SEBI के नए Closing Auction Session से 3:15 बजे के बाद 200 अंक उछला निफ्टी, जानें क्यों बदला क्लोजिंग प्राइस

SEBI के नए Closing Auction Session से 3:15 बजे के बाद 200 अंक उछला निफ्टी, जानें क्यों बदला क्लोजिंग प्राइस

 

SEBI के नए Closing Auction Session (CAS) के पहले दिन निफ्टी 3:15 बजे के बाद 200 अंक से अधिक उछलकर 24,774 पर बंद हुआ। जानें क्लोजिंग ऑक्शन कैसे काम करता है और निफ्टी में इतनी बड़ी छलांग क्यों आई।

 

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने निवेशकों और ट्रेडर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स दोपहर 3:15 बजे तक 24,573 के आसपास कारोबार कर रहा था, लेकिन आधिकारिक क्लोजिंग के समय यह 24,774.30 पर बंद हुआ। यानी महज क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान निफ्टी में 200 अंकों से अधिक की छलांग दर्ज की गई। पहली नजर में यह तेजी चौंकाने वाली लगी, लेकिन इसके पीछे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा लागू किया गया नया Closing Auction Session (CAS) प्रमुख कारण रहा।

3 अगस्त से लागू इस नई व्यवस्था ने एफएंडओ (F&O) श्रेणी के शेयरों में क्लोजिंग प्राइस तय करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। यही वजह है कि कई निवेशक और ट्रेडर्स यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर 3:15 बजे के बाद ऐसा क्या हुआ कि निफ्टी के क्लोजिंग स्तर में इतना बड़ा अंतर देखने को मिला।

क्या है नया Closing Auction Session?

SEBI ने भारतीय शेयर बाजार को अधिक पारदर्शी और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से Closing Auction Session (CAS) लागू किया है। पहले एफएंडओ शेयरों में सामान्य ट्रेडिंग 3:30 बजे तक चलती थी और अंतिम ट्रेडिंग प्राइस या VWAP (Volume Weighted Average Price) के आधार पर क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता था।

नई व्यवस्था के तहत अब एफएंडओ से जुड़े शेयरों में सामान्य कैश मार्केट ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे समाप्त हो जाती है। इसके बाद 3:15 बजे से 3:35 बजे तक Closing Auction Session आयोजित किया जाता है, जिसमें निवेशकों के खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं। इन ऑर्डर्स के आधार पर एक ऐसा मूल्य तय किया जाता है, जहां सबसे अधिक खरीद और बिक्री का मिलान संभव हो सके। यही मूल्य उस शेयर का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस बन जाता है।

निफ्टी में 200 अंकों की छलांग क्यों लगी?

निफ्टी की यह उछाल किसी अचानक हुई भारी खरीदारी का परिणाम नहीं थी। दरअसल, निफ्टी एक फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन आधारित इंडेक्स है, जिसमें बड़ी कंपनियों का प्रभाव अधिक होता है। क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, इंफोसिस और आईटीसी जैसे दिग्गज शेयरों का क्लोजिंग प्राइस 3:15 बजे के अंतिम ट्रेडिंग प्राइस से काफी ऊपर तय हुआ।

इन बड़ी कंपनियों के शेयरों में मामूली मूल्य वृद्धि भी निफ्टी इंडेक्स पर बड़ा असर डालती है। यही कारण रहा कि जब इन शेयरों के नए क्लोजिंग प्राइस तय हुए तो निफ्टी का आधिकारिक क्लोजिंग स्तर भी 200 अंक से अधिक ऊपर पहुंच गया।

क्लोजिंग ऑक्शन में कीमत कैसे तय होती है?

Closing Auction Session के दौरान एक्सचेंज निवेशकों के सभी खरीद और बिक्री ऑर्डर इकट्ठा करता है। इसके बाद ऐसा मूल्य चुना जाता है, जहां अधिकतम संख्या में शेयरों की खरीद-बिक्री संभव हो सके। यदि किसी शेयर में मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर होता है तो उसका क्लोजिंग प्राइस अंतिम ट्रेडिंग प्राइस से काफी अलग हो सकता है।

यही वजह है कि सोमवार को कई बड़े शेयरों के क्लोजिंग प्राइस में अंतर आया और इसका सीधा असर निफ्टी के अंतिम स्तर पर दिखाई दिया।

ऑप्शन मार्केट में तुरंत असर क्यों नहीं दिखा?

सोमवार को सबसे बड़ा सवाल यह भी रहा कि यदि निफ्टी 200 अंक ऊपर बंद हुआ, तो निफ्टी ऑप्शन प्रीमियम में उसी अनुपात में बदलाव क्यों नहीं दिखा?

इसका कारण यह है कि इक्विटी डेरिवेटिव (F&O) सेगमेंट में ट्रेडिंग 3:40 बजे तक जारी रही, जबकि कैश मार्केट 3:15 बजे बंद होकर क्लोजिंग ऑक्शन में चला गया। ऑप्शन की कीमतें केवल स्पॉट इंडेक्स पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि बाजार की भविष्य की उम्मीदों, अस्थिरता (Volatility), समय मूल्य (Time Value) और संभावित सेटलमेंट प्राइस के आधार पर तय होती हैं।

इसके अलावा, यह नई व्यवस्था का पहला दिन था। इसलिए मार्केट मेकर, आर्बिट्राज ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशक भी नई प्रणाली के अनुरूप अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे थे। इसी कारण कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट के बीच कुछ समय के लिए मूल्य अंतर देखने को मिला।

नई व्यवस्था से निवेशकों को क्या फायदा होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि Closing Auction Session से क्लोजिंग प्राइस अधिक पारदर्शी और वास्तविक बाजार मांग के अनुरूप तय होंगे। इससे अंतिम मिनटों में कृत्रिम उतार-चढ़ाव या प्राइस मैनिपुलेशन की संभावना कम होगी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII), म्यूचुअल फंड और बड़े निवेशकों को भी अधिक विश्वसनीय क्लोजिंग प्राइस मिलेगा, जिससे इंडेक्स फंड, ETF और डेरिवेटिव सेटलमेंट अधिक सटीक हो सकेंगे।

आगे क्या रह सकती है बाजार की रणनीति?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती कुछ दिनों तक निवेशकों और ट्रेडर्स को इस नई व्यवस्था को समझने में समय लगेगा। आने वाले सत्रों में क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन धीरे-धीरे बाजार इस नई प्रणाली के अनुरूप ढल जाएगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल 3:15 बजे के भाव को अंतिम क्लोजिंग न मानें, बल्कि आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस का इंतजार करें। नई व्यवस्था भारतीय शेयर बाजार को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Related posts

शेयर बाजार में बिकवाली तेज, सेंसेक्स 622 अंक टूटा; निफ्टी 23,500 के नीचे

कच्चे तेल की कीमत कौन तय करता है? जानिए ब्रेंट क्रूड, डब्ल्यूटीआई और ओपेक की भूमिका

शेयर बाजार में गिरावट तेज, सेंसेक्स 622 अंक टूटा; निफ्टी 23,500 के नीचे

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More