श्रेयंका पाटिल ने चोटों के कारण क्रिकेट छोड़ने के अपने ख्यालों और मानसिक संघर्ष के बारे में खुलासा किया। जानिए कैसे उन्होंने मैदान पर शानदार वापसी की।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उभरती हुई ऑफ-स्पिनर श्रेयंका पाटिल का नाम इन दिनों खेल जगत में चर्चा का विषय है। एक युवा खिलाड़ी के लिए लगभग एक साल तक मैदान से दूर रहना किसी बड़े सदमे से कम नहीं होता, और श्रेयंका ने जो संघर्ष झेला है, वह किसी भी एथलीट के लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। चोटों के कारण न केवल उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनाई, बल्कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने खेल छोड़ने तक का मन बना लिया था। 22 वर्षीय श्रेयंका की वापसी न केवल शारीरिक सुधार की कहानी है, बल्कि यह उनकी मानसिक दृढ़ता का भी प्रमाण है।
चोटों का लंबा सिलसिला और निराशा का दौर
श्रेयंका के लिए यह कठिन दौर जुलाई 2024 में शुरू हुआ, जब एशिया कप के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उनकी उंगली में फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद उनके दोनों पैरों में गंभीर ‘शिन इंजरी’ और फिर बाएँ अंगूठे में फ्रैक्चर ने उन्हें एक साल से अधिक समय के लिए खेल से बाहर कर दिया। इस चोट के कारण वह भारत की 2025 विश्व कप जीत का हिस्सा नहीं बन सकीं और उन्हें 2025 के महिला प्रीमियर लीग (WPL) सत्र से भी बाहर होना पड़ा।
यह समय उनके करियर के लिए अत्यंत निराशाजनक था क्योंकि वह व्हाइट-बॉल क्रिकेट में भारत की मुख्य स्पिनर के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रही थीं। श्रेयंका ने ‘जियोस्टार’ (JioStar) से बात करते हुए स्वीकार किया, “अगर मैं यह कहूँ कि मैं डिप्रेशन में नहीं थी या मैंने क्रिकेट छोड़ने के बारे में नहीं सोचा, तो यह झूठ होगा। चोट लगने के शुरुआती दौर में मुझे बिल्कुल ऐसा ही महसूस हुआ था।” यह एक युवा खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ा मानसिक बोझ था, जहाँ खेल के प्रति उनका जुनून एक तरफ था और चोट का दर्द दूसरी तरफ।
परिवार का सहयोग और वापसी की जिद
श्रेयंका ने बताया कि इस मुश्किल दौर से उबरने में उनके परिवार और दोस्तों का बड़ा हाथ रहा। उन्होंने कहा, “मेरे पिता लगातार मुझसे बात करते रहे और मेरे परिवार ने हर कदम पर मेरा समर्थन किया। मैं हमेशा ऐसे महान लोगों के बीच रही जिन्होंने मुझे प्रेरित किया। उसी समर्थन ने मुझे आगे बढ़ने की हिम्मत दी।” श्रेयंका के अंदर एक आवाज़ थी जो कहती रही कि उन्हें यह खेल पसंद है और वह इसी वजह से यहाँ तक पहुँची हैं। आखिरकार, सितंबर 2025 में उन्होंने बारबाडोस रॉयल्स के लिए महिला कैरेबियन प्रीमियर लीग (WCPL) के माध्यम से वापसी की और अब पाकिस्तान के खिलाफ 64 रनों की जीत में अपने किफायती स्पैल (0/17) से सबको प्रभावित किया है।
पावरप्ले में गेंदबाजी: चुनौतियों का आनंद
मैदान पर वापसी के बाद श्रेयंका ने दिखाया है कि उनकी लय बरकरार है। हालांकि पावरप्ले में गेंदबाजी करना स्पिनर्स के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि फील्डिंग की पाबंदियां बल्लेबाजों के पक्ष में होती हैं, लेकिन श्रेयंका इसे अपनी ताकत मानती हैं। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा पावरप्ले में गेंदबाजी का आनंद लिया है। दबाव में गेंदबाजी करना अद्भुत है क्योंकि मुझे यही करना पसंद है।” उनकी यह निडरता और दबाव को झेलने की क्षमता ही उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
खेल के प्रति अटूट प्रेम
श्रेयंका पाटिल की कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो अपने करियर में असफलता या चोट के कारण हताश महसूस करते हैं। क्रिकेट के मैदान पर उनकी वापसी केवल एक विकेट लेने या गेंदबाजी करने तक सीमित नहीं है, यह उस जुनून की जीत है जो उन्हें चोटों के दर्द से बाहर खींच लाई। आज, श्रेयंका फिर से मैदान पर हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि वह अपनी इस वापसी की खुशी को कभी कम नहीं होने देंगी। भारतीय महिला क्रिकेट के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि उनकी मुख्य स्पिनर न केवल मैदान पर लौट आई है, बल्कि वह मानसिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और केंद्रित है। आने वाले मुकाबलों में, श्रेयंका पाटिल के स्पैल भारतीय टीम की जीत में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे।