सर्व पितृ अमावस्या 2026: 10 अक्टूबर को जरूर करें ये 5 उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

सर्व पितृ अमावस्या 2026: 10 अक्टूबर को जरूर करें ये 5 उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

 

सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। जानें इस दिन तर्पण, दीपक, अन्न दान और मंत्र जाप समेत कौन से उपाय करने से पितरों की कृपा प्राप्त हो सकती है।

पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों का स्मरण करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान तथा दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। पितृपक्ष की समाप्ति आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होती है। इस अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या, पितृ अमावस्या और महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश पितृपक्ष में न हो पाया हो। साल 2026 में सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन श्राद्ध और तर्पण के साथ कुछ विशेष धार्मिक उपाय करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

मंत्रों का करें जाप

सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण करते हुए मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और पितरों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता की भावना मजबूत होती है। इस दिन शांत मन से पितरों का ध्यान करके ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा ‘ॐ श्री सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेशं हं हं सुख शान्तिं देहि फट् स्वाहा’ मंत्र का जाप भी किया जाता है। ‘ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।’ मंत्र का जाप भी पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का एक माध्यम माना जाता है। अगर संभव हो तो इस दिन पितृ चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।

पितरों के निमित्त करें तर्पण

सर्व पितृ अमावस्या के दिन तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। तर्पण के जरिए पितरों को श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करना चाहिए। तर्पण के जल में काले तिल, कच्चा दूध, कुश और अक्षत मिलाने की परंपरा है। इसके बाद श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित किया जाता है। मान्यता के अनुसार, तर्पण करते समय अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच से जल अर्पित करना चाहिए। इस स्थान को पितृ तीर्थ कहा जाता है। तर्पण के दौरान व्यक्ति को अपने पितरों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।

पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक

हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के वृक्ष में देवताओं के साथ पितरों का वास भी माना जाता है। इसलिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना और उसकी जड़ में जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करने के बाद उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाया जा सकता है। दीपक जलाते समय अपने पितरों का स्मरण करना चाहिए और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

अन्न का दान करें

सर्व पितृ अमावस्या पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण करते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न, भोजन और अपनी सामर्थ्य के अनुसार आवश्यक वस्तुओं का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने से पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट होती है। इसके अलावा गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भी अन्न निकालने की परंपरा है। विशेष रूप से कौवे को पितरों का प्रतीक मानकर भोजन कराने की मान्यता कई स्थानों पर प्रचलित है। इस दिन किया गया दान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सेवा और परोपकार की भावना से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

घर की दक्षिण दिशा में जलाएं चौमुखी दीपक

दक्षिण दिशा को हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितरों की दिशा माना जाता है। इसलिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। शाम के समय साफ-सफाई करने के बाद दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर पितरों का स्मरण किया जा सकता है। दीपक जलाते समय व्यक्ति को अपने पितरों से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगनी चाहिए और परिवार पर उनका आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और पितरों की कृपा प्राप्त हो सकती है।

श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करें उपाय

सर्व पितृ अमावस्या पर जरूरी नहीं कि व्यक्ति सभी उपाय कर पाए। धार्मिक कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भावना को माना जाता है। यदि किसी कारण से आप सभी उपाय नहीं कर सकते तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार इनमें से कोई एक उपाय जरूर कर सकते हैं। पितरों का स्मरण करके तर्पण करना, जरूरतमंद को भोजन कराना, अन्न का दान करना या दीपक जलाकर प्रार्थना करना भी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम हो सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए ऐसे कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

Related posts

Navratri 2026: 16 अक्टूबर को करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें आरती, मंत्र और भोग

Vastu Tips: घर में सुख-शांति और सकारात्मकता के लिए अपनाएं वास्तु के 7 आसान नियम

Navratri 2026: नवरात्रि की पंचमी पर करें मां स्कंदमाता की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, विधि और भोग

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More