23 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट। जानें क्यों गिरा सेंसेक्स और निफ्टी, और कच्चे तेल की कीमतों के साथ रुपये की कमजोरी का इस पर क्या असर हुआ।
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों का भारी दबाव देखने को मिल रहा है।
- सुबह लगभग 11:30 बजे के करीब बाजार की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:
- सेंसेक्स (Sensex): 757 अंक (0.96%) गिरकर 77,759 पर आ गया।
- निफ्टी (Nifty): 189 अंक (0.78%) फिसलकर 24,188 के स्तर के पास कारोबार कर रहा था।
सेक्टरवार प्रदर्शन: ऑटो और बैंकिंग में गिरावट, फार्मा में चमक
बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) काफी कमजोर रही, जहां 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 12 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
- ऑटो स्टॉक्स: लगभग 1.3% की गिरावट के साथ सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सेक्टरों में शामिल रहे।
- बैंकिंग और फाइनेंस: दिग्गज शेयरों पर दबाव दिखा; ICICI बैंक 1.6% और HDFC बैंक 0.8% नीचे रहे।
- फार्मा स्टॉक्स: इसके विपरीत, फार्मा सेक्टर में 2.3% की तेजी दिखी। नोमुरा (Nomura) की एक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू फार्मास्युटिकल बाजार में मार्च में सालाना आधार पर 10.1% की वृद्धि दर्ज की गई है।
बाजार गिरने के मुख्य कारण (Key Factors)
1. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार चौथे सत्र में बढ़ीं और $103 प्रति बैरल के पास पहुँच गईं। अमेरिका-ईरान वार्ता में आए गतिरोध ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। जियोजित इन्वेस्टमेंट के वीके विजयकुमार के अनुसार, $100 के ऊपर तेल की कीमतें भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम हैं।
2. रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली
- रुपये में कमजोरी: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे गिरकर 94.12 के स्तर पर पहुँच गया।
- FII सेलिंग: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले सत्र में ₹2,078 करोड़ की इक्विटी बेची, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।
3. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा गलियारे में बढ़ते जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं।
4. ग्लोबल ब्रोकरेज का नजरिया
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म HSBC ने भारतीय इक्विटी बाजार की रेटिंग को “न्यूट्रल” से घटाकर “अंडरवेट” कर दिया है। इसका मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव बताया गया है।