संजू सैमसन ने बताया हार का दर्द, बोले- 56 रन बनाकर भी खुश नहीं हूं, टीम इंडिया को जीत दिलाना चाहता था

संजू सैमसन ने बताया हार का दर्द, बोले- 56 रन बनाकर भी खुश नहीं हूं, टीम इंडिया को जीत दिलाना चाहता था

 

वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 में 24 रन से हार के बाद संजू सैमसन ने निराशा जाहिर की। 23 गेंदों पर 56 रन बनाने वाले संजू ने शाई होप की शतकीय पारी, भारतीय बल्लेबाजी की कमजोरियों और 248 रन के लक्ष्य का पीछा करने की चुनौती पर बात की।

भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मिली हार से निराश हैं। हैदराबाद में खेले गए इस मुकाबले में संजू ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए महज 23 गेंदों पर 56 रन बनाए, लेकिन उनकी आक्रामक पारी भी टीम इंडिया को जीत नहीं दिला सकी। भारतीय टीम 248 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए निर्धारित पारी के आखिरी ओवर में 223 रन पर ऑलआउट हो गई और मुकाबला 24 रन से हार गई। इस हार के साथ ही पांच मैचों की टी20 सीरीज 2-2 से बराबर हो गई। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजू सैमसन ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा होने के बावजूद हारने वाली टीम का हिस्सा होना अलग तरह का एहसास है। उन्होंने साफ किया कि उनका योगदान टीम की जीत में काम आता, तो उन्हें ज्यादा खुशी होती।

शानदार अर्धशतक के बावजूद संजू सैमसन निराश

संजू सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 में भारतीय पारी को तेज शुरुआत दिलाने की कोशिश की। उन्होंने 23 गेंदों पर 56 रन बनाकर अपने आक्रामक इरादे जाहिर किए। संजू ने अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 60 रनों की साझेदारी की, जिससे भारत को लक्ष्य का पीछा करने की अच्छी शुरुआत मिली। हालांकि, संजू के आउट होने के बाद भारतीय पारी लड़खड़ा गई और टीम ने जल्दी-जल्दी विकेट गंवा दिए।
मैच के बाद संजू ने कहा कि हारने वाली टीम में शामिल होने पर भावनाएं अलग होती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि वह इस समय काफी निराश हैं, क्योंकि वह अपनी पारी को टीम की जीत के साथ जोड़ना चाहते थे। संजू के मुताबिक, बल्लेबाजी के दौरान उन्होंने अपने स्वाभाविक खेल पर भरोसा किया। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय ज्यादा सोचने के बजाय अपने इरादों और आक्रामक बल्लेबाजी पर भरोसा करना जरूरी था। उन्होंने कहा कि वह मैदान पर बल्लेबाजी का आनंद ले रहे थे, लेकिन अंत में टीम को जीत नहीं दिला पाने का उन्हें दुख है।

248 रन के लक्ष्य ने बढ़ाई टीम इंडिया की मुश्किल

वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों के सामने 248 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। टीम के बल्लेबाज शाई होप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। उनकी पारी ने वेस्टइंडीज को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, भारतीय बल्लेबाजों के लिए इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करना लगातार मुश्किल होता गया।

भारत की ओर से संजू और अभिषेक शर्मा ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन संजू के आउट होते ही टीम पर दबाव बढ़ने लगा। भारतीय टीम जल्द ही 67 रन पर दो विकेट गंवा चुकी थी। इसके बाद विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा और 12वें ओवर में भारत का स्कोर 130 रन पर पांच विकेट हो गया। इस स्थिति में टीम को जीत के लिए तेजी से रन बनाने की जरूरत थी, लेकिन लगातार विकेट गिरने के कारण लक्ष्य और मुश्किल होता चला गया।
संजू सैमसन ने भी माना कि 250 रनों के आसपास के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम को पारी संभालने वाले बल्लेबाज की जरूरत थी। उनके मुताबिक, वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने अपनी पारी को अच्छी तरह संभाला, जबकि भारत ऐसा करने में नाकाम रहा।

शाई होप की पारी ने भारत को बैकफुट पर धकेला

वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाया। उनकी नाबाद शतकीय पारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। संजू सैमसन ने भी होप की बल्लेबाजी की तारीफ की और माना कि उन्होंने पूरे 20 ओवर तक पारी को संभालकर रखा।

संजू के अनुसार, जब कोई टीम 250 रनों के लक्ष्य का पीछा करती है, तो बल्लेबाजों को शुरुआत से ही तेज गति से रन बनाने पड़ते हैं। लेकिन इस दौरान पारी को संभालना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। भारतीय टीम की सबसे बड़ी समस्या यही रही कि वह तेजी से रन बनाने की कोशिश में लगातार विकेट गंवाती गई। संजू ने स्वीकार किया कि भारत की ओर से कोई भी बल्लेबाज लंबे समय तक क्रीज पर टिककर पारी को आगे नहीं बढ़ा सका।
वेस्टइंडीज की तरफ से कीमो पॉल ने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन किया और पांच विकेट हासिल किए। उनकी प्रभावशाली गेंदबाजी ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम को बड़ा झटका दिया और टीम को लक्ष्य तक पहुंचने से रोक दिया।
तिलक वर्मा और नितीश रेड्डी से थीं उम्मीदें

भारत की पारी के दौरान तिलक वर्मा और नितीश कुमार रेड्डी ने मुकाबले में वापसी की उम्मीद जगाई। दोनों बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में रन बनाए और रन गति को बनाए रखने की कोशिश की। संजू सैमसन का मानना था कि जब तक तिलक और रेड्डी क्रीज पर थे, तब तक भारतीय टीम मुकाबले में बनी हुई थी।

उन्होंने कहा कि उस समय भारत को हर ओवर में लगभग 13 रन बनाने की जरूरत थी, लेकिन उन्हें लग रहा था कि टीम अभी भी मैच जीत सकती है। हालांकि, तिलक वर्मा के आउट होने के बाद भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। इसके बाद टीम के लिए जरूरी रन गति बनाए रखना और कठिन हो गया।

सीरीज में 2-2 की बराबरी, अब निर्णायक मुकाबले पर नजर

चौथे टी20 में जीत हासिल कर वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की सीरीज को 2-2 से बराबर कर दिया है। इससे सीरीज का आखिरी मुकाबला निर्णायक बन गया है। भारतीय टीम के शीर्ष क्रम से इस मैच में काफी उम्मीदें थीं। अभिषेक शर्मा और ईशान किशन जैसे बल्लेबाजों के साथ कप्तान श्रेयस अय्यर पर भी बड़ी पारी खेलने की जिम्मेदारी थी। श्रेयस ने पिछले मुकाबले में शतक लगाया था, लेकिन चौथे मैच में भारत को उनकी ओर से अपेक्षित प्रदर्शन की जरूरत थी।
अब भारतीय टीम की कोशिश निर्णायक मुकाबले में अपनी गलतियों को सुधारकर सीरीज जीतने की होगी। बल्लेबाजों को बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय आक्रामकता के साथ साझेदारियां बनाने पर भी ध्यान देना होगा। संजू सैमसन की पारी ने दिखाया कि भारतीय टीम तेजी से रन बना सकती है, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए सिर्फ तेज शुरुआत नहीं, बल्कि अंत तक टिककर खेलने और दबाव में सही फैसले लेने की भी जरूरत होगी।

 

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