भारत को बड़ा आर्थिक झटका: मूडीज ने घटाया जीडीपी ग्रोथ अनुमान, पश्चिम एशिया संकट और महंगाई को बताया जिम्मेदार

भारत को बड़ा आर्थिक झटका: मूडीज ने घटाया जीडीपी ग्रोथ अनुमान, पश्चिम एशिया संकट और महंगाई को बताया जिम्मेदार

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 80 बेसिस पॉइंट घटाकर 6% कर दिया है। पश्चिम एशिया संकट, तेल की बढ़ती कीमतें और सुस्त निवेश को मुख्य कारण बताया गया है।

भारत की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान: मूडीज ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान में 80 बेसिस पॉइंट की कटौती की, इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया संकट था

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास दर के अपने पुराने अनुमानों में कटौती की है, जिससे आर्थिक गलियारों में चिंता फैल गई है। मूडीज ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर को वित्त वर्ष 2026 के लिए 6 प्रतिशत से 80 बेसिस पॉइंट कम कर दिया है। एजेंसी ने कहा कि भारत की विकास संभावनाएं पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता से सीधे प्रभावित हैं। हाल के अनुमानों की तुलना में मूडीज का यह नया अनुमान बहुत कम है, जो भारतीय बाजार की स्थिरता को वैश्विक अनिश्चितताओं से परेशान कर रहा है।

इन चार प्रमुख कारणों से ग्रोथ अनुमान कम हुआ

अपने विश्लेषण में, मूडीज ने कई महत्वपूर्ण घटकों का उल्लेख किया है जो भारत की अर्थव्यवस्था की गति को धीमा कर रहे हैं। एजेंसी ने चार प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

  • निजी खपत में कमजोरी: घरेलू खर्च में कमी आई है। महंगाई और अनिश्चितता ने बाजार की मांग को प्रभावित किया है, क्योंकि लोग बड़े निवेश या खरीदारी से बच रहे हैं।
  • सुस्त औद्योगिक गतिविधि: औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादन धीमा रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उद्योगों का आत्मविश्वास कम किया है।
  • निवेश की धीमी गति: निवेशक अब उच्च ब्याज दरों और वैश्विक तनाव के बीच अधिक सतर्क हैं। नई परियोजनाओं में लगाई गई धनराशि की गति अनुमानित नहीं है, जिससे दीर्घकालिक विकास पर असर पड़ रहा है।
  • ऊर्जा की बढ़ी लागत: पश्चिम एशिया के संकट से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने आयात बिल को बढ़ा दिया है और घरेलू महंगाई को बढ़ा दिया है, क्योंकि भारत अपनी आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है।

2027 के लिए भी कम अनुमान

मूडीज ने चालू वित्त वर्ष (FY2020) और अगले वित्त वर्ष (FY2027) के लिए अपने विचार बदले हैं। वित्त वर्ष 2027 के लिए एजेंसी ने विकास दर का अनुमान 6 प्रतिशत रखा है, जो पिछले अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक कम है। यह इस बात का संकेत है कि मूडीज को उम्मीद है कि मौजूदा आर्थिक बाधाओं और पश्चिम एशिया के संकट का असर अगले कुछ वर्षों तक रह सकता है, न कि केवल अल्पकालिक होगा। भारत को विकसित देश बनने की दिशा में 7 से 8 प्रतिशत की निरंतर वृद्धि की आवश्यकता है, इसलिए विकास दर का 6 प्रतिशत पर स्थिर रहना एक बड़ी चुनौती है।

पश्चिम एशिया संकट और इसका भारत पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने विश्वव्यापी व्यापार मार्गों पर असर डाला है। लाल सागर के माध्यम से होने वाले व्यापार में बाधा आने से माल ढुलाई की लागत बढ़ी है। भारत के लिए यह क्षेत्र ऊर्जा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, और लाखों भारतीय प्रवासियों से आने वाला रेमिटेंस, या प्रेषण, भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मूडीज का मानना है कि यदि यह तनाव जारी रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 रुपये प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जो भारतीय राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति को बड़ा खतरा बना देगा।

आगे की यात्रा और सरकारी प्रयत्न

अब, मूडीज की रिपोर्ट के बाद भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कार्रवाई पर सबका ध्यान है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती निजी निवेश को बढ़ावा देना और शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खपत को बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन वैश्विक झटकों का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है अगर मानसून बेहतर रहता है और सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च करती रहती है। हालाँकि, मूडीज की चेतावनी साफ करती है कि भारत को अपनी आर्थिक रणनीतियों को और अधिक वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों के प्रति भी लचीला बनाना चाहिए।

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