Table of Contents
सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा ने अपना पहला गुरबानी सिंगल ‘मेरा सतगुरु प्यारा’ रिलीज किया। जानें इस भावपूर्ण रचना, टूर की सफलता और आध्यात्मिक महत्व के बारे में।
प्रतिष्ठित सितार वादक और नियो-क्लासिकल संगीतकार ऋषभ रिखीराम शर्मा ने अपना पहला गुरबानी सिंगल ‘मेरा सतगुरु प्यारा’ जारी कर संगीत जगत में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह रचना उनके लिए एक बेहद व्यक्तिगत और आध्यात्मिक मील का पत्थर है। ‘शिव कैलाश’ जैसे वायरल ट्रैक के माध्यम से 70 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल करने के बाद, ऋषभ ने अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब से लिए गए इस पावन शबद को एक एंबिएंट नियो-क्लासिकल कंपोजिशन में ढाला है। यह सिंगल भक्ति, मानसिक शांति और आंतरिक स्थिरता का एक जीवंत उदाहरण है।
संगीत और साधना का अनूठा मिश्रण
‘मेरा सतगुरु प्यारा’, जिसका अर्थ है ‘मेरा प्रिय सच्चा गुरु’, ऋषभ के सितार की गूंज, तबले की थाप और समकालीन इलेक्ट्रॉनिक सिंथ्स का एक सुंदर मिश्रण है। यह धुन केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि एक ध्यानपूर्ण साउंडस्केप है जो श्रोताओं को शांति, माइंडफुलनेस और भावनात्मक सुकून देने का प्रयास करती है। ऋषभ का यह कदम संगीत की सीमाओं से परे है; उन्होंने इस सिंगल से होने वाली सभी आय को स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेम्पल) और मानसिक स्वास्थ्य व सामुदायिक कल्याण के लिए काम करने वाली संस्थाओं को दान करने का संकल्प लिया है।
टूर के दौरान जीवंत हुआ यह भावपूर्ण पल
इस गाने का म्यूजिकल वीडियो ऋषभ के ‘सितार फॉर मेंटल हेल्थ इंडिया टूर 2026’ के चंडीगढ़ चरण के दौरान शूट किया गया है। वीडियो में वह जादुई क्षण कैद है जब स्टेडियम में मौजूद हजारों लोग पूरी तरह से स्तब्ध और शांत हो गए थे। ऋषभ के अनुसार, यह प्रदर्शन एक सामूहिक ध्यान (कलेक्टिव मेडिटेशन) जैसा महसूस हुआ।
ऋषभ के लिए यह सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक ‘खोज’ है
इस सिंगल के पीछे की भावना पर बात करते हुए ऋषभ ने कहा, “यह पावन शबद मानव भक्ति के सबसे अंतरंग प्रश्नों में से एक पूछता है कि कोई अपने प्रिय सच्चे गुरु से कैसे मिल सकता है? ‘मेरा सतगुरु प्यारा’ मार्गदर्शन, कृपा और आंतरिक शांति की आत्मा की एक कोमल खोज है।” उन्होंने आगे बताया कि गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक ऐसी दिव्य उपस्थिति हैं जो हमारी बेचैनी को दूर कर हृदय को आनंद से भर देते हैं। उनके लिए यह प्रदर्शन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं, बल्कि ‘खोज’ का ही एक रूप है, जो उन सभी के लिए है जो जीवन में दिशा या किसी उच्च शक्ति के संरक्षण की तलाश में हैं।
बचपन की यादें और प्रेरणा
हालांकि ऋषभ वैश्विक स्तर पर भारतीय शास्त्रीय रागों को समकालीन साउंडस्केप के साथ जोड़ने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ‘मेरा सतगुरु प्यारा’ उनके बचपन की यादों से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने अपनी मां को शबद सुनकर शांति प्राप्त करते हुए देखा था। यह सिंगल उन्हीं यादों का एक संगीतबद्ध उपहार है, जो विनम्रता और गुरु के साथ आत्मा के मिलन की तड़प को व्यक्त करता है।
‘सितार फॉर मेंटल हेल्थ’ टूर: एक ऐतिहासिक सफलता
‘मेरा सतगुरु प्यारा’ का रिलीज ऋषभ के 10-शहरों के ‘सितार फॉर मेंटल हेल्थ इंडिया टूर 2026’ के बाद आया है। यह टूर भारतीय संगीत इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि बन गया है। इस टूर ने 100,000 से अधिक दर्शकों को आकर्षित किया और लगभग 50 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो किसी भी शास्त्रीय वाद्य यंत्र-आधारित टूर के लिए एक रिकॉर्ड है।
इस टूर ने युवा पीढ़ी (Gen-Z और मिलेनियल्स) के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत को लेकर एक नया क्रेज पैदा किया। इस दौरे में भारत का पहला ‘एलईडी सितार’ भी पेश किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में दीपिका पादुकोण, तारा सुतारिया, मृणाल ठाकुर, सोभिता धूलिपाला, गौरी खान, कुमार मंगलम बिरला, तमन्ना भाटिया, जय शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जैसी अनेक हस्तियां शामिल हुईं।
ऋषभ रिखीराम शर्मा की यह नई रचना उनके इस मिशन को आगे बढ़ाती है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल एक प्राचीन कला नहीं, बल्कि समकालीन श्रोताओं के लिए एक जीवित, उपचार करने वाला और भावनात्मक रूप से प्रासंगिक माध्यम है। ‘मेरा सतगुरु प्यारा’ के माध्यम से, ऋषभ ने संगीत को सेवा और आध्यात्मिकता के साथ जोड़कर एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जो आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करता रहेगा।