सेबी SME लिस्टिंग के मौजूदा नियमों की व्यापक समीक्षा करने की तैयारी में है। ट्रेडिंग, Odd Lots, मार्केट मेकिंग, अंडरराइटिंग, माइग्रेशन और लागत जैसे मुद्दे समीक्षा के दायरे में हैं।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) कंपनियों की सूची से जुड़े मौजूदा नियमों की गहन समीक्षा करने जा रहा है। पूंजी बाजार नियामक ने SME प्लेटफॉर्म से जुड़े कई मुद्दों की पहचान की है जो निवेशकों के लिए शेयरों की ट्रेडिंग और कंपनियों की वृद्धि पर पड़ सकते हैं। इनमें ट्रेडिंग प्रणाली, मार्केट मेकिंग, अंडरराइटिंग, छोटे व्यवसायों से बड़े बोर्ड पर माइग्रेशन और सूचीकरण से जुड़े खर्च शामिल हैं। मुंबई में 23वीं FICCI Capital Markets Conference 2026 के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि कुछ मौजूदा SME फ्रेमवर्क नियम प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कंपनियों के विकास को सीमित कर सकते हैं।
कंपनियों की वृद्धि पर प्रभाव की चिंता
सेबी चेयरमैन ने कहा कि छोटे व्यवसाय (SME) प्लेटफॉर्म के मौजूदा नियमों में कुछ प्रावधान हैं जो कंपनियों को बढ़ाने में बाधा डाल रहे हैं। उनका संकेत था कि नियामक मौजूदा व्यवस्था को अधिक कारगर और उपयोगी बनाने की योजना बना रहा है। SME प्लेटफॉर्म का लक्ष्य छोटे और मध्यम उद्यमों को पूंजी बाजार के माध्यम से धन जुटाने का मौका देना है। ऐसे में, लिस्टिंग के बाद कंपनियों को कारोबार बढ़ाने या शेयरों में पर्याप्त ट्रेडिंग करने में बाधा आती है, तो इससे पूरे SME बाजार की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है।
ट्रैडिंग से जुड़ी समस्याएं बड़ी चिंता का विषय बन गईं।
सेबी ने SME प्लेटफॉर्म पर शेयरों की ट्रेडिंग को भी चिंता जताई है। निवेशकों को कुछ SME शेयरों में ट्रेडिंग करना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। शेयरों की अजीब संख्या में बदलाव इसका एक बड़ा कारण है। सेबी चेयरमैन ने कहा कि अजीब लॉट होने से बहुत से निवेशक अपने पास मौजूद SME शेयरों को खरीद या बेच नहीं पा रहे हैं। निवेशकों को शेयर खरीदने के बाद उन्हें बेचने में कठिनाई होना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, न सिर्फ बाजार की liquidity बल्कि निवेशक के अनुभव के कारण।
Odd Lots में निवेशकों को मुसीबत
जब शेयरों की संख्या सामान्य ट्रेडिंग लॉट के अनुरूप नहीं होती, तो एक odd lot कहलाता है। ऐसी स्थिति SME बाजार में आने पर निवेशकों के लिए शेयर खरीद-बिक्री मुश्किल हो सकती है। सेबी के चेयरमैन ने कहा कि कुछ निवेशक ऐसे शेयरों में फंस जाते हैं और उनके लिए ट्रेडिंग करना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या का समाधान छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) बाजार में liquidity को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
मार्केट मेकिंग प्रणाली भी समीक्षा के अधीन हैं
समीक्षा में SME प्लेटफॉर्म पर मार्केट मेकिंग प्रणाली भी शामिल है। शेयरों की खरीद और बिक्री में मदद करना मार्केट मेकर का काम है। मार्केट मेकिंग व्यवस्था निवेशकों के लिए ट्रेडिंग को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है अगर किसी SME शेयर में पर्याप्त विक्रेता और खरीददार नहीं हैं। अब सेबी मौजूदा व्यवस्था की उपयोगिता और सुधार के उपायों को जांचना चाहता है।
