Stock Market Today: Sensex 316 अंक टूटा, Nifty भी फिसला; Crude Oil और Geopolitical Tension का दबाव

Stock Market Today: Sensex 316 अंक टूटा, Nifty भी फिसला; Crude Oil और Geopolitical Tension का दबाव

 

 

Stock Market Today: 14 अगस्त को Sensex 315.87 अंक गिरकर 77,764.09 पर खुला, जबकि Nifty 24,322.05 पर 0.30% नीचे रहा। जानें बाजार में गिरावट की वजह।

भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार, 14 अगस्त को कमजोर शुरुआत की। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में नजर आए। बाजार पिछले कुछ समय से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है और निवेशकों को ऐसी ठोस वजह या नए ट्रिगर की तलाश है, जो बाजार को इस दायरे से बाहर निकाल सके। मौजूदा परिस्थितियों में तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके साथ ही विदेशी बाजारों के संकेत भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण घरेलू बाजार में खरीदारी का उत्साह सीमित रहा। शुक्रवार की शुरुआती कमजोरी को इसी सतर्क माहौल का संकेत माना जा सकता है।

Sensex 315 अंक से ज्यादा टूटा

शुक्रवार सुबह करीब 9:16 बजे बीएसई सेंसेक्स 77,764.09 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह अपने पिछले बंद स्तर 78,079.96 से 315.87 अंक यानी करीब 0.40 प्रतिशत नीचे था। शुरुआती गिरावट बताती है कि बाजार में निवेशक फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बच रहे हैं। सेंसेक्स में बड़ी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव का असर पूरे बाजार के मूड पर पड़ता है। ऐसे समय में जब वैश्विक संकेतों में स्पष्टता की कमी हो और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहें, निवेशक आमतौर पर जोखिम कम करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

Nifty भी लाल निशान में खुला

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शुक्रवार को कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 9:16 बजे निफ्टी 0.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,322.05 के स्तर पर था। निफ्टी में गिरावट व्यापक बाजार धारणा में सावधानी को दर्शाती है। हालांकि गिरावट अभी सीमित दायरे में है, लेकिन लगातार बनी अनिश्चितता निवेशकों को बड़े दांव लगाने से रोक रही है। बाजार विशेषज्ञों और ट्रेडर्स की नजर अब इस बात पर रहेगी कि निफ्टी अपने महत्वपूर्ण स्तरों के आसपास किस तरह व्यवहार करता है और क्या दिन के कारोबार में खरीदारी लौटती है।

भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी चिंता

शेयर बाजार पर इस समय सबसे बड़े बाहरी दबावों में से एक भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार, व्यापार और निवेश धारणा पर पड़ता है। मध्य पूर्व से जुड़े घटनाक्रम ने खास तौर पर निवेशकों को सतर्क किया है। किसी भी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम से कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह चिंता और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि महंगे कच्चे तेल से आयात बिल बढ़ सकता है और घरेलू महंगाई पर दबाव बन सकता है। ऐसे माहौल में शेयर बाजार में निवेशक जोखिम लेने से पहले स्थिति का आकलन करना पसंद करते हैं।

महंगा क्रूड भी बाजार के लिए चुनौती

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए एक अहम चिंता बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने का असर देश के व्यापार संतुलन, रुपये और महंगाई पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में लगातार मजबूती से कंपनियों की लागत भी प्रभावित हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ईंधन खर्च महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूसरी ओर, तेल की ऊंची कीमतें उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर भी अप्रत्यक्ष दबाव डाल सकती हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल कच्चे तेल के बाजार में होने वाले हर बड़े बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं।

बाजार को चाहिए नया ट्रिगर

घरेलू शेयर बाजार हाल के दिनों में एक सीमित दायरे में घूमता नजर आया है। निवेशक अब ऐसे नए ट्रिगर की तलाश में हैं, जो बाजार को निर्णायक दिशा दे सके। मजबूत कॉरपोरेट नतीजे, आर्थिक आंकड़े, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां, विदेशी निवेश का रुख और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। यदि कोई सकारात्मक संकेत सामने आता है, तो बाजार मौजूदा दायरे से ऊपर निकलने की कोशिश कर सकता है। वहीं नकारात्मक घटनाक्रम और तेल की कीमतों में और तेजी बाजार को नीचे की ओर धकेल सकती है।

वैश्विक संकेतों का भी असर

भारतीय बाजार पूरी तरह घरेलू घटनाक्रम पर निर्भर नहीं है। वैश्विक शेयर बाजारों का प्रदर्शन, अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों की दिशा भी घरेलू निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती है। हाल में अमेरिकी महंगाई से जुड़े संकेतों ने वैश्विक बाजारों को कुछ राहत दी है, लेकिन दूसरी तरफ मध्य पूर्व की स्थिति ने जोखिम बढ़ाया है। ऐसे मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव दिखाई दे रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।

निवेशकों के लिए सतर्कता का समय

शुक्रवार की शुरुआती गिरावट को फिलहाल किसी बड़े बाजार संकट के रूप में देखने के बजाय मौजूदा अनिश्चित माहौल में सामान्य सावधानी के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती गिरावट सीमित रही। हालांकि, दिन के दौरान वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में किसी बड़े बदलाव का असर भारतीय सूचकांकों पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए इस समय जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की दिशा और प्रमुख स्तरों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

आगे बाजार की दिशा पर रहेगी नजर

भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाले कारोबारी सत्र काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि वैश्विक अनिश्चितता कम होती है, क्रूड की कीमतों में नरमी आती है और घरेलू स्तर पर सकारात्मक ट्रिगर मिलता है, तो बाजार में दोबारा तेजी की कोशिश देखी जा सकती है। इसके विपरीत भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या तेल की कीमतों में और उछाल आने पर दबाव कायम रह सकता है। फिलहाल सेंसेक्स 77,764.09 और निफ्टी 24,322.05 के आसपास शुरुआती कारोबार में कमजोर नजर आए। बाजार की अगली दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशकों को नया सकारात्मक संकेत मिलता है या वैश्विक जोखिम एक बार फिर हावी होते हैं।

 

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