राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस 2026: महत्व, उद्देश्य और सरकारी योजनाएं; जानें क्यों है यह दिन खास

राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस 2026: महत्व, उद्देश्य और सरकारी योजनाएं; जानें क्यों है यह दिन खास

भारत में 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। जानें इस दिन का इतिहास, मातृ स्वास्थ्य का महत्व और सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं।

भारत में हर साल 11 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस’ (National Safe Motherhood Day) मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें उचित चिकित्सा देखभाल प्रदान करना है।

भारत यह दिवस आधिकारिक तौर पर घोषित करने वाला दुनिया का पहला देश है। यह दिन कस्तूरबा गांधी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है, जो स्वास्थ्य और सेवा की प्रतीक थीं।

इस दिन का मुख्य उद्देश्य

राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:

  • मात्र मृत्यु दर (MMR) में कमी: प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु की दर को कम करना।
  • गर्भावस्था के दौरान देखभाल: महिलाओं को प्रसव पूर्व (Ante-natal) और प्रसव के बाद की देखभाल के प्रति जागरूक करना।
  • संस्थागत प्रसव: घरों के बजाय अस्पतालों में प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देना ताकि आपातकालीन स्थिति में डॉक्टरी मदद मिल सके।
  • उचित पोषण: गर्भवती महिलाओं के लिए सही खान-पान और टीकाकरण सुनिश्चित करना।

सुरक्षित मातृत्व के लिए 5 जरूरी कदम

एक स्वस्थ माँ और स्वस्थ बच्चे के लिए इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  • नियमित जांच: गर्भावस्था के दौरान कम से कम 4 बार डॉक्टर से जांच (ANC) कराएं।
  • आयरन और फोलिक एसिड: खून की कमी (Anemia) से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह पर जरूरी दवाएं लें।
  • टीकाकरण: टिटनेस और अन्य आवश्यक टीके समय पर लगवाएं।
  • स्वच्छता और आराम: गर्भावस्था के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और पर्याप्त आराम करें।
  • डिलीवरी के बाद देखभाल: प्रसव के बाद 42 दिनों तक जच्चा-बच्चा की विशेष देखभाल और स्तनपान को बढ़ावा दें।

भारत सरकार की प्रमुख योजनाएं

सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है:

  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA): इसके तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जाती है।
  • जननी सुरक्षा योजना (JSY): गरीब महिलाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने के लिए नकद वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं को ₹5,000 की आर्थिक मदद दी जाती है।
  • लक्ष्य (LaQshya): लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में देखभाल की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक विशेष पहल।

सुरक्षित मातृत्व केवल एक महिला का स्वास्थ्य मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ समाज और राष्ट्र की नींव है। जब एक माँ सुरक्षित होती है, तो उसका पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ी सुरक्षित होती है। आइए, इस राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने आसपास की गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी और सहायता प्रदान करेंगे।

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