तेल कंपनियों के शेयरों में 6% तक का उछाल: चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, निवेशकों में उत्साह

तेल कंपनियों के शेयरों में 6% तक का उछाल: चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, निवेशकों में उत्साह

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी के बाद HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में भारी तेजी। जानें क्यों बढ़ रहे हैं तेल कंपनियों के दाम और बाजार का हाल।

पेट्रोल-डीजल :भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबार के दौरान तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के शेयरों में 6 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया। यह तेजी तब आई है जब सरकार ने पिछले 12 दिनों में चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन किया है। बाजार में यह उत्साह ऐसे समय में देखा जा रहा है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया है।

बाजार का रुख और कंपनियों का प्रदर्शन

सोमवार की सुबह कारोबार की शुरुआत के साथ ही सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की होड़ मच गई। बीएसई (BSE) पर एचपीसीएल (HPCL) का शेयर लगभग 6 प्रतिशत उछलकर 412.55 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह, भारत पेट्रोलियम (BPCL) का शेयर करीब 4.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 309 रुपये के स्तर को छू गया, जबकि इंडियन ऑयल (IOC) भी 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ 145 रुपये के पार कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में इस वृद्धि से तेल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव कम होगा, जो लंबे समय से वैश्विक तनाव के कारण बढ़ा हुआ था।

क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

ईंधन की कीमतों में यह लगातार चौथी बढ़ोतरी है, जिसके कारण पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह संशोधन मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण हुआ है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल के दाम फरवरी के अंत से 50 प्रतिशत तक बढ़ गए थे। सरकारी तेल कंपनियों ने शुरुआत में जनता को महंगाई से बचाने के लिए कीमतों को स्थिर रखा था, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हुई लागत को उपभोक्ताओं तक पहुंचाना कंपनियों की आर्थिक मजबूती के लिए अनिवार्य हो गया है।

वैश्विक दबाव और निवेशकों की स्थिति

कच्चे तेल की कीमतें, जो पिछले कुछ दिनों में 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी हुई थीं, सोमवार को घटकर 98 डॉलर के नीचे आ गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की सकारात्मक खबरों के बाद वैश्विक बाजारों में थोड़ी राहत देखी गई है, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव भारतीय तेल कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड में गिरावट के बावजूद, भारत में ईंधन की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। विपक्षी दलों ने सरकार की इस ‘दैनिक लूट’ नीति की आलोचना की है, जबकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि में ओएमसी (OMC) कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। फिलहाल, निवेशक इन कंपनियों के भविष्य के प्रदर्शन को लेकर आशान्वित हैं, क्योंकि ये कंपनियां अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

Related posts

भारतीय शेयर बाज़ार में सुस्त चाल: निफ्टी और सेंसेक्स एक सीमित दायरे में, निवेशकों की सतर्कता जारी

शेयर बाज़ार अपडेट: 29 मई को सुस्त शुरुआत के संकेत, ईरान-अमेरिका तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

एंथ्रोपिक बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान एआई स्टार्टअप: ओपनएआई को पीछे छोड़ते हुए 1 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य के करीब

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More