भारतीय शेयर बाजार की बुधवार को सपाट शुरुआत के संकेत हैं। GIFT Nifty में मामूली गिरावट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार को राहत मिल सकती है, हालांकि विदेशी बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव चिंता बने हुए हैं।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 30 सितंबर को कारोबार की शुरुआत लगभग शून्य होने की उम्मीद है। तेल और कच्चे तेल की कीमतों में एशियाई बाजारों में हुई तेज गिरावट से घरेलू इक्विटी बाजार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव डाल सकती है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पूंजी के प्रवाह और वैश्विक संकेतों पर नजर रखेंगे। भारतीय बाजारों में मंगलवार के कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली, लेकिन बुधवार को बाजार के लिए कच्चे तेल में नरमी देखने को मिली।
Nifty के GIFT संकेत क्या हैं?
GIFT बुधवार सुबह 7:58 बजे Nifty 22,819.5 पर कारोबार कर रहा था। इसमें 10.5 अंक, यानी लगभग 0.05 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। GIFT Nifty को भारतीय बाजार के प्रारंभिक रुझान का एक महत्वपूर्ण सूचक माना जाता है। थोड़ी गिरावट से संकेत मिलता है कि घरेलू शेयर बाजार मंगलवार के बंद स्तर के आसपास शुरू हो सकता है। शुरुआती संकेत पूरे कारोबारी सत्र की दिशा नहीं बताते। बाजार खुलने के बाद वैश्विक संकेतों, संस्थागत निवेश, करेंसी परिवर्तन और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कमाई से राहत
वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, घरेलू शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। Brent क्रूड की कीमत भी गिरकर 95-96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जबकि WTI क्रूड 89-90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट उसे कई स्तरों पर राहत दे सकती है। तेल की कीमतों में वृद्धि से चालू खाता, महंगाई और भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। कीमतों में नरमी से इन दबावों को कम किया जा सकता है।
Enrich Money के प्रबंध निदेशक ने क्या कहा?
Enrich Money के CEO Ponmudi R ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में हुई तेज गिरावट ने घरेलू बाजार पर बने प्रमुख दबावों में से एक को कुछ कम किया है। उनका कहना है कि इससे शुरुआती दिनों में भारतीय इक्विटी बाजार कुछ राहत मिल सकती है। हालाँकि, उन्होंने क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति और अमेरिका-ईरान युद्ध की अनिश्चितता को खतरा बताया। भू-राजनीतिक घटनाक्रम कच्चे तेल बाजार पर तेजी से प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए निवेशक इस क्षेत्र में किसी भी नई घटना से सतर्क रह सकते हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष पर बाजार की दृष्टि
वर्तमान समय में वैश्विक बाजारों के लिए भू-राजनीतिक परिस्थिति महत्वपूर्ण है। कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट का एक और कारण उत्पादन में सुधार और सप्लाई फ्लो में सुधार होने के संकेत हैं। लेकिन अगर अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ता है या बातचीत की उम्मीदें टूटती हैं, तो ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे हालात में कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा वृद्धि और वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता हो सकती है। इसलिए बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर दोनों घरेलू संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर रहेगी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक चुनौती बन गई है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू शेयर बाजार को चिंतित करती है। अंतरराष्ट्रीय पूंजी के निरंतर बाहर निकलने से बाजार की रिकवरी पर दबाव डाला जा सकता है। इसके अलावा, उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह को अमेरिका में ऊंची Treasury yields भी प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियां जोखिम वाली परिसंपत्तियों के मुकाबले वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो सकती हैं जब अमेरिकी बॉन्ड पर आकर्षक रिटर्न मिलता है। यही कारण है कि भारतीय बाजार में तेजी को टिकाऊ बनाने के लिए विदेशी निवेशकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
मंगलवार को निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार इससे पहले मंगलवार के कारोबारी सत्र में कमजोर रहा है। Nifty 50 कारोबार के अंत में 0.28 प्रतिशत या 64.05 अंक गिरकर 22,716.20 पर बंद हुआ। BSE Sensex भी 242.65 अंक, यानी 0.33% की कमी के साथ 72,529.07 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों ने लगातार बिकवाली के बीच सतर्कता बढ़ाई है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और एशियाई बाजारों में सकारात्मक संकेत बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं।
निवेशकों को आज कौन से संकेत पसंद हैं?
निवेशकों का ध्यान बुधवार के कारोबार पर रहेगा, जिसमें कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि, अमेरिकी चालू खाते की ब्याज दरें, रुपये की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल होंगे। इसके अलावा, घरेलू बाजार की दृष्टि भी एशियाई बाजारों की चाल से प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, कच्चे तेल में गिरावट और GIFT Nifty में कुछ बदलाव बाजार के लिए कुछ संकेत दे रहे हैं। ऐसे में व्यापार के दौरान उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। वैश्विक जोखिमों के प्रति घरेलू निवेशकों और विदेशी पूंजी की प्रतिक्रिया बाजार की आगे की दिशा निर्धारित करेगी।