रानी मुखर्जी ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि जन्म के बाद अस्पताल में उनकी अदला-बदली एक पंजाबी परिवार की बच्ची से हो गई थी। उनकी मां ने आंखों के रंग से उन्हें पहचान लिया और फिर उन्हें वापस परिवार के पास लाया गया।
बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार रानी मुखर्जी अपनी शानदार अभिनय क्षमता और दमदार फिल्मों के लिए जानी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके जन्म के तुरंत बाद अस्पताल में एक ऐसी घटना हुई थी, जिसने उनके परिवार को कुछ समय के लिए चिंता में डाल दिया था? दरअसल, रानी मुखर्जी जन्म के बाद गलती से एक पंजाबी परिवार की नवजात बच्ची से बदल गई थीं। यह घटना वर्षों बाद खुद रानी ने एक इंटरव्यू में साझा की थी। उन्होंने बताया कि अगर उनकी मां कृष्णा मुखर्जी ने बच्चे की आंखों का रंग ध्यान से न देखा होता, तो शायद यह गलती तुरंत पकड़ में नहीं आती। यह दिलचस्प और भावुक किस्सा आज भी उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
जन्म के बाद अस्पताल में हो गई थी अदला-बदली
रानी मुखर्जी का जन्म 21 मार्च 1978 को फिल्म निर्देशक और निर्माता राम मुखर्जी और कृष्णा मुखर्जी के घर हुआ था। जन्म के बाद अस्पताल में नियमित जांच के लिए नवजात शिशुओं को नर्सें अलग ले जाती थीं और बाद में उन्हें उनकी माताओं के पास वापस लाया जाता था।
रानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि इसी दौरान गलती से उन्हें एक पंजाबी परिवार के कमरे में पहुंचा दिया गया। जब नर्स उन्हें वापस उनकी मां के पास लेकर आई, तब उनकी मां ने बच्चे को देखते ही महसूस कर लिया कि यह उनकी बेटी नहीं है।
मां ने आंखों के रंग से पहचाना सच
रानी मुखर्जी के अनुसार, उनकी मां कृष्णा मुखर्जी उस समय अपने एक रिश्तेदार से बातचीत कर रही थीं। जैसे ही उन्होंने बच्चे की ओर देखा, उन्हें कुछ अलग महसूस हुआ।
उन्होंने तुरंत अस्पताल के स्टाफ से कहा कि यह उनकी बेटी नहीं है, क्योंकि उनकी बच्ची की आंखें भूरी (Brown Eyes) थीं, जबकि सामने मौजूद बच्ची की आंखों का रंग अलग था। इसके बाद अस्पताल में खोजबीन शुरू हुई।
रानी ने बताया कि उनकी मां ने पूरे विश्वास के साथ कहा था, “यह मेरी बेटी नहीं है। मेरी बेटी की आंखें भूरी हैं। मेरी बच्ची को ढूंढिए।”
पंजाबी परिवार के कमरे में मिली थीं रानी
खोजबीन के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों को पता चला कि रानी गलती से एक पंजाबी परिवार के कमरे में पहुंच गई थीं। रानी ने मजाकिया अंदाज में बताया कि उस परिवार में आठवीं बार बेटी का जन्म हुआ था और वह उन्हीं के साथ थीं।
उन्होंने हंसते हुए कहा कि आज भी उनके परिवार में मजाक किया जाता है कि वह असल में पंजाबी हैं और गलती से मुखर्जी परिवार में आ गईं। हालांकि यह केवल एक पारिवारिक मजाक है, लेकिन इस घटना ने उनके जन्म से जुड़ी यादों को हमेशा के लिए खास बना दिया।
सिमी ग्रेवाल के शो में भी सुनाया था किस्सा
रानी मुखर्जी ने यह दिलचस्प घटना सिमी ग्रेवाल के लोकप्रिय चैट शो में भी साझा की थी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में नवजात बच्चों को पहचान के लिए टैग लगाए जाते हैं, लेकिन किसी प्रक्रिया के दौरान नर्स से गलती हो गई और उन्हें गलत परिवार के पास पहुंचा दिया गया।
रानी ने कहा कि यदि उनकी मां ने आंखों के रंग पर ध्यान नहीं दिया होता, तो शायद यह गलती पकड़ने में और समय लग जाता। उनकी मां की सतर्कता की वजह से उन्हें जल्द ही अपने परिवार के पास वापस लाया गया।
रानी की भविष्यवाणी हुई सच
रानी मुखर्जी ने एक पुराने इंटरव्यू में मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनकी शादी किसी पंजाबी परिवार में होगी। उस समय उन्होंने यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही थी, लेकिन बाद में यह बात सच साबित हुई।
अप्रैल 2014 में रानी मुखर्जी ने फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा से शादी की। आदित्य चोपड़ा पंजाबी परिवार से आते हैं। दोनों ने इटली में बेहद निजी समारोह में विवाह किया था। उनकी शादी की तस्वीरें आज तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं, क्योंकि दोनों अपनी निजी जिंदगी को मीडिया की नजरों से दूर रखना पसंद करते हैं।
बेटी आदिरा को भी रखते हैं लाइमलाइट से दूर
शादी के बाद वर्ष 2015 में रानी और आदित्य चोपड़ा एक बेटी आदिरा चोपड़ा के माता-पिता बने। दोनों हमेशा अपनी बेटी की निजता का सम्मान करते हैं और उसे मीडिया व सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रखते हैं।
रानी कई बार कह चुकी हैं कि वह चाहती हैं कि उनकी बेटी सामान्य माहौल में बड़ी हो और अपनी पढ़ाई व बचपन का आनंद बिना किसी सार्वजनिक दबाव के ले सके।
आज भी चर्चा में रहता है यह दिलचस्प किस्सा
रानी मुखर्जी की यह कहानी केवल एक फिल्मी किस्सा नहीं बल्कि वास्तविक जीवन की ऐसी घटना है, जिसने उनके परिवार को कुछ समय के लिए चिंता में डाल दिया था। उनकी मां की सतर्कता और समझदारी की वजह से अस्पताल की यह बड़ी गलती समय रहते पकड़ ली गई।
आज भी जब रानी इस घटना को याद करती हैं, तो मुस्कुराते हुए इसे अपने जीवन का सबसे अनोखा अनुभव बताती हैं। यह किस्सा न सिर्फ उनके प्रशंसकों को हैरान करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक मां अपने बच्चे को कितनी बारीकी से पहचानती है। जन्म के कुछ ही समय बाद आंखों के रंग से अपनी बेटी को पहचान लेना उनकी मां की सूझबूझ और मातृत्व की गहरी भावना का उदाहरण माना जाता है।