Stock Market Today: US-Iran तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा। सेंसेक्स 434 अंक टूटा, जबकि निफ्टी 24,500 के नीचे कारोबार करता दिखा।
मंगलवार को कारोबार के दौरान भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ा। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स (बैंकिंग, FMCG, सीमेंट और मेटल) कमजोर हुए। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को चिंतित कर दिया। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर स्पष्टता की कमी ने बाजार का सेंटीमेंट प्रभावित किया। वर्तमान में, निवेशक वैश्विक घटनाक्रम पर सावधानीपूर्वक नजर रख रहे हैं और शायद जोखिमपूर्ण निवेश से बच रहे हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी में कमी
मंगलवार को सुबह 11:55 बजे तक, BSE Sensex 78,108.00 के स्तर पर 434.44 अंक, यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। NSE Nifty भी 139.95 अंक (0.57%) टूटकर 24,443.85 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा, जिससे निफ्टी 24,500 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया।
शुरूआती कारोबार में भी बाजार पर दबाव था, लेकिन बैंकिंग, FMCG, सीमेंट और मेटल शेयरों में बिकवाली तेज होती गई जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा। इससे बाजार की आम समझ बिगड़ी। अब निवेशकों का ध्यान वैश्विक घटनाक्रमों और विदेशी निवेशकों की घरेलू बाजार में गतिविधियों पर है।
US-Iran संघर्ष ने निवेशकों को चिंतित किया
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह है। दोनों देशों के बीच होने वाले समझौते और Strait of Hormuz को फिर से खोलने के बारे में अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है।
ईरान का कहना है कि अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने से पहले अपने प्रतिबंधों को हटाने और अन्य शर्तों को पूरा करना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि वे मर चुके हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि ये परस्पर विरोधी प्रवृत्तियां किसी संभावित समझौते की समयसीमा और स्थिरता को प्रभावित करती हैं। वर्तमान समय में निवेशक दांव लगाने से बचते हैं क्योंकि बाजार अचानक किसी भी नए भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बदल सकता है।
Enrich Money के CEO Ponmudi R ने कहा कि बाजार वैश्विक खबरों से प्रभावित रह सकता है जब तक कि अमेरिका और ईरान के संबंधों में स्पष्टता नहीं आती। फिलहाल, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए निवेशक किसी स्पष्ट दिशा में बड़े दांव लगाने से बच सकते हैं।
कच्चे तेल की कमाई
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार भी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित हो रहा है। Crude oil की कीमत मंगलवार को एक सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई। Brent क्रूड करीब 88.09 डॉलर प्रति बैरल हो गया। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीद कमजोर होने से तेल की कीमतों में तेजी आई।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल आयातकर्ता है, इसलिए इसकी बढ़ती कीमत महत्वपूर्ण है। तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि होने पर देश की आयात लागत बढ़ सकती है। इससे चालू खाते पर दबाव बढ़ने और रुपये की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
महंगी तेल कंपनियों की आय की चुनौती
सरकार और उपभोक्ता ही कच्चे तेल की तेजी से प्रभावित हैं। इससे कई कंपनियों के उत्पादन और परिवहन खर्च भी प्रभावित होते हैं। एयरलाइंस, पेंट, केमिकल, टायर, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में महंगा क्रूड ऑयल खर्च हो सकता है।
कंपनियों के लाभ margins पर दबाव आ सकता है अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं। यही कारण है कि शेयर बाजार में निवेशक क्रूड ऑयल की हर बड़ी गिरावट को बहुत गंभीरता से देखते हैं।
बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों में बिक्री
मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग शेयरों पर काफी दबाव था। Benchmark indices की कमजोरी को वित्तीय कंपनियों में बिकवाली ने बढ़ा दिया। साथ ही FMCG, cement और metal stocks में भी गिरावट हुई।
निफ्टी और सेंसेक्स इन क्षेत्रों में गिरावट से प्रभावित हुए। हालाँकि, बाजार के हर क्षेत्र में कुछ कमजोरी नहीं रही है। बाजार में चुनिंदा खरीदारी की संभावना बनी रही, क्योंकि कुछ आईटी और फार्मास्यूटिकल शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते दिखाई दिए।
क्या संकेत निवेशकों को आकर्षित करते हैं?
तीन प्रमुख संकेतों से आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार का रुख निर्धारित हो सकता है। पहली बात यह है कि क्या अमेरिका और ईरान की बातचीत में कोई महत्वपूर्ण प्रगति हुई है या नहीं। दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से स्थिति किस दिशा में जाती है? तीसरी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें किस स्तर पर स्थिर हैं?
बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे भी प्रभावित करेंगे। बाजार में राहत की संभावना बन सकती है अगर वैश्विक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है। उल्टा, तनाव बढ़ने और तेल की कीमतें बढ़ने पर भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, मंगलवार का कारोबार निवेशकों को सतर्क करता है। अमेरिकी-ईरान बातचीत, महंगा क्रूड ऑयल और वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के मुख्य कारक बने हुए हैं। यही कारण है कि निवेशकों का ध्यान बाजार की हर बड़ी खबर और वैश्विक घटनाक्रम पर रहता है।