Shaligram Puja 2025: शालिग्राम शिला की पूजा का महत्व, लाभ और पूजा विधि जानें

Shaligram Puja 2025: शालिग्राम शिला की पूजा का महत्व, लाभ और पूजा विधि जानें

Shaligram Puja 2025: जानें शालिग्राम शिला की पूजा विधि, धार्मिक महत्व और इससे मिलने वाले पुण्य और लाभ। जानिए किन शिलाओं की पूजा करनी चाहिए और किनसे बचें।

Shaligram Puja 2025: शालिग्राम शिला को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का जीवंत प्रतीक माना गया है। पद्म पुराण और अन्य ग्रंथों में इसकी पूजा का महत्व हजारों वर्षों से वर्णित है। कहते हैं कि शालिग्राम का पूजन करोड़ों यज्ञों और कोटि गोदान के बराबर पुण्य प्रदान करता है। जानिए शालिग्राम की पूजा क्यों की जाती है, कैसे करें पूजन, और क्या होते हैं इसके आध्यात्मिक लाभ।

शालिग्राम शिला क्या है?

शालिग्राम शिला एक प्राकृतिक पवित्र पत्थर है जो केवल नेपाल की गंडकी नदी में पाया जाता है। ये काले, चिकने, अंडाकार आकार के होते हैं जिन पर प्राकृतिक रूप से शंख, चक्र, गदा और पद्म जैसे भगवान विष्णु के चिन्ह अंकित होते हैं।

Shaligram Puja का धार्मिक महत्व

  • पद्म पुराण के अनुसार, शालिग्राम का दर्शन, स्नान और पूजन करने से करोड़ों यज्ञों जितना पुण्य प्राप्त होता है।

  • भगवान शिव ने कहा है कि जितना पुण्य कोटि शिवलिंगों की पूजा से मिलता है, उतना एक शालिग्राम के पूजन से मिल सकता है।

  • जहां शालिग्राम और तुलसी एक साथ पूजित होते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है, और वहां लक्ष्मी-नारायण की कृपा सदैव बनी रहती है।

शालिग्राम पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।

  2. शालिग्राम शिला को गंगाजल या स्वच्छ जल से स्नान कराएं।

  3. तुलसी दल, चंदन, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें।

  4. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

  5. भोग लगाकर आरती करें और तुलसी के साथ शंख की पूजा करें।

शालिग्राम की सही पहचान कैसे करें?

पूजन योग्य शालिग्राम शिलाएं:

  • छत्राकार शिला: राज्य सुख प्रदान करती है।

  • वर्तुलाकार शिला: धन-संपत्ति और ऐश्वर्य देती है।

अपूजन योग्य शिलाएं:

  • विकृत, फटी हुई, पिली या टूटी चक्र वाली शिलाएं।

  • तीखी, शकटाकार, या दरार वाली शिलाएं घर में दरिद्रता और रोग लाती हैं।

शालिग्राम पूजन के लाभ

  • पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति।

  • घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास।

  • सभी मांगलिक कार्यों में सफलता और मानसिक शांति।

  • स्थान तीर्थ तुल्य बन जाता है।

शालिग्राम पूजा से जुड़ी विशेष बातें

  • यह पूजन केवल पर्वों तक सीमित नहीं है — प्रतिदिन पूजन से निरंतर लाभ मिलता है।

  • जलाभिषेक, दीपदान, तुलसीदल अर्पण जैसे सरल कार्य भी अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

  • भगवान श्रीहरि ऐसे स्थान को अपना निवास स्थल मानते हैं जहाँ नियमित शालिग्राम पूजा होती है।

For more news: Religion

Related posts

वास्तु शास्त्र: सीढ़ियों के नीचे की जगह का वास्तु: घर की सुख-समृद्धि के लिए क्या रखें और क्या नहीं?

आज का लव राशिफल 22 जून 2026: इन राशियों की लव लाइफ में आएगा सुखद बदलाव, जानें क्या कहते हैं सितारे

गायत्री जयंती 2026: कब है शुभ मुहूर्त और क्या है पूजा की सही विधि? जानें विस्तार से

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More