RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की और मौद्रिक नीति का रुख कैलिब्रेटेड टाइटनिंग किया। इसके बाद Sensex 429 अंक गिरकर 72,638 पर बंद हुआ।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 7 अक्टूबर को कारोबार का अंत गिरावट के साथ हुआ। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी किए जाने के बाद निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती वाला कर दिया। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव डाला। हालांकि, दिन के निचले स्तर से बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी लौटने से प्रमुख सूचकांकों ने अपनी शुरुआती कमजोरी को कुछ हद तक कम किया।
बुधवार के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,638.70 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स ने कारोबार की शुरुआत 72,965.38 के स्तर से की थी। दिन के दौरान यह 72,468.72 के निचले स्तर तक भी पहुंचा। हालांकि, बाद में बैंकिंग शेयरों में सुधार और निचले स्तरों पर खरीदारी के कारण सूचकांक ने लगभग 170 अंकों की रिकवरी की।
RBI के फैसले का बाजार पर असर
बुधवार के कारोबार की सबसे बड़ी घटना RBI MPC का रेपो रेट को लेकर फैसला रहा। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की। इसके साथ ही मौद्रिक नीति के रुख में भी बदलाव किया गया। बाजार के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण था क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था में कर्ज की लागत प्रभावित हो सकती है।
रेपो रेट में वृद्धि का असर बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और अन्य ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ सकता है। निवेशक इस बात का आकलन करते हैं कि ऊंची ब्याज दरों से कंपनियों की उधारी लागत और मांग पर कितना असर पड़ेगा। इसी वजह से RBI के फैसले के बाद बाजार में शुरुआती तौर पर दबाव देखने को मिला।
‘Calibrated Tightening’ से बढ़ी सतर्कता
RBI की ओर से मौद्रिक नीति के रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किए जाने को भी बाजार ने एक महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर लिया। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मौद्रिक नीति को धीरे-धीरे सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए RBI का आगे का रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर आर्थिक गतिविधियों और कंपनियों की कमाई की संभावनाओं पर पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक के इस रुख के बाद बाजार में निवेशकों ने जोखिम को लेकर सावधानी बरती।
Crude Oil Prices ने भी बढ़ाया दबाव
बाजार में गिरावट की एक अन्य बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी रही। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कंपनियों की लागत को भी प्रभावित कर सकती हैं। खासकर एविएशन, ऑटोमोबाइल, पेंट, केमिकल और अन्य ऐसे उद्योगों पर इसका असर पड़ सकता है जहां ऊर्जा या पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि बुधवार को बढ़ती तेल कीमतों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया।
बैंकिंग शेयरों ने संभाला बाजार
हालांकि बाजार दिन के दौरान एक समय काफी नीचे चला गया था, लेकिन बैंकिंग शेयरों में आई रिकवरी ने प्रमुख सूचकांकों को निचले स्तरों से उबरने में मदद की। बैंकिंग स्टॉक्स में खरीदारी लौटने के कारण सेंसेक्स ने अपने दिन के निचले स्तर से करीब 170 अंकों की रिकवरी दर्ज की।
बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन पर निवेशकों की खास नजर रहती है क्योंकि ब्याज दरों में बदलाव का सीधा संबंध बैंकिंग कारोबार से होता है। RBI के फैसले के बाद बैंक शेयरों में शुरुआती दबाव के बावजूद निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट सीमित रही।
Sensex का पूरा दिन कैसा रहा?
सेंसेक्स बुधवार को 72,965.38 के स्तर पर खुला था। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने पर यह 72,468.72 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में इसमें सुधार आया और यह 72,638.70 के स्तर पर बंद हुआ। इस तरह सेंसेक्स ने दिन के निचले स्तर से लगभग 170 अंकों की रिकवरी की, लेकिन फिर भी पिछले बंद के मुकाबले 429.11 अंक नीचे रहा।
बाजार की यह चाल बताती है कि निवेशकों ने RBI के फैसले को लेकर शुरुआती प्रतिक्रिया में सावधानी बरती, लेकिन बैंकिंग शेयरों में सुधार और निचले स्तरों पर खरीदारी से बिकवाली का दबाव कुछ कम हुआ।
आगे बाजार के लिए क्या रहेगा अहम?
अब निवेशकों की नजर RBI की नीति के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि केंद्रीय बैंक आगे कितनी सख्ती कर सकता है।
कुल मिलाकर, बुधवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव वाला रहा। Sensex में 429 अंकों की गिरावट दर्ज हुई, लेकिन दिन के निचले स्तर से हुई रिकवरी ने यह भी दिखाया कि बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी करने वाले निवेशक मौजूद हैं। आने वाले सत्रों में RBI के रुख, तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।