रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय क्रिकेट टीम को लेकर बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने टेस्ट, वनडे और टी20 के लिए अलग-अलग टीमें बनाने और खिलाड़ियों की चोट प्रबंधन व्यवस्था में जवाबदेही की बात कही।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य और खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर एक अहम सुझाव दिया है। अश्विन का मानना है कि अब समय आ गया है जब भारत को टेस्ट, वनडे और टी20 इंटरनेशनल के लिए अलग-अलग टीमें तैयार करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीम होने से खिलाड़ियों के वर्कलोड को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है और चोटों की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, उनके मुताबिक कुछ खिलाड़ी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग टीमों में शामिल हो सकते हैं।
‘तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीमों का समय आ गया है’
रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में अब तीनों फॉर्मेट के लिए अलग-अलग टीमों की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ खिलाड़ियों का अलग-अलग फॉर्मेट की टीमों में आना-जाना जारी रह सकता है, लेकिन मुख्य रूप से विशेषज्ञ खिलाड़ियों का समूह तैयार किया जा सकता है।
अश्विन के अनुसार, टेस्ट, वनडे और टी20 क्रिकेट की जरूरतें एक-दूसरे से काफी अलग हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को लगातार तीनों फॉर्मेट में खेलने से होने वाले शारीरिक दबाव और यात्रा के बोझ को कम करने के लिए टीमों को अलग रखने पर विचार किया जा सकता है।
चोट प्रबंधन को लेकर जवाबदेही की जरूरत
अश्विन ने खिलाड़ियों की चोट और उनके रिहैबिलिटेशन को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं चोट प्रबंधन की प्रक्रिया में जवाबदेही तय होनी चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने वरुण चक्रवर्ती का उदाहरण दिया, जिनका हालिया दौर चोटों से प्रभावित रहा है।
अश्विन ने बताया कि वरुण चक्रवर्ती लंबे समय तक राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी यानी NCA में रहे थे। उनके मुताबिक, तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) में खेलने के लिए अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उन्हें रिलीज नहीं किया गया। अश्विन ने कहा कि जिस खिलाड़ी की वापसी करीब एक महीने में होने की उम्मीद थी, वह दो से तीन महीने तक वहां रहा।
वरुण चक्रवर्ती का चोटों से प्रभावित रहा साल
वरुण चक्रवर्ती पिछले कुछ समय से भारतीय टी20 टीम के महत्वपूर्ण स्पिन विकल्पों में रहे हैं। हालांकि, चोटों के कारण उनका कार्यक्रम प्रभावित हुआ। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के पहले टी20 मैच में चोट लगने के बाद उन्हें सीरीज के बाकी मुकाबलों से बाहर होना पड़ा।
इससे पहले वह इंग्लैंड दौरे के दौरान लगी चोट से वापसी कर रहे थे। अफगानिस्तान के खिलाफ पहला टी20 मुकाबला उनकी वापसी का मैच था, लेकिन इसके बाद फिर चोट की समस्या सामने आ गई। इसके चलते उन्हें एशियन गेम्स और वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की घरेलू सीरीज से भी बाहर होना पड़ा।
अश्विन ने यह मुद्दा ऐसे समय उठाया है जब भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के वर्कलोड और चोट प्रबंधन को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है। लंबे क्रिकेट कैलेंडर में खिलाड़ियों को फिट रखना टीम प्रबंधन और सपोर्ट स्टाफ के लिए बड़ी चुनौती बनी रहती है।
IPL 2026 में भी चोट से जूझे वरुण
वरुण चक्रवर्ती का 2026 इंडियन प्रीमियर लीग सीजन भी चोटों से प्रभावित रहा। टूर्नामेंट के दौरान उन्हें कई फिटनेस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी के दौरान भी चोट ने उनकी राह मुश्किल की।
अश्विन ने वरुण के मामले का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि किसी खिलाड़ी के रिहैबिलिटेशन और ट्रेनिंग की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जानी चाहिए। उनका कहना था कि केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि चोट प्रबंधन से जुड़े पूरे सिस्टम की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग पर भी ध्यान देना चाहिए
रविचंद्रन अश्विन ने यह भी कहा कि चोट से बचने की जिम्मेदारी पूरी तरह टीम या मेडिकल स्टाफ की नहीं हो सकती। खिलाड़ियों को खुद भी यह देखना चाहिए कि वे किस तरह की ट्रेनिंग कर रहे हैं और उनके शरीर के लिए कौन सी एक्सरसाइज उपयुक्त है।
उन्होंने अपने करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि करीब एक दशक पहले उन्हें ओलंपिक लिफ्टिंग के कारण साइड स्ट्रेन हुआ था। इसके बाद उन्होंने स्नैचिंग जैसी एक्सरसाइज करना बंद कर दिया। अश्विन ने माना कि ओलंपिक लिफ्टिंग से गति और पावर प्रोडक्शन बेहतर हो सकता है, लेकिन अगर किसी खिलाड़ी के शरीर के लिए कोई ट्रेनिंग नुकसानदायक साबित होती है, तो उसे अपनी ट्रेनिंग में बदलाव करना चाहिए।
चोट और ट्रेनिंग के बीच संतुलन जरूरी
अश्विन के मुताबिक, आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों के लिए फिटनेस और पावर ट्रेनिंग महत्वपूर्ण है, लेकिन हर खिलाड़ी की शारीरिक जरूरत अलग होती है। इसलिए ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार करते समय खिलाड़ी की चोटों के इतिहास और शरीर की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
वरुण चक्रवर्ती का मामला भी इसी व्यापक चर्चा से जुड़ा है। लगातार क्रिकेट खेलने, यात्रा, ट्रेनिंग और मैचों के दबाव के बीच खिलाड़ियों को फिट रखने के लिए वैज्ञानिक और व्यक्तिगत दृष्टिकोण की जरूरत होती है।
भारतीय क्रिकेट में वर्कलोड मैनेजमेंट पर फिर चर्चा
अश्विन की टिप्पणी ने भारतीय क्रिकेट में वर्कलोड मैनेजमेंट और चोट प्रबंधन को लेकर बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। तीनों फॉर्मेट के लिए अलग-अलग टीमों का सुझाव भारतीय क्रिकेट के मौजूदा व्यस्त कार्यक्रम के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
हालांकि, तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीम बनाने की अंतिम व्यवस्था चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के निर्णय पर निर्भर करेगी। अश्विन ने अपनी राय रखते हुए खिलाड़ियों के स्वास्थ्य, फिटनेस और लंबे करियर को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया है।