अंडरराइटिंग और माइग्रेशन भी देखें
साथ ही, SME प्लेटफॉर्म से मेन बोर्ड पर माइग्रेशन से जुड़े नियमों और SME कंपनियों की अंडरराइटिंग व्यवस्था की नियामक समीक्षा कर रही है। KSME प्लेटफॉर्म से बड़े बाजार में जाने की प्रक्रिया किसी कंपनी के विकास का महत्वपूर्ण चरण हो सकती है। ऐसे में, माइग्रेशन के नियम पर्याप्त स्पष्ट और उपयोगी होना चाहिए। दूसरी ओर, अंडरराइटिंग से जुड़ी व्यवस्था भी छोटे-छोटे उद्यमों (SME) के लिए धन जुटाने में महत्वपूर्ण है। यह दोनों क्षेत्रों में बदलाव करने का लक्ष्य निवेशकों और कंपनियों के हितों को बेहतर संतुलित करना हो सकता है।
SME प्लेटफॉर्म की लागत भी एक प्रमुख मुद्दा है
SME प्लेटफॉर्म से जुड़ी लागत भी समीक्षा में शामिल हैं। पूंजी बाजार में सूचीबद्ध होना और फिर नियामकीय अनुपालन करना महंगा हो सकता है छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए। छोटी कंपनियां सार्वजनिक बाजार में आने से हिचक सकती हैं अगर खर्च बहुत अधिक होता है। सेबी की समीक्षा का एक और उद्देश्य हो सकता है कि छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) के लिए बाजार में प्रवेश करने और लिस्टेड रहने की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए, जबकि निवेशकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक नियमों का पालन किया जाए।
निवेशकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है
SME कंपनियों में निवेश करना जोखिमपूर्ण भी होता है। यह कंपनियां बड़े कॉरपोरेटों की तुलना में छोटी हो सकती हैं और उनके शेयरों में कम नकदी हो सकती है। यही कारण है कि नियामकीय ढांचे में किसी भी बदलाव के दौरान निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण होगा। सेबी को पूंजी जुटाने और कंपनियों को विकसित करने की क्षमता बढ़ाना होगा, साथ ही बाजार में पारदर्शिता और उचित ट्रेडिंग सुनिश्चित करना होगा।
SME बाजार को मजबूत करने का प्रयास
भारतीय पूंजी बाजार में छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) के लिए SME प्लेटफॉर्म एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है। इससे सार्वजनिक बाजार से पूंजी जुटाने का अवसर ऐसी कंपनियों को मिलता है जो बड़े मेन बोर्ड की आवश्यकताओं को पूरा करने की स्थिति में नहीं होतीं। किसी भी बाजार के विस्तार से नई चुनौतियां पैदा होती हैं। इसी बदलती जरूरत में ट्रेडिंग में दिक्कत, अनियमित खंडों, liquidity, मार्केट मेकिंग, लागत और माइग्रेशन जैसे मुद्दों की समीक्षा शामिल है।
भविष्य में क्या हो सकता है?
सेबी की व्यापक समीक्षा के बाद SME लिस्टिंग व्यवस्था में बदलाव हो सकते हैं, हालांकि अभी किसी विशिष्ट नियम में बदलाव की अंतिम घोषणा नहीं हुई है। नियामक का ध्यान ऐसा ढांचा बनाने पर हो सकता है जो SME कंपनियों को बढ़ने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता देता है और निवेशकों को बेहतर ट्रेडिंग सुविधाएं और सुरक्षा देता है। SME प्लेटफॉर्म की liquidity, ग्रोथ और निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है यदि मौजूदा समस्याओं का व्यावहारिक समाधान मिलता है। हालाँकि, बाजार का ध्यान इस बात पर रहेगा कि सेबी अपनी समीक्षा के बाद किन नियमों में बदलाव करता है और उनका SME कंपनियों और निवेशकों पर क्या असर होगा।