शिक्षा व्यवस्था पर मनीष सिसोदिया का बड़ा हमला: कहा- ‘सिस्टम संभालने में विफल सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए’

शिक्षा व्यवस्था पर मनीष सिसोदिया का बड़ा हमला: कहा- 'सिस्टम संभालने में विफल सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए'

शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं में धांधली पर मनीष सिसोदिया ने सरकार को घेरा। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा- सिस्टम संभालना बस का नहीं तो छोड़ें कुर्सी।

देश की शिक्षा प्रणाली और परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों पर तीखा हमला बोला है। सिसोदिया ने शिक्षा मंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि न तो परीक्षाएं ईमानदारी से आयोजित की जा रही हैं और न ही जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों में जवाबदेही बची है।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप

मनीष सिसोदिया ने देश के युवाओं की चिंता को साझा करते हुए कहा कि आज का युवा सरकार से सीधे सवाल पूछ रहा है। उन्होंने कहा, “जब सरकार से पूरा सिस्टम ही नहीं संभल रहा, तो फिर कुर्सी पर बने रहने का क्या औचित्य है? युवाओं का भविष्य अंधकार में है और सरकार केवल अपनी साख बचाने की राजनीति कर रही है।” सिसोदिया ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षाओं में बार-बार होने वाली गड़बड़ियां और पेपर लीक की घटनाएं सिस्टम की विफलता का स्पष्ट प्रमाण हैं।

‘इस्तीफा न देना, जिम्मेदारी से भागना है’

मनीष सिसोदिया ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक सफल लोकतंत्र में यदि कोई मंत्रालय अपने मुख्य कार्य—परीक्षाओं का सही संचालन—को पूरा करने में असमर्थ है, तो नैतिक आधार पर शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न तो जिम्मेदारी ले रही है और न ही युवाओं के भविष्य को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठा रही है।

परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता पर सवाल

AAP नेता ने कहा कि परीक्षाएं केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों का आधार होती हैं। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर सरकार को घेरा:

  • परीक्षाओं के आयोजन में बार-बार सामने आ रही लापरवाही।
  • पारदर्शिता के नाम पर केवल खानापूर्ति करना।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों पर कोई कार्रवाई न होना।

‘युवाओं की आवाज को अनसुना कर रही सरकार’

सिसोदिया ने कहा कि देश का युवा आज सड़कों पर है, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार नहीं किए गए और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो देश की युवा शक्ति अपना रुख बदलेगी। मनीष सिसोदिया ने मांग की कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

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