भारतीय शेयर बाजार में 19 अक्टूबर को सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत हुई। सरकारी बैंक और फार्मा शेयरों में तेजी रही, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत सुस्त रही। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला, जबकि सरकारी बैंकों, फार्मा और कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी ने बाजार को संभालने की कोशिश की। सुबह 9:23 बजे बीएसई सेंसेक्स 103.56 अंक यानी 0.14 प्रतिशत गिरकर 74,625.71 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एनएसई निफ्टी 5.25 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 23,140.90 पर पहुंच गया। निफ्टी का पिछला बंद स्तर 23,146.15 था। बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जहां सरकारी बैंक और स्वास्थ्य क्षेत्र के शेयरों में मजबूती दिखाई दी, वहीं निजी बैंकों और वित्तीय सेवा कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। इसके अलावा, इंडिया वीआईएक्स में तेजी ने बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में कमजोरी
सोमवार के शुरुआती कारोबार में बैंकिंग शेयर बाजार पर दबाव बनाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे। निफ्टी बैंक सूचकांक 0.39 प्रतिशत गिरकर 55,626.40 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सूचकांक में 0.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक 1.24 प्रतिशत नीचे आ गया।
निजी बैंकों के शेयरों में कमजोरी के कारण बैंकिंग क्षेत्र का प्रदर्शन दबाव में रहा। निवेशकों की नजर अब बैंकों और अन्य प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी बनी हुई है। इन नतीजों से कंपनियों की आय, मुनाफे और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
हालांकि, बैंकिंग क्षेत्र में सभी शेयरों का रुख एक जैसा नहीं रहा। सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी ने इस क्षेत्र के भीतर अलग तस्वीर पेश की। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में निवेशक चुनिंदा क्षेत्रों और कंपनियों में अवसर तलाश रहे हैं।
सरकारी बैंकों और फार्मा शेयरों में तेजी
जहां निजी बैंकों में कमजोरी देखने को मिली, वहीं सरकारी बैंकों के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में शानदार प्रदर्शन किया। निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक 1.99 प्रतिशत बढ़कर 8,256.30 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में यह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक रहा।
इसके अलावा, निफ्टी फार्मा सूचकांक में 0.69 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांक 0.60 प्रतिशत चढ़ा। निफ्टी ऑटो सूचकांक भी 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।
निफ्टी मेटल, ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सूचकांकों में भी मजबूती दिखाई दी। दूसरी ओर, निफ्टी आईटी सूचकांक 0.45 प्रतिशत नीचे रहा और एफएमसीजी सूचकांक में 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह बाजार में एक ओर कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली, तो दूसरी ओर कई प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का मिला-जुला प्रदर्शन
व्यापक बाजार में भी कारोबार की शुरुआत मिश्रित रुख के साथ हुई। निफ्टी 100 में 0.06 प्रतिशत और निफ्टी 200 में 0.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी नेक्स्ट 50 ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 0.41 प्रतिशत की तेजी हासिल की।
हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप के कुछ हिस्सों में कमजोरी बनी रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.08 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 सूचकांक 0.21 प्रतिशत नीचे रहा। निफ्टी माइक्रोकैप 250 में 0.40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
यह रुझान संकेत देता है कि शुरुआती कारोबार में खरीदारी चुनिंदा बड़े शेयरों और कुछ विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित रही। बाजार में निवेशकों का रुख व्यापक स्तर पर एकसमान नहीं था। आने वाले सत्रों में कंपनियों के वित्तीय नतीजे और वैश्विक संकेत इस प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
इंडिया वीआईएक्स में 2.59 प्रतिशत की तेजी
बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 2.59 प्रतिशत बढ़कर 14.43 पर पहुंच गया। वीआईएक्स में बढ़ोतरी आम तौर पर यह दर्शाती है कि निवेशक आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका देख रहे हैं।
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव निवेशकों के लिए प्रमुख चिंता बने हुए हैं। ऐसे माहौल में बाजार की दिशा तेजी से बदल सकती है। इसलिए निवेशक कंपनियों के नतीजों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी नजर रख रहे हैं।
होर्मुज तनाव और 109 डॉलर के पार ब्रेंट क्रूड से बाजार पर दबाव
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, पिछले सप्ताह निफ्टी में आई 2.8 प्रतिशत की तेजी और प्रमुख आईटी कंपनियों के उम्मीद से बेहतर नतीजों के बाद बैंकिंग क्षेत्र के बड़े शेयरों के अच्छे प्रदर्शन से बाजार को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से बाजार पर दबाव पड़ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर रुपये और उन कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जिनकी लागत ईंधन पर निर्भर करती है।
विजयकुमार ने यह भी कहा कि बड़ी कंपनियों के आकर्षक मूल्यांकन और रुपये में मजबूती से विदेशी संस्थागत निवेशकों का भारत के प्रति रुख कुछ सकारात्मक हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण यह रुझान लंबे समय तक बने रहने की संभावना पर सवाल हैं।
इस सप्ताह शेयरों के प्रदर्शन पर रहेंगी नजरें
बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, बड़ी कंपनियों का मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से बेहतर प्रदर्शन करना फिलहाल तर्कसंगत रुझान है और आगे भी इसके जारी रहने की संभावना है। इस सप्ताह दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों के आधार पर अलग-अलग शेयरों में विशिष्ट गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
कुल मिलाकर, सोमवार को बाजार की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन सरकारी बैंकों, फार्मा और कुछ अन्य क्षेत्रों में तेजी ने तस्वीर को पूरी तरह नकारात्मक नहीं होने दिया। कच्चे तेल की कीमतें, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम, रुपये की स्थिति और कंपनियों के नतीजे बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।