून 2024 में पैरेंट कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स आधिकारिक तौर पर दिवालिया (Insolvency) घोषित हो गईं।

  • वेदांता बनाम अदाणी: इसे खरीदने के लिए अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप और गौतम अदाणी के बीच लंबी कानूनी जंग चली। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।
  • फैसला: अंततः बैंकों और लेंडर्स ने अदाणी ग्रुप के पेमेंट प्लान को बेहतर माना। आज जेपी एसोसिएट्स का भविष्य अदाणी ग्रुप के हाथों में है।

 

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