प्रयागराज के प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान जी मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं जानिए। 20 फीट लंबी प्रतिमा, मंदिर का इतिहास और गंगा जल से जुड़े रहस्य के बारे में पढ़ें।
हिंदू धर्म में प्रयागराज बहुत पवित्र स्थान है। हिंदू धर्म शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं में प्रयागराज को “तीर्थराज” कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि वह सभी तीर्थों का राजा है। यहाँ अदृश्य सरस्वती, गंगा और यमुना के संगम का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पावन नगरी में गंगा नदी के किनारे एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां लेटी हुई भगवान हनुमान की प्रतिमा खड़ी है। दारागंज में स्थित इस मंदिर को लेटे हुए हनुमान, बड़े हनुमान, किले वाले हनुमान और बांध वाले हनुमान भी कहते हैं। इस मंदिर में देश भर से लोग दर्शन करने और पूजा करने आते हैं।
20 फीट लंबी हनुमान की मूर्ति
मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र है क्योंकि इसका स्वरूप अद्वितीय है। माना जाता है कि यह मूर्ति दक्षिणाभिमुखी है और लगभग 20 फीट लंबी है। धरातल से लगभग छह से सात फीट नीचे प्रतिमा का बड़ा भाग बताया जाता है। यहाँ हनुमान जी को लेटी हुई मुद्रा में देखा जाता है, जो मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है। श्रद्धालु प्रतिमा को देखकर सिंदूर, फूल और अन्य पूजन सामग्री देते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां पूजा करने और हनुमान जी का स्मरण करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
संत समर्थ गुरु रामदास से सम्बंधित है
इस प्राचीन मंदिर के बारे में कई धार्मिक मान्यताएं हैं। यहां कहा जाता है कि संत समर्थ गुरु रामदास ने भगवान हनुमान की मूर्ति बनाई थी। समर्थ गुरु रामदास को भगवान राम और हनुमान का सबसे बड़ा भक्त कहा जाता है। मंदिर की स्थापना और इतिहास को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं भी सुनाई देती हैं। यही कारण है कि मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि प्रयागराज की आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण भाग है।
हनुमान जी के साथ कई देवी-देवता हैं
मंदिर में भगवान हनुमान सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां भगवान शिव, पार्वती, भगवान गणेश, भैरव, मां दुर्गा, मां काली और नवग्रहों की प्रतिमाएं भी देख सकते हैं। इससे मंदिर के आसपास आने वाले लोगों को एक ही स्थान पर कई देवी-देवताओं की पूजा करने की सुविधा मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण करना और भगवान हनुमान की पूजा करना बहुत फायदेमंद होता है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर से अनोखी संबंध
गंगा नदी का जलस्तर भी लेटे हुए हनुमान मंदिर से जुड़ा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है और पानी मंदिर में हनुमान की प्रतिमा को छूता है, तो यह एक विशिष्ट संकेत है। मान्यता है कि गंगा का जल हनुमान को सलाम करता है। बड़ी संख्या में लोग बाढ़ और बरसात के दौरान इस दृश्य को देखने आते हैं। लेकिन ऐसी मान्यताएं धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई हैं और इन्हें उसी तरह देखा जाना चाहिए।
बड़े हनुमान जी का नाम क्या है?
प्रयागराज में भगवान हनुमान को “बड़े हनुमान जी” कहने की परंपरा बहुत लोकप्रिय है। मंदिर में स्थापित विशाल प्रतिमा इसका मूल कारण माना जाता है। भक्तों को इस 20 फीट लंबी प्रतिमा का आकर्षक स्वरूप आकर्षित करता है। इन्हें किले के पास होने के कारण भी “किले वाले हनुमान जी” कहा जाता है। गंगा नदी और बांध क्षेत्र की स्थानीय पहचान के कारण इसे भी “बांध वाले हनुमान जी” कहा जाता है।
मंदिर भक्तों की आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर। यहां विशेष अवसरों और पर्वों पर भक्तों की बहुतायत देखने को मिलती है। शनिवार और मंगलवार को भी बहुत से लोग हनुमान जी को देखने आते हैं। मंदिर में भगवान हनुमान की पूजा करने वाले लोग सुख, शांति, समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं।
मंदिर प्रयागराज की धार्मिक मान्यता से जुड़ा हुआ है
यहां के अनेक प्राचीन धार्मिक स्थानों और संगम की वजह से प्रयागराज को तीर्थराज कहा जाता है। प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है लेटे हुए हनुमान मंदिर। यह श्रद्धालुओं के लिए अलग है क्योंकि मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं, भगवान हनुमान की अद्भुत लेटी हुई प्रतिमा और गंगा के किनारे स्थित है। इसलिए प्रयागराज आने वाले लोग इस मंदिर को देखना महत्वपूर्ण मानते हैं।