उज्जैन में भारी बारिश से शिप्रा नदी उफान पर, मंदिर जलमग्न। मुंबई और मध्य प्रदेश के लिए आईएमडी का अलर्ट। भारी बारिश से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।
जुलाई की शुरुआत के साथ ही भारत के मध्य और पश्चिमी राज्यों में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में गंभीर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पवित्र शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट के समीप स्थित कई मंदिर जलमग्न हो गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए आवागमन कठिन हो गया है। प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और बचाव कार्य जारी हैं।
आईएमडी का पूर्वानुमान: मानसून सक्रिय चरण में
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने नवीनतम बुलेटिन में स्पष्ट किया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब देश के अधिकांश हिस्सों में पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश के शेष हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तटों पर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण, मानसून अगले पांच से छह दिनों तक मध्य भारत में अपने सक्रिय चरण में रहेगा।
मध्य भारत के लिए आईएमडी ने 2 से 8 जुलाई तक व्यापक बारिश का पूर्वानुमान जताया है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। विभाग के अनुसार, 3 और 4 जुलाई को पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर ‘अत्यधिक भारी बारिश’ (extremely heavy rainfall) होने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वहीं, पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 3 और 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। 5 से 8 जुलाई के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। इस दौरान गरज-चमक के साथ 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है, जो जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
महाराष्ट्र और मुंबई में भी बारिश का कहर
मध्य प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी भारी बारिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। मुंबई और उसके उपनगरों में पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा दर्ज की गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई की सुबह 8 बजे तक मुंबई शहर में 126 मिमी, पूर्वी उपनगरों में 110 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 114 मिमी बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश के चलते मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में आईएमडी द्वारा ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों में मध्यम से तीव्र बारिश और 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है।
आपदा प्रबंधन और एहतियाती कदम
बारिश से जुड़ी घटनाओं को देखते हुए संबंधित राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय कर दिया है। उज्जैन में नदी तटों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं, मुंबई में महानगरपालिका ने जलजमाव वाले इलाकों से निपटने के लिए अतिरिक्त पंप और राहत कर्मियों को तैनात किया है। लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और समुद्र तटों व जल निकायों के पास न जाने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण दृश्यता कम हो सकती है और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का भी खतरा बना हुआ है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मानसून का यह सक्रिय चरण कृषि क्षेत्र के लिए वरदान माना जा रहा है, क्योंकि यह खरीफ फसलों की बुवाई के लिए आवश्यक है। हालांकि, भारी जलजमाव के कारण शहरों में बुनियादी ढांचा प्रभावित हो रहा है और यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। मध्य प्रदेश की उपजाऊ मिट्टी के लिए यह वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर सुधारने में मददगार साबित होगी, बशर्ते बाढ़ जैसी स्थिति न बने। आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज तय करेगा कि क्या यह बारिश जन-धन की हानि के बिना समाप्त होगी या तबाही का मंजर दिखाएगी।
निष्कर्षतः, मौसम विभाग की चेतावनियां स्पष्ट हैं कि आने वाला सप्ताह भारी बारिश का रहने वाला है। नागरिकों को अपने सुरक्षा के लिए सरकारी निर्देशों का पालन करना चाहिए। बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन प्रणालियों के लिए यह समय कड़ी परीक्षा का है। सरकारें स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं, लेकिन प्रकृति के इस उग्र रूप के सामने एहतियात ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।