रितेश देशमुख ने इंडियन आइडल के मंच पर आशा भोसले के साथ अपने मां जैसे रिश्ते को याद किया। जानें क्यों वह आशा जी को ‘आशा आई’ बुलाते हैं और उनके घर का वो यादगार भोजन।
“मैं उन्हें ‘आशा आई’ बुलाता हूँ”: रितेश देशमुख ने याद किया आशा भोसले का मां जैसा स्नेह
भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित सिंगिंग रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल’ का आगामी एपिसोड संगीत और भावनाओं का एक अद्भुत संगम होने वाला है। इस विशेष एपिसोड में संगीत की दुनिया की जीवंत किंवदंती आशा भोसले को एक भावुक श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस मौके पर बॉलीवुड के बहुमुखी अभिनेता और फिल्म निर्माता रितेश देशमुख ने शिरकत की और आशा जी के साथ अपने उस आत्मीय रिश्ते के पन्ने पलटे, जिससे दुनिया अब तक अनजान थी। रितेश ने साझा किया कि उनके लिए आशा भोसले केवल एक महान गायिका नहीं, बल्कि एक माँ के समान हैं।
मां जैसा स्पर्श और ‘आशा आई’ का संबोधन
रितेश देशमुख ने शो के मंच पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए बताया कि आशा भोसले के साथ उनका रिश्ता किसी पेशेवर जान-पहचान से कहीं ऊपर है। उन्होंने उस पल को याद किया जब वह पहली बार आशा जी से मिले थे। रितेश ने भावुक स्वर में कहा, “जब वह मुझसे पहली बार मिलीं, तो उन्होंने मेरे सिर पर जिस तरह हाथ फेरा, उसने मुझे पूरी तरह से निशब्द कर दिया। वह बिल्कुल वैसा ही अहसास था, जैसा एक माँ अपने बच्चे के प्रति ममता जताते हुए उसके सिर पर हाथ फेरती है।”
रितेश ने आगे बताया कि इसी वात्सल्य के कारण उन्होंने आशा जी को एक नया नाम दिया। उन्होंने कहा, “मराठी संस्कृति में माँ को ‘आई’ कहा जाता है। उस दिन से मैंने उन्हें ‘आशा आई’ (आशा माँ) बुलाना शुरू कर दिया। आज भी, जब मैं उनसे मिलता हूँ या उनके बारे में बात करता हूँ, तो उन्हें इसी सम्मानजनक और प्यार भरे नाम से संबोधित करता हूँ।” रितेश के अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री के चकाचौंध भरे माहौल में आशा जी का यह अभिभावक जैसा व्यवहार उनके लिए बहुत बड़ा मानसिक संबल रहा है।
जब आशा जी ने अपने हाथों से बनाया रितेश के लिए खाना
रितेश देशमुख ने अपनी यादों के पिटारे से एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने सेट पर मौजूद सभी लोगों की आँखों को नम कर दिया। यह किस्सा आशा जी की सादगी और दूसरों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है। रितेश ने बताया, “एक बार बातों-बातों में आशा आई ने मुझसे बड़ी आत्मीयता से मराठी में पूछा— ‘तुम्हाला काय आवडतं? तुम्ही काय खाता?’ (तुम्हें क्या खाना पसंद है? तुम क्या खाते हो?)।”
रितेश ने जब अपनी पसंद के व्यंजनों का जिक्र किया, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि संगीत की यह मल्लिका उनके लिए कुछ खास करने वाली है। रितेश ने आगे बताया, “मेरे बताने के कुछ समय बाद, उन्होंने विशेष रूप से अपने हाथों से वह खाना तैयार किया और मुझे बड़े प्यार से अपने घर पर आमंत्रित किया। मैं उनके घर गया, जहाँ हमने साथ बैठकर भोजन किया और घंटों तक ढेर सारी बातें कीं। एक इतनी बड़ी हस्ती का खुद रसोई में जाकर मेरे लिए खाना बनाना, मेरे जीवन की सबसे अनमोल यादों में से एक है।”
सफलता के सफर में निरंतर प्रोत्साहन और आशीर्वाद
आशा भोसले के साथ रितेश का यह रिश्ता केवल मुलाकातों तक सीमित नहीं था। रितेश ने खुलासा किया कि आशा जी उनके करियर और हर छोटी-बड़ी उपलब्धि पर करीब से नजर रखती थीं। उन्होंने बताया, “आशा आई मेरे प्रति बहुत सजग रहती थीं। जब भी मेरा कोई नया प्रोग्राम आता था या मैं टीवी पर किसी शो में नजर आता था, तो वह खुद फोन लगाती थीं। वह मुझसे विस्तार से बातें करती थीं, मेरे काम की सराहना करती थीं और मुझे ढेर सारा आशीर्वाद देती थीं।”
रितेश के अनुसार, एक नए कलाकार के लिए आशा भोसले जैसी शख्सियत का फोन आना और उनसे सराहना पाना किसी बड़े पुरस्कार से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन के उतार-चढ़ाव में आशा जी का यह प्रोत्साहन उनके लिए एक मार्गदर्शक की तरह रहा है।
एक अमर कलाकार की मानवीय छवि
इंडियन आइडल का यह एपिसोड केवल गानों के बारे में नहीं, बल्कि उन मानवीय संवेदनाओं के बारे में है जो कलाकारों को एक-दूसरे से जोड़ती हैं। रितेश देशमुख द्वारा साझा किए गए इन किस्सों ने आशा भोसले की उस छवि को दुनिया के सामने रखा है, जो उनकी जादुई आवाज से भी कहीं अधिक मधुर और ममतामयी है। यह श्रद्धांजलि न केवल आशा जी के संगीत के प्रति सम्मान है, बल्कि उनके उस विशाल हृदय के लिए भी है, जिसमें रितेश देशमुख जैसे कई कलाकारों के लिए एक माँ जैसा स्थान है।