Rupee vs Dollar: पश्चिम एशिया तनाव और बढ़ते तेल दाम से रुपये ने छुआ नया न्यूनतम, जानें भारत पर क्या होगा असर

Rupee vs Dollar: पश्चिम एशिया तनाव और बढ़ते तेल दाम से रुपये ने छुआ नया न्यूनतम, जानें भारत पर क्या होगा असर

Rupee vs Dollar: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल से रुपये ने ऑल टाइम लो छुआ। जानें डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर असर।

Rupee vs Dollar: भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सोमवार, 9 मार्च को अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के दामों में तेज बढ़ोतरी के कारण रुपये की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर ऑल टाइम लो पर पहुंच गई। कारोबारी दिन की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 92.20 पर खुला और जल्दी ही 92.528 तक फिसल गया। इससे पहले 4 मार्च को रुपया 92.35 प्रति डॉलर के स्तर तक गिर चुका था।

रुपये में गिरावट के कारण (Rupee vs Dollar)

विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। Brent Crude वायदा 25.68% बढ़कर 116.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। Finrex Treasury Advisors LLP के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी रुपये पर दबाव बनाए रखेगी।

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एशिया की अन्य मुद्राएं भी सोमवार को कमजोर रहीं। अगर आने वाले कारोबारी दिनों में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती है, तो रुपया 93 प्रति डॉलर तक गिर सकता है। इस बीच, US Dollar Index 0.66% बढ़कर 99.64 तक पहुंच गया।

शेयर बाजार पर प्रभाव

कमजोर रुपये और बढ़ती तेल कीमतों का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी पड़ा। BSE Sensex 2,345.89 अंक गिरकर 76,573.01 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 708.75 अंक टूटकर 23,741.70 पर आ गया। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को कुल 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के आयात बिल को बढ़ा देती है। चूंकि तेल का भुगतान डॉलर में होता है, इसलिए कमजोर रुपये के चलते भारत को तेल खरीदने के लिए अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है। इससे महंगाई बढ़ने और राजकोषीय घाटा बढ़ने का जोखिम रहता है।

हालांकि, कमजोर रुपये कुछ क्षेत्रों के लिए लाभकारी भी है। IT, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनियों की आय डॉलर में होती है, इसलिए रुपये के कमजोर होने से उनकी आय में वृद्धि हो सकती है। वहीं, निवेशक वैश्विक अनिश्चितता के बीच शेयर बाजार से पैसा निकालकर गोल्ड और सिल्वर जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं।

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