जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड पर सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने उठाए सवाल, बोले- कप्तान, कोच और चयनकर्ता लेते हैं अंतिम फैसला

जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड पर सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने उठाए सवाल, बोले- कप्तान, कोच और चयनकर्ता लेते हैं अंतिम फैसला

 

पूर्व क्रिकेटर सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने जसप्रीत बुमराह की चोट के बीच उनके वर्कलोड मैनेजमेंट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला कप्तान, कोच और चयनकर्ता लेते हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। बुमराह इस समय घुटने में सूजन की समस्या से जूझ रहे हैं और इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने उनकी फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठाए हैं। बद्रीनाथ का कहना है कि किसी खिलाड़ी की शारीरिक स्थिति की जानकारी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिल सकती है, लेकिन किसी खिलाड़ी को मैच में उतारने का अंतिम फैसला कप्तान, कोच और चयनकर्ता का होता है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि क्या बुमराह के वर्कलोड को टीम प्रबंधन की ओर से सही तरीके से संभाला गया था।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका पर बद्रीनाथ ने क्या कहा?

बद्रीनाथ के मुताबिक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस किसी खिलाड़ी की फिटनेस और शारीरिक स्थिति को लेकर टीम को जरूरी जानकारी उपलब्ध करा सकता है। वहां से यह पता लगाया जा सकता है कि खिलाड़ी की मौजूदा स्थिति क्या है और वह किस तरह की परेशानी से गुजर रहा है। हालांकि, मैच खेलने का अंतिम फैसला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का नहीं होता।

पूर्व क्रिकेटर ने इस बात पर जोर दिया कि खिलाड़ी को मैदान पर उतारने की जिम्मेदारी टीम के क्रिकेटिंग मैनेजमेंट की होती है। इसमें कप्तान, मुख्य कोच और चयनकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में यदि किसी खिलाड़ी पर लगातार मैचों का दबाव रहा है और बाद में उसे चोट का सामना करना पड़ता है, तो वर्कलोड मैनेजमेंट पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या बुमराह का वर्कलोड सही तरीके से मैनेज हुआ?

जसप्रीत बुमराह पिछले कुछ समय से भारतीय टीम के सबसे महत्वपूर्ण गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। तीनों प्रारूपों में उनकी भूमिका को देखते हुए टीम प्रबंधन के सामने उनकी फिटनेस बनाए रखना हमेशा बड़ी चुनौती रही है। तेज गेंदबाज होने के कारण उनके शरीर पर लगातार क्रिकेट खेलने का अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है।

बद्रीनाथ ने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि क्या बुमराह के वर्कलोड को पर्याप्त तरीके से मैनेज किया गया था। तेज गेंदबाजों के लिए लगातार मैच खेलना, लंबे स्पेल डालना और अलग-अलग परिस्थितियों में गेंदबाजी करना शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में नियमित आराम और फिटनेस की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

बुमराह के अलावा कई खिलाड़ी चोटिल

भारतीय टीम में इस समय केवल बुमराह ही चोट की समस्या से नहीं जूझ रहे हैं। साई सुदर्शन बाएं पैर के अंगूठे में चोट के कारण बाहर हैं। वहीं हर्षित राणा और नितीश कुमार रेड्डी हैमस्ट्रिंग की समस्या से उबर रहे हैं। इसके अलावा वॉशिंगटन सुंदर भी क्वाड्रिसेप्स की चोट के कारण टीम से बाहर हैं।

एक साथ कई खिलाड़ियों के चोटिल होने से टीम प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर तब, जब टीम को लगातार अंतरराष्ट्रीय मैचों और महत्वपूर्ण सीरीज के बीच खिलाड़ियों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होती है।

तेज गेंदबाजों के लिए वर्कलोड मैनेजमेंट क्यों जरूरी?

क्रिकेट में तेज गेंदबाजों के शरीर पर स्पिन गेंदबाजों की तुलना में अधिक शारीरिक दबाव पड़ता है। तेज गति से गेंदबाजी करते समय घुटने, टखने, पीठ और कंधों पर काफी दबाव आता है। लगातार मैच खेलने से चोट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

जसप्रीत बुमराह की तरह विश्वस्तरीय तेज गेंदबाज के लिए वर्कलोड मैनेजमेंट और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। टीम प्रबंधन को यह तय करना होता है कि खिलाड़ी को कब आराम दिया जाए, कितने ओवर गेंदबाजी कराए जाएं और किस प्रारूप में उसे प्राथमिकता दी जाए।

कप्तान, कोच और चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी

बद्रीनाथ की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि किसी खिलाड़ी की फिटनेस रिपोर्ट मिलने के बाद अंतिम फैसला क्रिकेटिंग मैनेजमेंट का होता है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खिलाड़ी की शारीरिक स्थिति के बारे में जानकारी दे सकता है, लेकिन मैदान पर उतरने का निर्णय कप्तान, कोच और चयनकर्ताओं को करना होता है।

ऐसे में खिलाड़ियों के वर्कलोड पर फैसला लेते समय केवल मौजूदा मैच की जरूरतों को नहीं, बल्कि खिलाड़ी के लंबे करियर और भविष्य को भी ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर बुमराह जैसे खिलाड़ी के मामले में, जिनकी फिटनेस भारतीय टीम की योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

चोटों के बीच टीम इंडिया के सामने चुनौती

बुमराह, साई सुदर्शन, हर्षित राणा, नितीश कुमार रेड्डी और वॉशिंगटन सुंदर की चोटों ने भारतीय टीम के सामने फिटनेस को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है। अलग-अलग खिलाड़ियों की चोटों की प्रकृति अलग है, लेकिन एक साथ कई प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपलब्धता टीम संयोजन को प्रभावित कर सकती है।

ऐसे समय में टीम प्रबंधन को उपलब्ध खिलाड़ियों के साथ संतुलित रणनीति तैयार करनी होगी। साथ ही चोट से वापसी कर रहे खिलाड़ियों को जल्दबाजी में मैदान पर उतारने के बजाय उनकी फिटनेस को प्राथमिकता देनी होगी।

बुमराह की वापसी पर रहेंगी निगाहें

जसप्रीत बुमराह की फिटनेस पर भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की नजर बनी हुई है। वह टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाजों में से एक हैं और उनकी मौजूदगी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती देती है। हालांकि घुटने की सूजन के कारण उनकी उपलब्धता को लेकर टीम प्रबंधन को सावधानी बरतनी होगी।

सुब्रमण्यम बद्रीनाथ की टिप्पणी ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट में वर्कलोड मैनेजमेंट, फिटनेस मॉनिटरिंग और खिलाड़ियों को सही समय पर आराम देने की जरूरत पर चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टीम प्रबंधन बुमराह समेत चोटिल खिलाड़ियों की वापसी को लेकर किस रणनीति पर आगे बढ़ता है और क्या खिलाड़ियों के लंबे करियर को ध्यान में रखते हुए उनके वर्कलोड को और बेहतर तरीके से मैनेज किया जाता है।

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