मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विकसित भारत-2047 में किसानों की भूमिका पर जोर देते हुए हरियाणा के लिए प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा वित्तीय पैकेज की मांग रखी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘Financing India’s Journey Towards Viksit Bharat’ सम्मेलन में उन्होंने कृषि क्षेत्र और जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। यह दो दिवसीय सम्मेलन केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित किया गया था, जिसमें राज्यों के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
निर्मला सीतारमण का जताया आभार
नायब सिंह सैनी ने सम्मेलन के आयोजन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में वित्तीय जरूरतों, निवेश, कृषि परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सम्मेलन के दूसरे दिन कृषि परिवर्तन पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।
हरियाणा के लिए एकीकृत प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा पैकेज की मांग
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा के लिए ‘Integrated Natural Farming and Water Security Funding Package’ की मांग रखी। उनके प्रस्ताव में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता की जरूरत पर जोर दिया गया।
नायब सैनी ने विशेष रूप से भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और माइक्रो-इरिगेशन के विस्तार के लिए पूंजीगत निवेश को शामिल करने की मांग रखी। उनका कहना है कि किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए खेती के साथ जल संसाधनों का संरक्षण भी जरूरी है।
भूजल रिचार्ज और वर्षा जल संचयन पर जोर
विकसित भारत-2047 में किसानों की अहम भूमिका!
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP ने भारत मंडपम, नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा का वित्तपोषण’ सम्मेलन के आयोजन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का… pic.twitter.com/NXCSTVF9fa
— DPR Haryana (@DiprHaryana) September 19, 2026
हरियाणा में कृषि के लिए भूजल की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने भूजल रिचार्ज और वर्षा जल संचयन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका प्रस्ताव जल संरक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में पानी के अधिक टिकाऊ इस्तेमाल से जुड़ा है।
केंद्र सरकार की मौजूदा कृषि योजनाओं में भी जल दक्षता और माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र के अनुसार, ‘Per Drop More Crop’ के तहत जुलाई 2026 तक 115 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को माइक्रो-इरिगेशन के दायरे में लाया जा चुका है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में कदम
प्राकृतिक खेती भी कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने की चर्चाओं का अहम हिस्सा है। केंद्र सरकार के अनुसार, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों और क्लस्टरों को सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य खेती में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, मिट्टी की सेहत और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।
नायब सैनी की ओर से प्रस्तावित पैकेज में प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसके जरिए कृषि क्षेत्र में निवेश, जल संरक्षण और किसानों के लिए टिकाऊ खेती के विकल्पों को एक साथ आगे बढ़ाने की बात सामने आई है।
विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की भूमिका
‘Financing India’s Journey Towards Viksit Bharat’ सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत की विकास यात्रा के लिए वित्तीय जरूरतों और निवेश के रास्तों पर राज्यों और केंद्र के बीच विचार-विमर्श करना था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सम्मेलन में कृषि परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, तकनीक, बैंकिंग और राज्यों की वित्तीय जरूरतों जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
नायब सिंह सैनी ने किसानों और कृषि क्षेत्र को विकसित भारत-2047 की यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए हरियाणा के लिए प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा से जुड़ी वित्तीय सहायता की मांग रखी। अब इस प्रस्ताव से जुड़े सुझावों और राज्यों की भागीदारी वाले आगे के विचार-विमर्श में इन मुद्दों पर चर्चा जारी रहने की उम्मीद है।