शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 52 अंक टूटा; कच्चे तेल की तेजी से बढ़ी चिंता

शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 52 अंक टूटा; कच्चे तेल की तेजी से बढ़ी चिंता

 

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी 52.5 अंक टूटा।

 

बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोर और सतर्क होने की उम्मीद है। भारतीय शेयर बाजार के दो सबसे बड़े सूचकांकों, निफ्टी और सेंसेक्स, के लिए कमजोर शुरुआत की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी के शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि ने बाजार को चिंतित कर दिया है। ऊर्जा आपूर्ति और प्रमुख समुद्री मार्गों पर बढ़ता जोखिम बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है, इसलिए निवेशक इस समय वैश्विक घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

गिफ्ट निफ्टी में गिरावट से कमजोर संकेत मिल गए

गिफ्ट निफ्टी बुधवार सुबह 7:39 बजे 23,661 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 52.5 अंक, यानी लगभग 0.22% की कमी दर्ज की गई। गिफ्ट निफ्टी को घरेलू बाजार की शुरुआत का सूचक मानते हैं। इसलिए इसकी कमजोरी का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भी दबाव में हो सकती है।

शुरुआती संकेत, हालांकि, पूरे कारोबारी सत्र की दिशा नहीं बताते। निवेशकों का रुख बाजार खुलने के बाद वैश्विक बाजारों की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और पश्चिम एशिया से आने वाली खबरों से प्रभावित हो सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में चौथा सत्र लगातार वृद्धि

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिलहाल बाजार की सबसे बड़ी चिंता हैं। तेल की कीमतें लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़ी हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति की चिंता बढ़ा दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है।

ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.6 प्रतिशत बढ़कर प्रति बैरल 1.57 डॉलर पहुंच गई। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 94.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई और 1.60 डॉलर यानी 1.72 प्रतिशत की तेजी रही।

अगस्त की शुरुआत से ब्रेंट क्रूड लगभग 25 प्रतिशत बढ़ा है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि ब्रेंट क्रूड अगस्त की शुरुआत से अब तक लगभग 25 प्रतिशत बढ़ गया है, जो कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी का कारण है। तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर किसी स्थायी समाधान की उम्मीद कमजोर हो गई है।

तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहने पर देशों और कंपनियों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है जो कच्चे तेल पर निर्भर हैं। भारत भी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बहुत सारा कच्चे तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेज वृद्धि से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों के खर्चों पर असर पड़ने की आशंका है।

ईरान-अमेरिका संघर्ष ने चिंता बढ़ा दी

निवेशकों की चिंता बढ़ी है क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव है। ताजा घटनाक्रम में ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्ति पर हमले की खबरों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा की है। इसके जवाब में अमेरिका ने भी सैन्य कार्रवाई बढ़ा दी है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 8 सितंबर को पांच ईरानी कच्चे तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वॉशिंगटन ईरानी तेल टैंकरों पर कार्रवाई जारी रख सकता है अगर अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमले होते हैं।

ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का प्रभाव सिर्फ तेल की कीमतों पर नहीं है। प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों की सुरक्षा भी निवेशकों को चिंतित करती है। पश्चिम एशिया से दुनिया के कई हिस्सों में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा सामग्री की आपूर्ति महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होती है। किसी भी तरह का व्यवधान इन मार्गों पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों को और ऊपर ले जा सकता है।

इसलिए निवेशक अंतरराष्ट्रीय बाजार में जोखिम बढ़ने पर सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर भी देख सकते हैं। उभरते बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार इससे प्रभावित हो सकता है।

भारतीय बाजार के लिए भविष्य में क्या महत्वपूर्ण रहेगा?

बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर सबसे पहले सेंसेक्स और निफ्टी की प्रारंभिक चाल पर रहेगी। इसके अलावा रुपये की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री और पश्चिम एशिया से जुड़ी नई खबरें बाजार की दिशा को प्रभावित करेंगे।

तेल की बढ़ती कीमतों ने विमानन, परिवहन, रसायन और अन्य क्षेत्रों पर दबाव डाला हो सकता है। ऊंची कीमतें, दूसरी ओर, कुछ तेल और गैस कंपनियों के शेयरों को बढ़ावा दे सकती हैं। ऐसे में बाजार में क्षेत्रीय बदलाव हो सकता है।

कुल मिलाकर, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार शुरू होने की संभावना है सतर्क। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और गिफ्ट निफ्टी में कमजोरी ने निवेशकों के सामने नए अवसर पैदा कर दिए हैं। बाजार में अस्थिरता भी बढ़ सकती है अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव जारी रहता है। ऐसे हालात में निवेशक तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर विशेष ध्यान देंगे।

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