शुबमन गिल के फैसले पर भारी पड़े गौतम गंभीर? श्रीलंका टेस्ट ड्रॉ के बाद कोच-कप्तान के बीच मतभेद की चर्चा

शुबमन गिल के फैसले पर भारी पड़े गौतम गंभीर? श्रीलंका टेस्ट ड्रॉ के बाद कोच-कप्तान के बीच मतभेद की चर्चा

 

श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट ड्रॉ के बाद गौतम गंभीर और शुबमन गिल के बीच कथित मतभेद की चर्चा तेज है। रिपोर्ट में गंभीर पर गिल के फैसले को नजरअंदाज करने का दावा है।

 

भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ पर खत्म हो गया था, लेकिन मैच के बाद भारतीय टीम में फैसलों को लेकर फिर से बहस हो गई है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टेस्ट और वनडे कप्तान शुबमन गिल के निर्णय को बदल दिया था। माना जाता है कि गिल पारी घोषित करने के पक्ष में थे, लेकिन गंभीर चाहते थे कि ध्रुव जुरेल अपना शतक पूरा करे। यही कारण था कि भारत ने अपनी पहली पारी 503 रन पर 9 विकेट से जीती। हालाँकि, टीम प्रबंधन ने कोच-कप्तान के बीच किसी मतभेद की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।

कोलंबो टेस्ट में जीत के करीब पहुंचा मैच ड्रॉ

भारतीय टीम कोलंबो टेस्ट के आखिरी दिन जीत की स्थिति में दिखाई दी। श्रीलंका की टीम फॉलोऑन खेल रही थी और दिन की शुरुआत में चार विकेट गंवा चुकी थी। उस समय श्रीलंका के पास केवल 16 रन की बढ़त थी। भारतीय गेंदबाजों ने मेजबान टीम को जल्दी समेटने का मौका पाया और सीरीज में 2-0 की बढ़त हासिल की।

लेकिन भारतीय गेंदबाजों को पूरे दिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने परेशान किया। शानदार बल्लेबाजी करते हुए सोनल दिनुषा ने नाबाद शतक लगाकर अपनी टीम को हार से बचाया। श्रीलंका ने पूरे दिन बल्लेबाजी करके खेल ड्रॉ की ओर ले गया। मैच अंततः बिना नतीजे के समाप्त हुआ। भारत ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज 1-0 से जीती।

गिल पहले घोषणा करना चाहते थे?

Cricblogger ने कहा कि शुबमन गिल ने टेस्ट के दूसरे दिन भारत की पहली पारी को पहले घोषित करने का विचार रखा था। रिपोर्ट बताती है कि उस समय भारत को पारी घोषित करके श्रीलंका पर दबाव डालने का अवसर था। लेकिन विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल को मुख्य कोच गौतम गंभीर ने शतक लगाना चाहा था।

इसके बाद जुरेल ने शतक पूरा किया और 503/9 के स्कोर पर भारत ने अपनी पारी घोषित की। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत को मैच में पर्याप्त समय बचाने और श्रीलंका को दोबारा बल्लेबाजी करने का बेहतर मौका मिल सकता था।

हालाँकि, मीडिया रिपोर्टों में सामने आए एक कथित सूत्र के दावे पर यह पूरी बात आधारित है। भारतीय टीम ने यह पुष्टि नहीं की है कि गिल और गंभीर वास्तव में इस विषय पर असहमत थे।

कोच के निर्णयों पर उठ रहे प्रश्न

रिपोर्ट में एक सूत्र ने कहा कि टीम में चिंता बढ़ रही है कि कोच अक्सर कप्तान के निर्णय को प्रभावित कर रहे हैं। सूत्र ने बताया कि ऐसा आवश्यकता से अधिक बार होता है।

यदि यह दावा सही होता है, तो इससे टीम इंडिया की नेतृत्व व्यवस्था पर चर्चा तेज हो सकती है। क्रिकेट में कोच की भूमिका रणनीति, तैयारी और खिलाड़ियों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण होती है, जबकि कप्तान मैदान पर अंतिम रणनीतिक निर्णय लेता है। दोनों के बीच तालमेल किसी भी टीम की सफलता के लिए अनिवार्य है।

ड्रॉ की घोषणा के बाद गिल ने क्या कहा?

कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने के बाद शुबमन गिल ने कहा कि भारतीय टीम ने 150 ओवर फील्डिंग की और अपनी तरफ से सब कुछ किया। उनका कहना था कि मौसम भी एक महत्वपूर्ण कारक है।

गिल ने कहा कि फॉलोऑन जैसे निर्णयों पर बाद में चर्चा की जा सकती है, लेकिन मैदान पर उस समय उपलब्ध परिस्थितियों पर ही सबसे अच्छा निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना था कि हालांकि इस बार हालात भारत के पक्ष में नहीं गए, मुकाबला उत्कृष्ट रहा और इससे टेस्ट क्रिकेट की जीत हुई।

श्रीलंका की वापसी की गिल ने प्रशंसा की

श्रीलंकाई टीम की वापसी को भी भारतीय कप्तान ने सराहना की। विपक्षी टीम से काफी कुछ सीखने के बाद श्रीलंका की वापसी देखने लायक थी, उन्होंने कहा। गिल ने यह भी कहा कि भारतीय टीम नहीं मानती कि अगर वह कुछ अलग करती तो नतीजा बदल सकता था।

साथ ही, उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाजों की तारीफ की और कहा कि वे मुकाबले में अच्छी तरह से गेंदबाजी करते थे। श्रीलंका ने मैच को बचाने में सोनल दिनुषा की शतकीय पारी सबसे महत्वपूर्ण थी।

सीरीज में भारत का नाम, लेकिन प्रश्न अभी भी है

दूसरा टेस्ट ड्रॉ होने के बावजूद भारत ने सीरीज को 1-0 से जीत लिया। टीम के लिए सीरीज का नतीजा अच्छा रहा, लेकिन कोलंबो टेस्ट में जीत का अवसर खोने के बाद रणनीतिक निर्णयों पर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है कि गौतम गंभीर और शुबमन गिल के बीच कथित मतभेद है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जल्दबाजी होगी कि भारत की पारी घोषित करने में देरी वास्तव में कप्तान की इच्छा के खिलाफ हुई या नहीं। फिर भी, कोलंबो टेस्ट का ड्रॉ निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट में कप्तान और कोच की भूमिका, रणनीतिक निर्णय और टीम में तालमेल को लेकर नई बहस का कारण बन गया है।

Related posts

2027 वर्ल्ड कप खेलेंगे रोहित शर्मा? हिटमैन के एक जवाब ने बढ़ाया सस्पेंस

क्या BCCI पर लागू होगा National Sports Governance Act 2025? सुप्रीम कोर्ट के सवाल से बढ़ी हलचल

अफगानिस्तान सीरीज से पहले टीम इंडिया में बड़ा बदलाव, हर्षित राणा बाहर; यश ठाकुर की एंट्री

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More