Ravichandran Ashwin की Team India को सलाह, WTC Final की चिंता छोड़ Sri Lanka के खिलाफ टेस्ट पर दें ध्यान

Ravichandran Ashwin की Team India को सलाह, WTC Final की चिंता छोड़ Sri Lanka के खिलाफ टेस्ट पर दें ध्यान

 

Ravichandran Ashwin ने Team India को WTC Final 2027 की चिंता छोड़ मौजूदा टेस्ट सीरीज पर ध्यान देने की सलाह दी। जानिए भारत की WTC राह और आगे की चुनौतियां।

भारत के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया को बेहद अहम सलाह दी है। अश्विन का मानना है कि भारतीय टीम को फिलहाल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप यानी WTC फाइनल 2027 में पहुंचने की गणित और संभावनाओं के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय मौजूदा मुकाबलों पर ध्यान देना चाहिए। भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज 15 अगस्त से शुरू हो रही है और यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए WTC 2025-27 चक्र में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत पहले ही शुरुआती दो WTC फाइनल खेल चुका है, लेकिन 2025 के फाइनल में जगह नहीं बना सका था। ऐसे में मौजूदा चक्र में वापसी की कोशिश कर रही टीम पर परिणाम का दबाव स्वाभाविक रूप से काफी ज्यादा है।

अश्विन ने दिया ‘एक घंटे’ वाला मंत्र

अश्विन की सलाह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि खिलाड़ियों को लंबी अवधि की चिंता को फिलहाल अपने दिमाग से बाहर रखना चाहिए। उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में टीम को एक साथ पूरी सीरीज या WTC की स्थिति के बारे में सोचने के बजाय छोटे-छोटे लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। यानी एक समय में एक सत्र, एक घंटा और एक गेंद पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा उपयोगी होगा। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में भारत को हर गेंद और हर साझेदारी की अहमियत समझनी होगी। यदि खिलाड़ी शुरुआत से ही WTC फाइनल की संभावनाओं, जरूरी जीतों और अंक तालिका के दबाव में खेलेंगे, तो इससे उनके प्रदर्शन पर अतिरिक्त मानसिक बोझ पड़ सकता है। अश्विन का संदेश इसी दबाव को कम करने और खिलाड़ियों को वर्तमान में बनाए रखने पर केंद्रित है।

WTC में भारत की राह हुई मुश्किल

भारत ने 2021 और 2023 में लगातार दो बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि दोनों मौकों पर टीम खिताब अपने नाम नहीं कर सकी। इसके बाद 2025 के WTC फाइनल में भारत की गैरमौजूदगी ने टीम के टेस्ट प्रदर्शन को लेकर कई सवाल खड़े किए। मौजूदा 2025-27 चक्र में भी भारत की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 0-2 की हार ने भारत की फाइनल में पहुंचने की राह को काफी मुश्किल बना दिया। ऐसे में अब टीम को अपने बचे हुए मुकाबलों में लगातार शानदार प्रदर्शन करना होगा। उपलब्ध गणनाओं के मुताबिक भारत को अपने बाकी टेस्ट मैचों में लगभग छह से सात जीत हासिल करने की जरूरत पड़ सकती है ताकि फाइनल में पहुंचने की उसकी उम्मीद मजबूत हो सके।

श्रीलंका सीरीज से करनी होगी वापसी

श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच भारत के लिए सिर्फ एक सामान्य द्विपक्षीय सीरीज नहीं हैं। WTC तालिका के लिहाज से हर जीत महत्वपूर्ण होगी। भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह शुरुआत से ही सकारात्मक क्रिकेट खेले और सीरीज में किसी भी तरह के अंक गंवाने से बचे। श्रीलंका की परिस्थितियां स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार हो सकती हैं और बल्लेबाजों को भी धैर्य के साथ खेलना होगा। ऐसे में टीम संयोजन, बल्लेबाजी की निरंतरता और गेंदबाजों का सही इस्तेमाल निर्णायक साबित हो सकता है। भारत के लिए इस सीरीज में अच्छा प्रदर्शन आगे आने वाले कठिन विदेशी मुकाबलों से पहले आत्मविश्वास बढ़ाने का काम भी करेगा।

