इंग्लैंड से सीरीज हारने के बाद स्मृति मंधाना का बयान। जानिए क्यों टी20 विश्व कप में भारतीय गेंदबाजी पर रहेगा सबका फोकस।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड का दौरा मिला-जुला रहा। तीन मैचों की टी20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले में भारतीय टीम को इंग्लैंड के हाथों छह विकेट से हार का सामना करना पड़ा, जिसके साथ ही इंग्लैंड ने सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। सीरीज हारने के बाद टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना ने हार के कारणों का विश्लेषण करते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही—टीम ‘डॉट बॉल्स’ (dot balls) निकालने में असफल रही, जो कि इस फॉर्मेट में जीत की कुंजी होती है। मंधाना को उम्मीद है कि टीम इस गलती से सीख लेगी और आगामी महिला टी20 विश्व कप में इसे नहीं दोहराएगी।
शानदार शुरुआत के बाद लड़खड़ाई गेंदबाजी
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्मृति मंधाना ने टीम के शुरुआती प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने कहा, “हमने गेंदबाजी के साथ बेहद शानदार शुरुआत की थी, इंग्लैंड का स्कोर 35 रन पर 3 विकेट कर दिया था। लेकिन उसके बाद हमने लय खो दी।” मंधाना ने इंग्लैंड की बल्लेबाजों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बेहद शानदार क्रिकेटिंग शॉट्स खेले और भारत को वापसी का मौका नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इंग्लैंड की उस साझेदारी के दौरान भारतीय गेंदबाज दबाव बनाने और लगातार डॉट बॉल्स डालने में विफल रहीं, जिससे विपक्षी टीम को आसानी से रन बनाने का मौका मिला।
‘डॉट बॉल्स’ का टी20 क्रिकेट में महत्व
टी20 क्रिकेट में ‘डॉट बॉल्स’ का महत्व किसी भी अन्य फॉर्मेट से अधिक होता है। जब गेंदबाज लगातार डॉट बॉल्स डालता है, तो वह बल्लेबाज पर दबाव बनाता है, जिससे गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। भारतीय टीम के लिए इस सीरीज का सबसे बड़ा सबक यही रहा है कि इंग्लैंड जैसी आक्रामक टीम के खिलाफ दबाव बनाने के लिए केवल विकेट लेना काफी नहीं है, बल्कि रन रोकने (economical bowling) की कला भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मंधाना का यह बयान टीम की भविष्य की रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
विश्व कप से पहले तैयारी का आकलन
इंग्लैंड द्वारा सीरीज 2-1 से जीतने के बाद भारतीय टीम के विश्व कप के ‘बिल्ड-अप’ को थोड़ा झटका जरूर लगा है। हालांकि, मंधाना इसे सकारात्मक रूप में देखती हैं। उन्होंने कहा कि सीरीज की हार से मिले सबक विश्व कप से पहले टीम के लिए एक आईना हैं। विश्व कप जैसी बड़ी प्रतियोगिता में ऐसी गलतियां भारी पड़ सकती हैं, इसलिए खिलाड़ियों को अब अपनी गेंदबाजी की लाइन और लेंथ पर और अधिक ध्यान देना होगा। इंग्लैंड की परिस्थितियों का अनुभव टीम के काम आएगा, क्योंकि विश्व कप भी उन्हीं परिस्थितियों में खेला जाना है।
मध्यक्रम और डेथ ओवर्स की चुनौती
सीरीज के दौरान भारतीय टीम की बल्लेबाजी में भी कुछ समस्याएं उभर कर सामने आईं। पहले दो मैचों की तरह ही निर्णायक मुकाबले में भी अंतिम ओवरों में टीम उस गति (momentum) को बरकरार नहीं रख पाई जिसकी उम्मीद थी। ऋचा घोष जैसे हिटर का शांत रहना और अंतिम ओवरों में विकेटों का गिरना टीम के लिए चिंता का विषय है। स्मृति मंधाना ने भले ही गेंदबाजी पर फोकस किया हो, लेकिन हार की समीक्षा करते समय टीम प्रबंधन निश्चित रूप से बल्लेबाजी की इन कमियों पर भी चर्चा करेगा।
हार से मिली सीख और आगे की राह
सीरीज गंवाने के बाद भारतीय टीम का मनोबल टूटने के बजाय और अधिक मजबूत होने की जरूरत है। स्मृति मंधाना की परिपक्वता इस बात से झलकती है कि वे अपनी टीम की हार का बहाना बनाने के बजाय सीधे तौर पर ‘डॉट बॉल्स’ की कमी को स्वीकार कर रही हैं। एक खिलाड़ी के रूप में, वे जानती हैं कि इंग्लैंड में विश्व कप जीतना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड जैसी टीमें बेहद संतुलित हैं, और भारत को अपना ‘ए-गेम’ दिखाना होगा।
विश्व कप से पहले यह हार टीम इंडिया के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है। खिलाड़ियों को अब अपने वर्कलोड मैनेजमेंट और खेल की रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। मंधाना और हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम के पास अब भी इतना समय है कि वे अपनी गलतियों को सुधार सकें। प्रशंसक अभी भी टीम इंडिया पर विश्वास जता रहे हैं, और उम्मीद है कि जब 14 जून को भारतीय टीम विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैदान पर उतरेगी, तो वे एक नई ऊर्जा और बेहतर गेंदबाजी रणनीति के साथ नजर आएंगे।
सीरीज का अंत निराशाजनक रहा, लेकिन स्मृति मंधाना के शब्दों में ‘सीखना’ ही इस खेल का सबसे बड़ा हिस्सा है। यदि टीम ने इन गलतियों को सुधार लिया, तो विश्व कप में भारतीय महिला टीम निश्चित रूप से दुनिया को हैरान करने का दम रखती है।