हमारा तो बहुत कुछ था…’ Samay Raina ने कश्मीर पर किया भावुक जिक्र, India’s Got Latent का वीडियो वायरल

हमारा तो बहुत कुछ था…’ Samay Raina ने कश्मीर पर किया भावुक जिक्र, India’s Got Latent का वीडियो वायरल

India’s Got Latent के एक एपिसोड में Samay Raina ने कश्मीर और अपने परिवार के अतीत का जिक्र करते हुए कहा, “हमारा तो बहुत कुछ था।” यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। जानें पूरा मामला।

कॉमेडियन और कंटेंट क्रिएटर समय रैना (Samay Raina) एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका कोई स्टैंड-अप शो नहीं, बल्कि लोकप्रिय शो India’s Got Latent का एक मेंबर्स-ओनली एपिसोड है। शो के दौरान एक हल्की-फुल्की बातचीत में समय रैना ने अपने कश्मीरी पंडित परिवार और कश्मीर से जुड़े अतीत का जिक्र किया। उनकी एक छोटी-सी टिप्पणी—“हमारा तो बहुत कुछ था”—ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। कई लोगों ने इसे कश्मीरी पंडित समुदाय के विस्थापन की ओर एक भावनात्मक संकेत माना।

ऐसे शुरू हुई बातचीत

शो में प्रतियोगी वानिका रैक्टा जजों के साथ बातचीत कर रही थीं। पैनल में राघव जुयाल, मुनव्वर फारूकी, निहारिका एनएम, रोहन जोशी और समय रैना मौजूद थे। बातचीत के दौरान वानिका से पूछा गया कि क्या वह एक संपन्न परिवार से आती हैं।

वानिका ने बताया कि उनके परिवार के पास शिमला में सेब के बाग हैं। उन्होंने कहा कि उनके भाई ने जमीन का एक हिस्सा बेच दिया है, लेकिन परिवार के पास अब भी कई सेब के बगीचे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता सरकारी शिक्षक हैं।

राघव जुयाल ने छेड़ा कश्मीर का जिक्र

वानिका की बात सुनने के बाद राघव जुयाल ने समय रैना की ओर देखते हुए कहा, “तुम्हारा भी तो था ना सेब का बगीचा कश्मीर में?”

इस पर समय रैना ने संक्षिप्त लेकिन अर्थपूर्ण जवाब दिया, “हमारा तो बहुत कुछ था।”

यह टिप्पणी कुछ ही शब्दों की थी, लेकिन इसे कई लोगों ने कश्मीरी पंडितों के 1990 के दशक में हुए विस्थापन और उस दौरान छूटी संपत्तियों व घरों की ओर इशारा माना।

गंभीर पल को मजाक में बदल दिया

समय के जवाब के बाद माहौल कुछ क्षणों के लिए गंभीर हो गया। राघव जुयाल ने उनके कंधे पर हाथ रखा। तभी समय ने माहौल हल्का करते हुए मुनव्वर फारूकी की ओर मुड़कर मजाकिया अंदाज में कहा, “बोल अब इसपे?”

इस पर मुनव्वर ने तुरंत जवाब दिया, “It wasn’t me” (ये मैंने नहीं किया था)।

उनके इस जवाब पर पैनल और वहां मौजूद दर्शकों के बीच हंसी गूंज उठी और माहौल फिर से हल्का हो गया।

पहले भी साझा कर चुके हैं परिवार की कहानी

यह पहली बार नहीं है जब समय रैना ने अपने परिवार के कश्मीर से जुड़े अनुभवों पर खुलकर बात की हो। इससे पहले अपने स्टैंड-अप स्पेशल और विभिन्न पॉडकास्ट में वह कई बार बता चुके हैं कि उनका परिवार कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर हुआ था।

उन्होंने कहा था कि हालात इतने खराब हो गए थे कि परिवार को अपनी जान बचाने के लिए घाटी छोड़नी पड़ी। उनके अनुसार, यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें अपना घर और सब कुछ पीछे छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

Dostcast में सुनाई थी परिवार की आपबीती

समय रैना ने Dostcast पॉडकास्ट में 1990 के कश्मीरी पंडित पलायन से जुड़े अपने परिवार के अनुभव विस्तार से साझा किए थे। उन्होंने बताया था कि उनका परिवार रातोंरात कश्मीर से निकल गया था और इस घटना का प्रभाव आज भी परिवार की यादों में मौजूद है।

उन्होंने यह भी कहा था कि उस कठिन समय में उनके परिवार की मदद कुछ स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों ने की थी। समय के अनुसार, उनके दादा एक डॉक्टर थे और समाज में उनकी अच्छी प्रतिष्ठा थी।

‘कश्मीरी मुसलमानों ने की थी मदद’

पॉडकास्ट में समय रैना ने बताया था कि उनकी बुआ उनके दादा के क्लिनिक तक पहुंचीं। वहां मौजूद कुछ कश्मीरी मुसलमानों ने उनके परिवार को सुरक्षित निकलने में मदद की।

समय के अनुसार, स्थानीय लोगों ने उनके दादा से कहा था कि उन्होंने वर्षों तक लोगों की सेवा की है, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। समय ने सार्वजनिक रूप से इस मदद का जिक्र करते हुए उन लोगों के प्रति आभार भी व्यक्त किया था।

सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

India’s Got Latent के इस एपिसोड का यह छोटा-सा हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। कई यूजर्स ने समय रैना की टिप्पणी को उनके परिवार के दर्द और विस्थापन की याद के रूप में देखा, जबकि कुछ लोगों ने इस बात की भी सराहना की कि उन्होंने गंभीर विषय को गरिमा के साथ रखा और बाद में माहौल को हल्का करने के लिए हास्य का सहारा लिया।

हालांकि, इस क्लिप को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे केवल एक व्यक्तिगत अनुभव की अभिव्यक्ति मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे कश्मीर के इतिहास से जुड़ी व्यापक चर्चा के संदर्भ में देख रहे हैं।

व्यक्तिगत अनुभव बना चर्चा का विषय

समय रैना की टिप्पणी ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि कश्मीर से जुड़े कई परिवारों के अनुभव आज भी उनकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक बातचीत का हिस्सा हैं। शो के दौरान कही गई उनकी बात केवल कुछ शब्दों की थी, लेकिन उसने अतीत की उन यादों को सामने ला दिया, जिनका असर आज भी कई परिवारों के जीवन में महसूस किया जाता है। वहीं, समय द्वारा पहले साझा किए गए अनुभव यह भी दिखाते हैं कि कठिन दौर में विभिन्न समुदायों के लोगों द्वारा की गई मानवीय मदद की कहानियां भी इस इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।

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