शेयर बाजार में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों से सेंसेक्स 1,695 अंक उछला।
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उत्साह का माहौल रहा और प्रमुख सूचकांकों ने जोरदार बढ़त के साथ कारोबार बंद किया। इस तेजी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर जोखिम धारणा (risk sentiment) में आया सुधार था। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच एक संभावित राजनयिक समाधान की खबरों ने पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के डर को काफी कम कर दिया है, जिसका सकारात्मक असर दुनिया भर के बाजारों पर दिखा।
सेंसेक्स और निफ्टी की ऐतिहासिक उड़ान
बंबई शेयर बाजार (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स शुक्रवार को 1,695 अंक या 2.30% उछलकर 75,528 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 461 अंक या 1.99% की मजबूती के साथ 23,623 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,608 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 23,645 तक पहुंचा। यह तेजी किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता सामान (consumer-oriented) शेयरों ने इसमें प्रमुख भूमिका निभाई। बाजार में सकारात्मक रुख का आलम यह था कि खरीदारी का व्यापक असर सभी क्षेत्रों में देखने को मिला।
शांति समझौते की उम्मीद बनी तेजी का बड़ा कारण
बाजार में इस रिकवरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौता है। हाल के हफ्तों में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को काफी अस्थिर कर रखा था, लेकिन राजनयिक समाधान और प्रतिबंधों को हटाने की संभावनाओं ने भू-राजनीतिक चिंताओं को कम कर दिया है।
इक्विरेस वेल्थ के एमडी और बिजनेस हेड अंकुर पुंज के अनुसार, “अमेरिका और ईरान के बीच अगले कुछ दिनों में शांति समाधान की संभावना ने बाजार में भारी रैली को प्रेरित किया है। इससे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। मजबूत वैश्विक रिकवरी ने व्यापक खरीदारी को बढ़ावा दिया है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये में हुई जोरदार रिकवरी ने भी बाजार के मूड को बेहतर बनाया है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन शांति वार्ता के संकेत भू-राजनीतिक जोखिमों को काफी कम करते हैं, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ
घरेलू बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट एक बड़ा सकारात्मक मोड़ साबित हुई है। तेल की कीमतें कम होने से भारत में मुद्रास्फीति (inflation) का दबाव कम होने की उम्मीद है। इसका सीधा असर देश के चालू खाता घाटे (current account position) पर पड़ेगा और विभिन्न क्षेत्रों में कॉर्पोरेट मुनाफे को भी मजबूती मिलेगी।
शुक्रवार के सत्र में ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स 2.37% गिरकर 88.24 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में भी 2.18% की गिरावट दर्ज की गई और यह 85.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी की तरह है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शांति प्रक्रिया स्थिर रहती है, तो आने वाले सत्रों में बाजार का रुख सकारात्मक रह सकता है। हालांकि, निवेशकों को अब भी वैश्विक घटनाक्रमों और मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा पर बारीकी से नजर रखने की सलाह दी जा रही है। भारतीय बाजार में लिक्विडिटी का प्रवाह और कॉर्पोरेट आय में सुधार निवेशकों को निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
बाजार की यह तेजी दर्शाती है कि जब भू-राजनीतिक बाधाएं दूर होती हैं, तो भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल आधार (fundamentals) कितना मजबूत है। रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में आई यह तेजी विशेष रूप से मांग में सुधार का संकेत दे रही है। आने वाले सप्ताह में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विदेशी निवेशक इस माहौल का लाभ उठाकर अपनी स्थिति को और मजबूत करते हैं या नहीं। फिलहाल, बाजार ने राहत की सांस ली है और निवेशकों में विश्वास का संचार हुआ है।