भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को सकारात्मक शुरुआत। सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त के साथ ऑयल एंड गैस और आईटी शेयरों में तेजी देखी गई।
सोमवार, 22 जून 2026 को भारतीय घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। सप्ताह की शुरुआत पिछले सप्ताह के उतार-चढ़ाव के बाद निवेशकों को राहत दी है। तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक स्तर पर सुधार के सकारात्मक संकेतों के कारण सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी (NSE Nifty 50) दोनों सूचकांकों में बढ़त हुई है।
बाजार रिपोर्ट और प्रमुख सूचकांक
सुबह के सत्र में, बीएसई सेंसेक्स लगभग 408 अंकों (0.53%) की छलांग लगाकर 77,211 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 ने 123 अंकों (0.51%) की वृद्धि के साथ 24,136 के स्तर को पार किया। बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) अच्छी रही, जो बड़े शेयरों (Large-caps) के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी तेजी दिखाई दी। मिडकैप 100 सूचकांकों में 0.28% की वृद्धि हुई, जबकि स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में 0.40% की वृद्धि हुई।
क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो, निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स ने 1.30% की तेजी के साथ क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। इसके अलावा, निवेशकों ने आईटी और टेलीकॉम शेयरों की ओर रुझान दिखाई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.11% ऊपर चढ़ा। बाजार को मजबूती देने में वित्तीय सेवाओं और बैंकों का भी योगदान था।
कच्चे तेल कीमतों का असर
तेजी से चलने वाले बाजार का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रही है। विश्लेषकों का मत है कि यह बाजार के लिए एक अच्छा संकेत है क्योंकि यह बताता है कि संघर्ष और अधिक फैलने की संभावना कम है।
भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा उठाता है। व्यापार घाटा कम होता है और आयात बिल कम होते हैं। साथ ही रुपये की मजबूती और विदेशी निवेशकों (FIIs) के रुख में सुधार बाजार को सुरक्षित कर रहे हैं। 20 मई को रुपया 94.32 के स्तर पर पहुंचकर डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से उबर गया है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है।
निवेशकों और बाजार के भविष्य पर सलाह
किंतु बाजार अभी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर है। विशेषज्ञ वी.के. विजयकुमार का कहना है कि बाजार अब संभला हुआ दिखाई देता है, हालांकि शांति वार्ता को लेकर खबरें विरोधाभासी हैं। मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में कमाई की अधिक क्षमता को देखते हुए निवेशकों ने इन शेयरों की ओर रुख किया है।
कुल मिलाकर, सोमवार का कारोबार दिखाता है कि भारतीय निवेशक वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी संयम से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, विदेशी मुद्रा प्रवाह और कंपनियों की त्रैमासिक आय आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सावधान रहें और बाजार के स्तरों के अनुसार अपनी निवेश रणनीति बनाएं।