इसके बाद न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की चुनौती

श्रीलंका के बाद भारत को न्यूजीलैंड का दौरा करना है, जहां तीन टेस्ट मैचों की चुनौती होगी। विदेशी परिस्थितियों में टेस्ट जीतना हमेशा कठिन होता है और न्यूजीलैंड में भारतीय टीम को परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलनी होगी। इसके बाद भारत घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की बड़ी सीरीज खेलेगा। इस तरह आने वाले मुकाबले टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। मौजूदा कार्यक्रम को देखते हुए भारत को सिर्फ अपनी क्षमता पर ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस, फॉर्म और मानसिक मजबूती पर भी ध्यान देना होगा। लगातार कई महत्वपूर्ण टेस्ट खेलने के कारण टीम मैनेजमेंट के लिए खिलाड़ियों के कार्यभार का प्रबंधन भी बड़ी चुनौती रहेगा।

हर मैच को अलग मुकाबले की तरह देखना जरूरी

अश्विन की सलाह का मूल संदेश यही है कि भारतीय टीम को WTC की लंबी गणित को ड्रेसिंग रूम का बोझ नहीं बनने देना चाहिए। टेस्ट क्रिकेट में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं। पांच दिन के मुकाबले में एक खराब सत्र मैच का रुख बदल सकता है, जबकि एक मजबूत साझेदारी या शानदार गेंदबाजी स्पेल पूरी टीम को जीत की ओर ले जा सकता है। इसलिए खिलाड़ियों के लिए जरूरी है कि वे भविष्य की संभावनाओं के बजाय तत्काल चुनौती पर ध्यान दें। यदि भारत श्रीलंका के खिलाफ मजबूत शुरुआत करता है, तो आगे के मुकाबलों के लिए आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। इसके विपरीत शुरुआती मैच में अंक गंवाने से WTC की गणित और अधिक कठिन हो सकती है।

टीम इंडिया के लिए मानसिक मजबूती की परीक्षा

मौजूदा दौर में भारतीय टेस्ट टीम बदलाव के दौर से भी गुजर रही है। ऐसे समय में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा। कप्तान और कोचिंग स्टाफ के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे खिलाड़ियों को बाहरी दबाव से दूर रखें। WTC फाइनल का लक्ष्य निश्चित रूप से टीम के सामने होना चाहिए, लेकिन हर मुकाबले के दौरान उसी लक्ष्य के बारे में सोचना प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। अश्विन का ‘एक घंटे पर ध्यान’ वाला दृष्टिकोण इसी मानसिकता को मजबूत करने का प्रयास है। क्रिकेट में बड़े लक्ष्य छोटे-छोटे कदमों से हासिल होते हैं और टेस्ट मैच में भी यही सिद्धांत लागू होता है।

अब मैदान पर जवाब देने का समय

श्रीलंका के खिलाफ सीरीज से भारत के लिए WTC अभियान को नई दिशा देने का मौका है। टीम के सामने परिस्थितियां आसान नहीं हैं, लेकिन अगर खिलाड़ी अश्विन की सलाह के मुताबिक वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो दबाव को प्रदर्शन में बदला जा सकता है। WTC फाइनल की गणित बाद में देखी जा सकती है; फिलहाल भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अगला टेस्ट और अगला सत्र है। छह या सात जीत की जरूरत जैसी गणनाएं खिलाड़ियों के बजाय विश्लेषकों और प्रशंसकों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। टीम का काम सिर्फ मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलना है। यदि भारत श्रीलंका के खिलाफ मजबूत प्रदर्शन से शुरुआत करता है, तो मुश्किल दिख रही WTC राह में फिर से उम्मीद पैदा हो सकती है।

 

 

 

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