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Muharram 2025 की शुरुआत 26-27 जून से होगी और आशूरा 6 जुलाई को मनाया जा सकता है। जानें मुहर्रम का इतिहास, महत्व और धार्मिक परंपराएं।
Muharram 2025: इस्लाम धर्म में मुहर्रम का महीना बेहद पवित्र और सम्मानित माना जाता है। यह इस्लामी चंद्र कैलेंडर का पहला महीना होता है और चार पवित्र महीनों (हराम महीनों) में से एक है, जिसमें युद्ध करना मना है। इस माह में इबादत, संयम और आत्मचिंतन को विशेष महत्व दिया जाता है।
मुहर्रम 2025 कब है?
इस्लामी या हिजरी कैलेंडर के अनुसार, साल 1447 हिजरी की शुरुआत 26-27 जून 2025 की रात से मानी जाएगी। वहीं, मुहर्रम का 10वां दिन, जिसे आशूरा कहा जाता है, 5 या 6 जुलाई 2025 को मनाया जा सकता है। भारत में मुहर्रम (Ashura) रविवार 6 जुलाई 2025 को मनाए जाने की संभावना है, हालांकि अंतिम तिथि चांद देखने पर निर्भर करती है।
मुहर्रम और आशूरा का धार्मिक महत्व
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मुहर्रम इस्लाम के चार पवित्र महीनों में से एक है जिसमें किसी भी प्रकार के संघर्ष या युद्ध को निषेध माना गया है।
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इस महीने की 10वीं तारीख को “आशूरा” कहते हैं, जो गहरे शोक और बलिदान का प्रतीक है।
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आशूरा के दिन ही इमाम हुसैन (र.अ.) और उनके परिवार को कर्बला में शहीद किया गया था।
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यह दिन इस्लामी इतिहास की सबसे बड़ी कुर्बानियों में से एक की याद में मनाया जाता है।
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कुछ लोग 9 और 10 मुहर्रम को रोज़ा (उपवास) भी रखते हैं।
मुहर्रम 2025 की खास बातें
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इस्लामी नववर्ष की शुरुआत 1 मुहर्रम से होती है।
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लोग इस दिन इबादत करते हैं और पैगंबर मुहम्मद (स.अ.) के समय के संघर्षों को याद करते हैं।
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मुहर्रम के दौरान दान, रोजा और प्रार्थना को बहुत पुण्यदायक माना गया है।
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शिया समुदाय विशेष रूप से इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम करते हैं और जुलूस निकालते हैं।
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