Shardiya Navratri : माता दुर्गा की डोली पर चढ़ना क्यों अशुभ माना जाता है?

Shardiya NavratShardiya Navratri : 3 या 4 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि कShardiya Navratri : 3 या 4 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि कShardiya Navratri : 3 या 4 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि कब से शुरू होगी? जानें सही दिनब से शुरू होगी? जानें सही दिनब से शुरू होगी? जानें सही दिनri : माता दुर्गा की डोली पर चढ़ना क्यों अशुभ माना जाता है?

Shardiya Navratri 3 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि शुरू होगी।

 

Shardiya Navratri, हिन्दू धर्म में हर साल चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, लेकिन शारदीय नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है। 3 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि शुरू होगी। ऐसा माना जाता है कि माता दुर्गा हर साल एक अलग तरह का वाहन चलाती है। जिस वाहन पर माता दुर्गा सवार होती है, उसका देश और विश्व पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष माता किस यात्रा पर जाएगी और इसका क्या असर होगा?

Shardiya Navratri, शारदीय नवरात्रि हिन्दू पंचांग के आश्विन महीने में मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि इस बार 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस बार बृहस्पतिवार से नवरात्रि शुरू होने के कारण माता डोली में बैठकर आएगी। हम जानते हैं कि डोली पर बैठकर आने से देश और दुनिया पर क्या बुरा असर होगा?

Hindu शास्त्रों में बताया गया है कि माता दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर आएगी। माता सोमवार या रविवार को नवरात्रि से पहले हाथी पर सवार होकर आती है। यदि नवरात्रि बुधवार से शुरू होती है, तो माता नाव पर सवार होकर आती है। शनिवार या मंगलवार को घटस्थापना होने पर माता घोड़ा पर सवार होकर आती है। जबकि माता बृहस्पतिवार या शुक्रवार को नवरात्रि शुरू होने पार डोली या पालकी पर बैठकर आती है।

माता की सवारी इस बार क्या होगी?
2024 में शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर, बृहस्पतिवार से शुरू होगी। इसलिए माता इस बार डोली पर बैठकर आ जाएगी।

क्या प्रभाव होगा?
धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि माता दुर्गा डोली पर सवार होकर आती है तो इसका देश पर बुरा प्रभाव पड़ता है। माता का डोली पर सवार होकर आना विश्वयुद्ध का कारण बन सकता है। इसकी वजह से लोग हिंसक हो सकते हैं। माता के डोली पर आने से भी महामारी दुनिया भर में फैलने का खतरा बना रहता है। माता के डोली में आने से भी लोगों का स्वास्थ्य खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। डोली के आगमन से कई देशों में अराजकता फैल गई है और हिंसा की आशंका बनी रहती है।

जाने का वाहन कैसे चुना जाता है?

धर्मशास्त्र कहता है कि माता जिस कार में आती है, उसी कार में वापस नहीं जाती। माता के जाने का वाहन, उसके आगमन की तरह ही तय होता है। रविवार या सोमवार को नवरात्रि का अंतिम दिन होता है, तो माता भैंसे पर सवार होकर जाती है। माता के भैंसे पर जाना आम तौर पर अशुभ है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, भैंसे पर वापस जाने से देश-दुनिया में बीमारी बढ़ती है। यदि माता बुधवार या शुक्रवार को वापस जाती है, तो उनकी सवारी हाथी होगी। जब माता हाथी पर सवार हो जाती है, तो बारिश और बाढ़ का खतरा बना रहता है। जबकि शनिवार या मंगलवार को माता वापस जाती है। माता के मुर्गे पर वापस जाने से लोगों का दर्द बढ़ता है। गुरुवार को माता मनुष्य की सवारी वापस जाती है। माता का मनुष्य पर वापस आना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि माता मनुष्य की सवारी कर वापस जाती है तो सुख और शांति में वृद्धि होती है। नवरात्रि इस बार शनिवार, 12 अक्टूबर को समाप्त होगी। इसलिए माता को इस बार वापस ले जाने का रास्ता मुर्गा होगा।

विवरण: यहां दी गई जानकारी केवल जानकारी के लिए है और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। News24 ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

 

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