साल 2026 में मलमास (अधिकमास) शुरू हो चुका है, जिससे शादी, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। जानें मलमास की सही तारीख, नियम और इस दौरान क्या करें और क्या न करें।
सनातन हिंदू पंचांग में धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला मलमास (जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) शुरू हो चुका है। इस महीने के शुरू होते ही देश भर में सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों जैसे—शादी-विवाह, मुंडन संस्कार, जनेऊ, नए व्यापार की शुरुआत और गृह प्रवेश आदि पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है।
ज्योतिष शास्त्र में इस समय को भौतिक और सांसारिक कार्यों के लिए भले ही वर्जित माना गया हो, लेकिन आध्यात्मिक शुद्धि, जप, तप और दान-पुण्य के लिए इसे सर्वोत्तम काल माना गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि साल 2026 में मलमास कब से कब तक रहेगा, इसके पीछे का वैज्ञानिक व धार्मिक कारण क्या है और इस दौरान आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
मलमास 2026 की सही तारीख और समय
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में आया है, जिसके कारण इस वर्ष विक्रम संवत 2083 में 12 नहीं बल्कि कुल 13 महीने होंगे।
- मलमास का प्रारंभ: 17 मई 2026 (रविवार) से यह विशेष महीना शुरू हो चुका है।
- मलमास का समापन: 15 जून 2026 (सोमवार) को इस महीने की समाप्ति होगी।
यानी कुल 30 दिनों तक सूर्य की गति मंद रहने और चंद्र-सौर मास के संतुलन के कारण कोई भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं होगा। 15 जून के बाद ही दोबारा मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।
क्यों लगता है मलमास? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण
पंचांग में हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ने के पीछे एक गहरा खगोलीय और वैज्ञानिक कारण छिपा है।
दरअसल, हमारा अंग्रेजी कैलेंडर सौर वर्ष पर आधारित होता है जिसमें 365 दिन और लगभग 6 घंटे होते हैं। वहीं, हिंदू पंचांग मुख्य रूप से चंद्र वर्ष पर आधारित होता है, जिसमें लगभग 354 दिन होते हैं। इस प्रकार सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है।
यह अंतर बढ़ते-बढ़ते हर 32 महीने और 16 दिन में एक पूरे महीने (लगभग 30 दिन) के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने और ऋतुओं का त्योहारों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए ज्योतिषविदों ने हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ने की व्यवस्था की है। अगर यह व्यवस्था न हो, तो हमारे सारे त्योहार (जैसे होली, दिवाली) अपने पारंपरिक मौसम से भटककर दूसरे मौसमों में आने लगेंगे।
अशुभ से ‘पुरुषोत्तम मास’ बनने की पौराणिक कथा
प्राचीन कथाओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने की उत्पत्ति हुई, तो इसे ‘मलमास’ (मलिन मास) कहा गया क्योंकि इसमें सूर्य संक्रांति नहीं होती थी। इस कारण कोई भी देवता इस महीने का स्वामी बनने को तैयार नहीं था और समाज में इसे शुभ कार्यों के लिए अछूत मान लिया गया।
अपने इस अपमान से दुखी होकर मलमास साक्षात भगवान विष्णु के पास वैकुंठ धाम पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई। भगवान विष्णु ने अत्यंत दयालु होकर मलमास को गले लगाया और इसे अपना सबसे उत्तम नाम ‘पुरुषोत्तम’ प्रदान किया। श्रीहरि ने वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति इस महीने में मेरी आराधना, व्रत या दान करेगा, उसे बाकी महीनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होगा। तब से यह महीना आध्यात्मिक रूप से अत्यंत पवित्र माना जाने लगा।
मलमास में भूलकर भी न करें ये काम (वर्जित कार्य)
चूंकि यह पूरा महीना केवल और केवल भगवान की भक्ति के लिए आरक्षित है, इसलिए इसमें सांसारिक सुखों से जुड़े निम्नलिखित काम वर्जित माने गए हैं:
- विवाह और सगाई: इस दौरान शादी या तिलक जैसे संस्कार करने से वैवाहिक जीवन में कलह और अशांति की आशंका रहती है।
- गृह प्रवेश और निर्माण: नए घर की नींव रखना या नए मकान में प्रवेश करना इस अवधि में अशुभ माना जाता है।
- मुंडन और कर्णवेध: बच्चों का चूड़ाकरण (मुंडन) या कान छेदने जैसे मांगलिक कार्य इस महीने नहीं किए जाते।
- नया व्यापार: किसी भी नए व्यवसाय, दुकान या बड़ी संपत्ति (जमीन-मकान) की खरीदारी की शुरुआत इस समय टाल देनी चाहिए।
महापुण्य कमाने के लिए इस महीने में क्या करें?
मलमास को केवल हाथ पर हाथ धरकर बैठने का महीना न समझें, बल्कि यह अपनी आत्मा को शुद्ध करने का सुनहरा अवसर है। इस दौरान ये कार्य अवश्य करें:
- मंत्र जाप और पाठ: रोजाना तुलसी की माला से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इस महीने श्रीमद्भागवत गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अमोघ फल देता है।
- विशेष दान: ज्येष्ठ के महीने में अधिकमास होने के कारण जल, अन्न, पीले वस्त्र, सत्तू, गुड़ और तांबे के बर्तनों का दान अत्यंत फलदायी माना गया है।
- सात्विक जीवन: इस पूरे महीने अपने आहार, विचार और व्यवहार को सात्विक रखें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
भौतिक विश्राम और आध्यात्मिक जागृति
मलमास को ‘अशुभ’ कहना पूरी तरह सही नहीं है; यह केवल भौतिक और सांसारिक कार्यों के लिए विराम का समय है, जबकि आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह ‘वरदान’ है। 17 मई से 15 जून 2026 तक के इस समय का सदुपयोग भगवान विष्णु की भक्ति में करें, ताकि जीवन के सभी कष्ट दूर हों और घर में सुख-समृद्धि का वास हो।