शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत हुई। सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी 23,250 के नीचे आ गया। महंगा कच्चा तेल और पश्चिम एशिया तनाव प्रमुख कारण रहे।
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। निवेशकों की चिंता वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से बढ़ी है। शुरुआत में व्यापक बिकवाली के चलते, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 23,250 से नीचे फिसल गया। बाजार के लगभग सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दबाव देखा गया। भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की बिक्री हुई।
Sensex 700 अंक से अधिक गिरा
BSE Sensex सुबह 9:18 बजे 74,200.96 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स 701.63 अंक, यानी 0.94 प्रतिशत गिर गया। NSE Nifty, दूसरी ओर, 23,237.75 के स्तर पर था और 239.05 अंक, यानी 1.02 प्रतिशत की कमजोरी दिखाई दी। शुरुआत में निवेशकों की चौतरफा बिकवाली ने बाजार पर दबाव डाला।
न केवल बड़े शेयरों में गिरावट हुई, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट हुई। Nifty Midcap 100 1.28 प्रतिशत और Nifty Smallcap 100 1.22 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे, जबकि Nifty Next 50 में लगभग 1.45 प्रतिशत की कमजोरी रही। इससे स्पष्ट है कि बिकवाली का व्यापक दबाव बाजार पर बना हुआ है।
कच्चे तेल की तेजी से वृद्धि प्रमुख चिंता है
माना जाता है कि शुक्रवार को भारतीय बाजार में हुई गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में हुआ तेज उछाल था। Brent क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और लाल सागर और समुद्री सीमा के आसपास आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।
भारत का बहुत सा कच्चा तेल आयात होता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की लागत बढ़ने से देश का आयात खर्च बढ़ सकता है। महंगाई पर दबाव बढ़ने के साथ, इससे कंपनियों के खर्च और मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। ऐसी कंपनियां, जिनकी लागत में ईंधन और परिवहन का बड़ा हिस्सा है, महंगा क्रूड को लेकर चिंतित हो सकते हैं।
रुपये पर दबाव भी बढ़ा
भारतीय रुपया भी कच्चे तेल की तेजी से प्रभावित हुआ। शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे कमजोर होकर 95.70 पर खुला, जो पिछले कारोबारी सत्र में 95.52 के स्तर पर था।
डॉलर की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है। कमजोर रुपया कच्चे तेल के आयात की बड़ी आवश्यकता को देखते हुए भारत के लिए अधिक चुनौती पैदा कर सकता है। इससे चालू खाते पर दबाव और महंगाई के कारण निवेशकों की चिंता भी बढ़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारी बिक्री
भारतीय शेयर बाजार में हुई गिरावट केवल घरेलू बाजार में नहीं हुई है। शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भी बिकवाली हुई। दक्षिण कोरिया का Kospi लगभग 2.7 प्रतिशत और जापान का Nikkei लगभग 2.6 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था।
अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को गिरावट से बंद हुए थे। निवेशकों को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और उससे होने वाली महंगाई पर चिंता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोखिम से बचने की बढ़ती प्रवृत्ति का भी असर उभरते बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लगभग 5%
तेल की बढ़ती कीमतों ने विश्वव्यापी महंगाई की चिंता फिर से बढ़ा दी है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के आसपास पहुंच गया है। शुक्रवार को बेंचमार्क 10 वर्ष ट्रेजरी यील्ड 2 बेसिस प्वाइंट 4.9708 प्रतिशत हो गया, जो लगभग तीन साल का उच्च स्तर है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 30 वर्ष की उम्र में 5.3803 प्रतिशत के 19 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। डॉलर आधारित फिक्स्ड इनकम निवेश अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से अधिक आकर्षक हो सकते हैं, क्योंकि उभरते बाजारों की इक्विटी से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। ऊंची यील्ड भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में गिरावट की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी जारी है
FPIs, या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों, की बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाती है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 438 करोड़ रुपये निकाले। सितंबर तक उनकी बिक्री करीब 1.36 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।
सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है। वैश्विक जोखिम बढ़ने पर विदेशी निवेशक अक्सर उभरते बाजारों में अपना निवेश कम कर सकते हैं।
खनिज और संपत्ति शेयरों पर सबसे अधिक दबाव है
शुक्रवार को घरेलू बाजार में गिरावट का कोई एक क्षेत्र नहीं था। Metal, Realty, Financial Services, Cars और Consumable Durable शेयरों पर विशेष दबाव था। शुरूआती कारोबार में Nifty Metal index लगभग 3 प्रतिशत नीचे था, जबकि Nifty Realty index में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट हुई थी।
प्रमुख बाजार सूचकांकों की गिरावट को बिकवाली ने बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी बढ़ा दिया। वर्तमान बाजार परिस्थितियों में निवेशकों को जोखिम वाले शेयरों में अधिक सावधानी दिखाई देती है।
IT उद्योग पर H-1B वीजा दबाव
हाल ही में आईटी शेयरों में हुई गिरावट बहुत कम रही, लेकिन इस क्षेत्र के सामने एक अलग तरह की चुनौती बनी हुई है। भारत की आईटी कंपनियों ने अमेरिका की ओर से H-1B वीजा धारकों के लिए 60 दिन की ग्रेस अवधि हटाने के प्रस्ताव को लेकर अधिक चिंता व्यक्त की है।
भारतीय आईटी कंपनियों को अमेरिकी बाजार पर बड़ी निर्भरता है, इसलिए वीजा नियमों में बदलाव लागत और कर्मचारियों की आवाजाही से जुड़ी चुनौतियों को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कच्चे तेल की बिकवाली, वैश्विक बाजारों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने आईटी शेयरों पर और अधिक दबाव डाला है।
कुल मिलाकर, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बहुत कमजोर रही। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपया, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा को बदल दिया है। वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों का ध्यान आने वाले कारोबार पर रहेगा।