NHAI बनाएगा 54 नए हाईवे और एक्सप्रेसवे, 1.80 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं से कई राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा

NHAI बनाएगा 54 नए हाईवे और एक्सप्रेसवे, 1.80 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं से कई राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा

 

NHAI ने चालू वित्त वर्ष में 2,442 किलोमीटर लंबे 54 नए हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपये की योजना बनाई है। जानें किन राज्यों में बनेंगे ये हाईवे और क्या होगा इसका फायदा।

देश के सड़क बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को और मजबूत बनाने की दिशा में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। चालू वित्त वर्ष में NHAI ने 2,442 किलोमीटर लंबे 54 नए हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए निविदाएं (टेंडर) जारी करने की योजना बनाई है। इन परियोजनाओं पर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य देशभर में बेहतर सड़क संपर्क, तेज परिवहन व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देना है। माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से माल ढुलाई, यात्रा समय और औद्योगिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

किन राज्यों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

NHAI द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज के अनुसार, प्रस्तावित 54 हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाएं देश के कई प्रमुख राज्यों में विकसित की जाएंगी। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं।

इन राज्यों में बनने वाले नए हाईवे न केवल स्थानीय लोगों के लिए यात्रा को आसान बनाएंगे, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों, कृषि बाजारों और प्रमुख शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित करेंगे। इससे व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पिछले वर्ष की तुलना में कम परियोजनाएं

हालांकि इस वर्ष प्रस्तावित परियोजनाओं की संख्या पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कम है। वर्ष 2025-26 के लिए NHAI ने 124 परियोजनाओं की पहचान की थी, जिनकी कुल लंबाई 6,376 किलोमीटर और अनुमानित लागत 3,45,466 करोड़ रुपये थी।

इसके मुकाबले इस वर्ष 54 परियोजनाओं की घोषणा की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कम संख्या होने के बावजूद ये परियोजनाएं रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं और कई प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर को मजबूत करेंगी।

तीन अलग-अलग मॉडल पर होंगे प्रोजेक्ट

NHAI इन परियोजनाओं को तीन अलग-अलग निर्माण मॉडलों के तहत विकसित करेगा।

26 परियोजनाएं इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर बनाई जाएंगी।
21 परियोजनाएं हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित होंगी।
जबकि 7 परियोजनाएं बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल पर दी जाएंगी।

इन मॉडलों का उद्देश्य निजी और सरकारी भागीदारी के माध्यम से परियोजनाओं को समय पर पूरा करना तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

क्या हैं EPC, HAM और BOT मॉडल?

EPC (Engineering, Procurement and Construction) मॉडल में परियोजना के निर्माण की पूरी जिम्मेदारी सरकार द्वारा नियुक्त ठेकेदार की होती है। परियोजना पूरी होने के बाद उसका संचालन और रखरखाव सरकार करती है।

HAM (Hybrid Annuity Model) में परियोजना की लागत का एक हिस्सा सरकार और शेष हिस्सा निजी कंपनी वहन करती है। निर्माण पूरा होने के बाद सरकार तय अवधि तक कंपनी को किस्तों में भुगतान करती है। इस मॉडल में आमतौर पर 15 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास रहती है।

BOT (Build-Operate-Transfer) मॉडल में निजी कंपनी सड़क का निर्माण करती है, निर्धारित अवधि तक उसका संचालन और रखरखाव करती है तथा टोल के माध्यम से निवेश की भरपाई करती है। इस मॉडल में रियायती अवधि सामान्यतः 15 से 20 वर्ष तक होती है, जिसके बाद परियोजना सरकार को सौंप दी जाती है।

राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में NHAI की अहम भूमिका

भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और विकास में NHAI की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अंतर्गत देश में होने वाले कुल राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण का करीब 45 से 50 प्रतिशत कार्य NHAI द्वारा कराया जाता है।

इसके अलावा नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NHIDCL), बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) और विभिन्न राज्यों के लोक निर्माण विभाग (PWD) भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि नए हाईवे और एक्सप्रेसवे केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास की रीढ़ साबित होते हैं। बेहतर सड़क संपर्क से माल परिवहन की लागत कम होती है, उद्योगों को तेजी मिलती है, निवेश आकर्षित होता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।

इसके साथ ही कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम होगा, जिससे किसानों को भी फायदा मिल सकता है। पर्यटन क्षेत्र को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा और दूरदराज के क्षेत्रों का विकास तेज होगा।

आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बड़ा कदम

1.80 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली ये 54 नई परियोजनाएं भारत के सड़क नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य देश के विभिन्न हिस्सों को आधुनिक और सुरक्षित हाईवे नेटवर्क से जोड़ना है ताकि परिवहन व्यवस्था अधिक तेज, सुरक्षित और कुशल बन सके।

यदि ये परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो इससे न केवल संबंधित राज्यों की तस्वीर बदलेगी बल्कि भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता, औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में ये हाईवे देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

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