राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 पर PM मोदी ने लोगों से स्थानीय कपड़ों और भारतीय हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। जानें 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की खास बातें।
भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा और देश के लाखों बुनकरों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से भारत के स्थानीय कपड़ों और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से आग्रह किया कि वे देश की विविध हथकरघा परंपराओं को लोकप्रिय बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें। उन्होंने नागरिकों से अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों के साथ ‘गेट रेडी विद मी’ यानी GRWM वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की है।
PM मोदी ने की डिजिटल अभियान में भाग लेने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को लेकर लोगों से खास अपील की। उन्होंने भारत की अलग-अलग हथकरघा परंपराओं को दुनिया और देश के युवाओं तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि वे अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करें और इस अभियान में #NationalHandloomDay का इस्तेमाल करें।
GRWM वीडियो यानी ‘गेट रेडी विद मी’ सोशल मीडिया पर लोकप्रिय फॉर्मेट है, जिसमें लोग तैयार होने के दौरान पहने गए कपड़ों और उनके बारे में जानकारी साझा करते हैं। ऐसे वीडियो के माध्यम से पारंपरिक साड़ियों, कपड़ों और हथकरघा उत्पादों को युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने में मदद मिल सकती है।
12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह
कपड़ा मंत्रालय की ओर से 7 अगस्त को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाएगा। इस समारोह में भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में बुनकर समुदाय के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।
समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, कपड़ा मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव और विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित होंगे बुनकर
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देश के उत्कृष्ट बुनकरों और शिल्पकारों को सम्मानित किया जाएगा। समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कुल 22 पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं।
इन पुरस्कारों के माध्यम से उन बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला, रचनात्मकता और नवाचार के जरिए भारत की पारंपरिक हथकरघा विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समारोह में देशभर के हथकरघा बुनकर, पुरस्कार विजेता, उनके परिवार, पुरस्कार चयन समिति के सदस्य, क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।
प्रदर्शनी में दिखेगी भारत की विविध हथकरघा परंपरा
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के दौरान हथकरघा उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इसमें पुरस्कार विजेता बुनकरों के उत्पादों के साथ देश की अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक बुनाई को प्रदर्शित किया जाएगा। आगंतुक पारंपरिक कानी बुनाई और दीवार पर सजाए जाने वाले वस्त्र एवं आभूषणों की बुनाई जैसी शिल्प परंपराओं को भी करीब से देख सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान ‘अर्थ. रूट. थ्रेड- सेंट्रल इंडिया के ऑल डाई किए हुए हथकरघा वस्त्र’ और हथकरघा पुरस्कार पुस्तक 2025 का भी अनावरण किया जाएगा। इसके अलावा भारत की विविध हथकरघा परंपराओं को दर्शाने वाले चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे।
35 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है हथकरघा क्षेत्र
भारत का हथकरघा क्षेत्र केवल देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन भी है। कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, देश के हथकरघा क्षेत्र से 35 लाख से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इनमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। इस लिहाज से हथकरघा क्षेत्र महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हथकरघा उत्पादन की पारंपरिक तकनीकें पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और पारंपरिक बुनाई तकनीकों के इस्तेमाल से यह क्षेत्र टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देता है।
स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का संबंध भारत के ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन से भी है। हर साल 7 अगस्त को यह दिवस 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद में मनाया जाता है। इस आंदोलन का उद्देश्य विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के साथ-साथ स्वदेशी उद्योगों और भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देना था। इसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भारतीय बुनकरों और स्वदेशी वस्त्र परंपराओं को सम्मान देने का अवसर बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में चेन्नई में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की थी। तब से हर साल यह दिन देश के बुनकरों, शिल्पकारों और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों की मेहनत और प्रतिभा को सम्मानित करने के साथ मनाया जाता है।
गुजरात की हथकरघा परंपरा को भी मिल रही वैश्विक पहचान
गुजरात भारत के प्रमुख हथकरघा केंद्रों में से एक है। पटोला और कच्छ की पारंपरिक बुनाई को देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मध्य पूर्व जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पहचान मिली है। पारंपरिक शिल्प के साथ आधुनिक डिजाइन और बेहतर मार्केटिंग ने गुजरात के हथकरघा उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ाई है।
सरकारी सहयोग और बदलते बाजार के कारण गुजरात में हथकरघा क्षेत्र 12 हजार से अधिक बुनकरों और कारीगरों को रोजगार उपलब्ध कराने में योगदान दे रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की मेहनत को सम्मान देने का अवसर भी है। प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया अपील से उम्मीद है कि युवा वर्ग भी भारतीय हथकरघा उत्पादों से जुड़ेगा और ‘लोकल के लिए वोकल’ की भावना को आगे बढ़ाएगा।