निशानेबाज मनु भाकर से एक कार्यक्रम में क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर सवाल पूछा गया, जिससे सोशल मीडिया पर फैंस भड़क गए। जानें क्या था मनु का जवाब और क्यों छिड़ा विवाद।
भारत की दिग्गज निशानेबाज मनु भाकर, जिन्होंने ओलंपिक में कई पदक जीतकर देश का सिर ऊंचा किया है, हाल ही में एक विवाद का केंद्र बन गईं—लेकिन अपनी किसी गलती के कारण नहीं, बल्कि एक रिपोर्टर द्वारा पूछे गए सवाल के कारण। सोमवार को NRAI के एक कार्यक्रम के दौरान, एक पत्रकार ने ओलंपिक चैंपियन मनु भाकर से राजस्थान रॉयल्स के 15 वर्षीय उभरते क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के बारे में राय मांगी।
मनु भाकर का संतुलित और गरिमापूर्ण जवाब
भले ही यह सवाल उनकी अपनी उपलब्धियों और खेल से पूरी तरह अलग था, लेकिन मनु भाकर ने हमेशा की तरह अपनी सादगी और परिपक्वता का परिचय दिया। उन्होंने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की प्रगति पर बात करते हुए कहा:
“अगर मेंटरशिप (मार्गदर्शन) अच्छी है, साथ देने वाले लोग अच्छे हैं और आसपास का माहौल सही है, तो उम्र सिर्फ एक नंबर है। हुनर की कोई उम्र नहीं होती। महान चीजें 60 की उम्र में भी हो सकती हैं और 6 साल की उम्र में भी। अगर उनके आसपास के लोग उन्हें सही दिशा दिखाते हैं, तो मुझे यकीन है कि वह अगले बड़े सितारे होंगे।”
सोशल मीडिया पर क्यों भड़के खेल प्रेमी?
मनु भाकर के शांत स्वभाव के बावजूद, इंटरनेट पर खेल प्रशंसक इस सवाल से बेहद नाराज नजर आए। सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने सवाल उठाया कि एक ऐसी एथलीट से, जिसने ओलंपिक के मंच पर भारत का परचम लहराया है, एक उभरते क्रिकेटर के बारे में पूछने की जरूरत क्या थी?
प्रशंसकों का गुस्सा मुख्य रूप से इन कारणों पर केंद्रित था:
- सम्मान की कमी: प्रशंसकों का मानना है कि ओलंपिक चैंपियन से किसी दूसरे खेल के उभरते खिलाड़ी पर टिप्पणी मांगना उनके कद और उनकी मेहनत का अपमान है।
- क्रिकेट का अति-प्रचार: कई लोगों ने इसे भारत में ‘क्रिकेट के प्रति पक्षपात’ का उदाहरण बताया। उन्होंने आलोचना की कि कैसे अन्य खेलों के दिग्गजों को भी अक्सर क्रिकेट के इर्द-गिर्द के सवालों तक सीमित कर दिया जाता है।
- अनुचित तुलना: लोगों का तर्क है कि NRAI के कार्यक्रम में निशानेबाजी पर चर्चा होनी चाहिए थी, न कि आईपीएल की सनसनी पर।
क्या अन्य खेल अभी भी भारत में ‘सेकेंड क्लास’ हैं?
इस घटना ने एक बार फिर उस पुरानी बहस को जन्म दे दिया है कि क्या भारत में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को वह सम्मान मिलता है जिसके वे हकदार हैं? ओलंपिक पदक विजेताओं को अक्सर क्रिकेट से जुड़े कार्यक्रमों या सवालों का हिस्सा बना दिया जाता है, जिससे खेल विशेषज्ञों के बीच नाराजगी है। आलोचकों का कहना है कि जब तक हम अपने ओलंपिक नायकों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित नहीं करेंगे, तब तक ‘मल्टी-स्पोर्ट्स नेशन’ बनने का सपना अधूरा रहेगा।